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अलविदा 2017: इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सीटीयू, रेलवे स्टेशन, दावे कई पर पूरा एक नहीं

Fri, 29 Dec 2017 03:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, योगेंद्र त्रिपाठी/दीपक शाही
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चंडीगढ़ एयरपोर्ट - फोटो : amar ujala
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साल 2017 में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सीटीयू और रेलवे स्टेशन को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन ने कई दावे किए, लेकिन पूरा एक भी नहीं हो पाया। इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जहां डोमेस्टिक फ्लाइट में लगातार बढ़ोतरी हुई। वहीं, मात्र एक इंटरनेशनल फ्लाइट ही उड़ान भर सकी। इस साल भी रनवे बढ़ाने और आईएलएस थ्री अपग्रेडेशन का काम पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ रही है। वहीं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी उम्मीद के अनुरूप तैयार नहीं हो पाए।
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1400 करोड़ खर्चे, बडे़ विमान नहीं भर सकते उड़ान
इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 1400 करोड़ की लागत से बनाया गया है। लेकिन अभी तक इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बडे़ विमान उड़ान भरने के लायक नहीं है। इसका मुख्य कारण रनवे का लंबा और चौड़ा नहीं होना है। इस कारण यह हालात बन गए हैं। अभी तक रनवे की लंबाई ग्यारह हजार फीट होनी थी। लेकिन यह दस हजार फीट तक ही बन पाया है। इसे अभी एक हजार फीट और बनाना है। इसके बाद ही यहां पर बडे़ विमान आसानी से लैंड होंगे और भारी विमान आसानी से उड़ान भर सकेंगे।

आईएलएस थ्री नहीं हुआ अपडेट
इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ठंड में धुंध के कारण जीरो विजिब्लिटी पर विमान नहीं उड़ रहे हैं। अगर इस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम कैट थ्री अपडेट होता तो यहां पर विमान जीरो विजिब्लिटी पर आ जा सकते हैं। यह भी वर्ष 2018 मार्च तक इंस्टाल होने की संभावना है। 2017 में लगातार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण फ्लाइट अमृतसर और जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड हो रही है। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम कैट टू होने से 1200 मीटर की विजिब्लिटी होने पर भी विमान उतारा जा सकता है।
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डोमेस्टिक दस और इंटरनेशनल एक फ्लाइट हुई है शुरू

चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट - फोटो : ‌file photo
इंटरनेशनल एयरपोर्ट से डोमेस्टिक के लिए दस से ज्यादा फ्लाइटों का संचालन किया गया है। वहीं, इंटरनेशनल फ्लाइट 2017 में केवल बैंकाक के लिए शुरू हुई है। अब इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शारजाह, दुबई और बैंकाक को मिलाकर तीन इंटरनेशनल फ्लाइटें चल रही हैं। एयर इंडिया की ओर से डोमेस्टिक फ्लाइट दिल्ली, मुंबई, पुणे, लेह के लिए डायरेक्ट शुरू की गई है।

वहीं, जेट एयरवेज की ओर से जम्मू, जयपुर के लिए फ्लाइट शुरू की गई है और इंडिगो की ओर से जयपुर, जम्मू, हैदराबाद के लिए फ्लाइटें चलाई गई। वहीं, स्पाइस जेट के लिए डायरेक्ट हैदराबाद से फ्लाइट शुरू की गई है। इससे यात्रियों को कई जगह के लिए डायरेक्ट फ्लाइट मिली है। इससे उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। कुल मिलाकर 37 फ्लाइटों का संचालन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हो रहा था। तीन दिसंबर से शेड्यूल चेंज होने के बाद यह 24 फ्लाइटों का हो गया है।

