पंजाब मंत्रिमंडल ने मंगलवार को फैसला किया कि शहरी क्षेत्रों में जल सप्लाई और वातावरण सुधार के कार्यक्रमों के लिए फंड एकत्रित करने के उद्देश्य से शहरी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी बढ़ाई जाएगी। इस समय राज्य में पुरुष के नाम संपत्ति रजिस्टर करने के लिए छह फीसदी और महिला के लिए चार फीसदी स्टांप ड्यूटी लगती है। इसके अलावा एक फीसदी का अतिरिक्त सेस लगता है। वहीं, खून के रिश्ते में संपत्ति ट्रांसफर करने पर कोई स्टांप ड्यूटी नहीं लगती है।
जानकारी के अनुसार लोकल बाडी विभाग ने संपत्तियों की रजिस्ट्रेशन पर दो फीसदी सामाजिक सुरक्षा सेस लगाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन वित्त विभाग ने इसे एक फीसदी ही रखने की सलाह दी। इस फैसले से राज्य सरकार को 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है।
उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त, 2017 को राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए शहरी इलाकों में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पर स्टांप ड्यूटी 9 से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। उसके बाद राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से 18 अक्तूबर, 2018 को सरकार ने 17 मामलों पर स्टांप ड्यूटी बढा दी थी। हालांकि तब प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
अब राज्य सरकार का लक्ष्य स्टांप ड्यूटी से राजस्व बढ़ाना है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों (31 दिसंबर, 2019 तक) में सरकार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 1713.70 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं जबकि 2019-20 के लिए अनुमानित लक्ष्य 2650 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इस साल मार्च तक यह लक्ष्य पूरा हो पाना संभव नहीं लगता है।