उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हुए नेहरू-लियाकत समझौते की गलती को सुधार कर मोदी सरकार द्वारा पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का यह प्रयास प्रशंसनीय है। 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 फीसदी थी जो 2011 में घटकर लगभग चार फीसदी रह गई है।
1947 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में अल्पसंख्यकों की आबादी 22 फीसदी थी जो 2011 में मात्र 8 फीसदी रह गई है। लाखों-करोड़ों शरणार्थी यातनाएं झेल रहे हैं। उनको यातनाओं से मुक्ति के लिए मोदी सरकार यह कानून लेकर आई है।
आज कांग्रेस राजनैतिक अवसरवादिता के लोभ में अपने नेताओं व पूर्व प्रधानमंत्रियों नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी की विचारधारा के खिलाफ खड़ी हो गई है। इस मुद्दे पर 2003 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने वकालत करते हुए राज्यसभा में भाषण दिया एवं पत्र भी लिखा था।
कांग्रेस शासनकाल में वामपंथी नेता प्रकाश करात, अशोक गहलोत व तरुण गोगोई समेत अन्य सभी लोगों ने इसे लागू करने को लेकर पत्र लिखा था। अब जब पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे लागू कर दिया तो यह विपक्षी दलों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। यह उनके दोहरे चरित्र का प्रमाण है। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक भी उपस्थित रहे।