धुंध के कारण शहर से चलने वाली 12 फ्लाइटें बंद कर दी गई है। वहीं रात केसमय में किसी फ्लाइट का संचालन नहीं होता है। तीन दिसंबर के पहले फ्लाइटों का संचालन सुबह 7.25 से रात 9.35 बजे तक होता था। लेकिन रनवे रिपेयर और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम अपडेट करने के लिए सुबह 7.25 बजे से दोपहर बाद 3.45 बजे तक ही फ्लाइटों का संचालन 31 मार्च तक किया जाएगा। इस कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एक कमरे में चल रहा है इंटरनेशनल एयरपोर्ट का थाना

चंडीगढ़ एयरपोर्ट - फोटो : amar ujala
इंटरनेशनल एयरपोर्ट का थाना अभी तक एक कमरे में चल रहा है। इसके लिए जमीन तक की अलॉटमेंट नहीं हुई है। न ही कोई काम शुरू किया गया है। खाने-पीने के लिए अभी तक एयरपोर्ट के अंदर फूड स्टाल तक नहीं हैं। वहीं, शॉपिंग कांम्प्लेक्स भी अधूरा पड़ा है। हाल ही में एयरपोर्ट के अंदर एटीएम इंस्टाल किया गया है। इस कारण यात्रियों को परेशानी कम होती है।

सोने की तस्करी के 10 मामले उजागर
इस साल सोने की तस्करी के 10 मामले अब तक सामने आए हैं। इसमें दुबई से आते हुए सबसे अधिक सोना पकड़ा गया है। इसमें करीब 20 करोड़ का कुल सोना पकड़ा गया है। वहीं बैंकाक की फ्लाइट से भी सोने के दो केस पकड़ में सामने आए हैं।

सीटीयू की व्यवस्था को अपडेट करने के दावे अधूरे

सीटीयू - फोटो : अमर उजाला
शहर में सीटीयू की ओर से बड़े दावे किए गए थे। लेकिन कुछ दावे तो पूरे नहीं हो पाए। कुछ पर तेजी से काम चल रहा है। दस मिनट में बस मिलने के दावे कागजी रह गए। वहीं बसों को इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (आईटीएस) से जोड़ा जाएगा। सीटीयू की ओर से 2017 में लांग रूट की 120 बसें चलाने का प्रपोजल बनाया गया था। लेकिन अभी तक केवल 40बसें लांग रूट पर चल पाई हैं। इसमें अस्सी बसें नहीं खरीदी जा सकी हैं।

चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग और प्रशासन के बीच सहमति न बनने बसें नहीं खरीदी गई है। वहीं इस बार 29 नवंबर को नो डिटेंशन डे मनाया गया था। इस दिन सीटीयू की डिपो नंबर दो की सभी बसें चलने को तैयार थी। इसलिए यहां पर यह नो डिटेंशन डे मनाया गया। वहीं इलेक्ट्रानिक बसों को चलाने के लिए ट्रायल लिए गए लेकिन यह बसें मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं। इस कारण इसे भी नहीं खरीदा जाएगा। साल 2018 में आईटीएस की इप्लीमेंटेशन के लिए तीस जनवरी तक बीड जमा करानी होगी।

इसके माध्यम से सीटीयू की बसों की स्थिति देखी जा सकेगी। वहीं आने-जाने के रूटों की जानकारी बस स्टाफ और बस स्टैंड दोनों पर यात्रियों को दी जाएगी। बसों को जीपीएस सिस्टम से अपडेट किया जाएगा। शहर के दोनों अंतरराज्यीय बस स्टैंड सेक्टर-17 और 43 पर वाईफाई की सुविधा अभी तक नहीं मिल पाई है। वहीं लोकल रूट पर बसों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। इस कारण यात्रियों को दस मिनट में बस नहीं मिल पा रही है।

वहीं, नाइट बस सर्विस में केवल चार बसें चल रही हैं। इस कारण यात्रियों को परेशानी होती है। इसे बढ़ाने की बात सीटीयू की ओर से की गई थी।

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की सुरक्षा नहीं की जा सकी पुख्ता

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन
...और एक बार फिर विकास की उम्मीदों के बीच 2017 गुजरने जा रहा है, लेकिन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में इस साल भी कुछ खास इजाफा नहीं हो पाया। जो पुराने प्रोजेक्ट्स थे, आज भी उन्हीं प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जो साल के अंत तक कागजों तक सीमित रह गए। उन पर काम शुरू नहीं हो पाया। सबसे गंभीर बात तो यह है कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाए गए।

मेटल डिटेक्टर व एक्सरे से चेकिंग की सुविधा नहीं
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की सुरक्षा पर कई बार सवाल उठ चुके हैं। यहां के रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम तो दूर मेटल डिटेक्टर तक चालू हालत में नहीं हैं। यात्रियों के सामान की एक्सरे जांच की भी व्यवस्था नहीं है। यहां से दर्जनों गाड़ियां आती-जाती हैं और हजारों लोगों की भीड़ यहां होती है। ऐसे में कोई भी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है। स्टेशन पहुंचने के लिए दो प्रवेश द्वार हैं।

एक चंडीगढ़ और दूसरा पंचकूला की तरफ है। शताब्दी और अन्य अहम गाड़ियों के समय यहां पुलिसकर्मी देखे जा सकते हैं लेकिन बाकी समय ऐसा नहीं होता। चंडीगढ़ की तरफ के प्रवेश द्वार पर दो मेटल डिटेक्टर हैं जरूर लेकिन फिलहाल वे काम नहीं कर रहे। यही हालत पंचकूला की तरफ भी है। यात्रियों के सामान की जांच के लिए यहां एक्सरे सिस्टम नहीं है। दोनों प्रवेश द्वारों के अलावा खुले स्थान से भी किसी अप्रिय घटना को अंजाम दिया जा सकता है।
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पंचकूला को नहीं मिला नया प्लेटफार्म

Chandigarh Railway Station
2017 में चंद कुछ दिन और शेष रह गए हैं। इस साल भी चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पंचकूला साइड बने नए प्लेटफार्म का लाभ यात्रियों को नहीं मिल पाया है। इस प्लेटफार्म पर भी ट्रेनों का आवागमन 2018 में शुरू होगा। बता दे कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छह पर रेलवे लाइन का अभी बेस तैयार किया जा रहा है। इसका करीब 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यह प्रोजेक्ट अक्तूबर 2015 में पूरा होना था,

लेकिन प्रोजेक्ट का समय पूरा होने के दो साल बाद भी प्लेटफार्म पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। अभी प्लेटफार्म पर शेड भी लगाया जाना है।  रेलवे स्टेशन से जुड़ी सुविधाओं की बात करें या फिर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की। जब तक पंचकूला प्लेटफार्म नंबर-6 का कार्य पूरा नहीं हो जाता, पंचकूला की तरफ का विकास संभव नहीं है। हालांकि, यात्रियों ने रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ सुविधाएं बढ़ाने की कई बार मांग की।

सीसीटीवी कैमरे खराब, इस साल भी सिर्फ प्रपोजल तक बात पहुंची
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की विजिब्लिटी बेहद कमजोर है। 2010 में लगाए गए 35 सीसीटीवी कैमरों में से सात को कुछ दिन पहले ही खराब होने पर उतार लिया था। बचे सीसीटीवी की दृश्यता भी काफी कम हो चुकी है, जबकि इनमें से दस बेहद ही खराब हैं। रात के समय इनमें कुछ नजर नहीं आता। रेल यात्रियों की सुविधाओं की जांच के लिए आने वाले अधिकारी भी इस पर सवाल उठा चुके हैं। जब कोई अधिकारी दिल्ली से जांच के लिए आता है, तो अंबाला मंडल के रेल अधिकारी एक साल से सिर्फ एक ही राग अलाप रहे हैं, कि सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रपोजल भेजा गया है।
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