चंडीगढ़। शहर में पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के यूटी प्रशासन के आदेश के खिलाफ चंडीगढ़ क्रैकर्स डीलर्स एसोसिएशन पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। प्रशासन के फैसले के खिलाफ व्यापार मंडल ने भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि प्रशासन ने इस फैसले पर काफी देरी कर दी है। प्रशासन को इस बारे में एक महीने पहले फैसला ले लेना चाहिए था, इससे व्यापारियों को नुकसान नहीं होता।
पटाखा व्यापारियों ने कहा कि प्रशासन का फैसला एकतरफा है। इससे पटाखा व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। एसोसिएशन से जुड़े चिराग अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन के इस फैसले ने शहर के पटाखा व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। यदि प्रतिबंध लगाना था तो पहले लगा देते। शुक्रवार को व्यापारियों ने बैठक कर प्रशासन के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जाने की तैयारी कर ली है।
व्यापारियों का कहना है कि उनका लाखों रुपया डूब गया है, जो उन्होंने पटाखों के स्टॉक को उठाने के लिए टोकन मनी के रूप में दिया था। अब उन्हें वह टोकन मनी वापस नहीं मिलेगी। इसके अलावा दिवाली के दिन जो मुनाफा होना था, वह भी खत्म हो गया है। पहले लॉकडाउन ने कमर तोड़ी। अब कुछ उम्मीद बनी थी, जिसे प्रशासन ने धूमिल कर दी। बैठक में यह भी कहा गया कि भले ही शहर में पटाखे बैन हो गए हों, लेकिन लोग पंजाब व हरियाणा से खरीद लाएंगे।
क्या कहते हैं व्यापारी..
कई चक्कर काटने के बाद मिला था लाइसेंस
पटाखे के लाइसेंस के लिए कई बार डीसी ऑफिस के चक्कर काटने पड़े। लाइन में लगना पड़ा, तब जाकर उन्हें लाइसेंस मिला। प्रशासन की तरफ से जिन्हें लाइसेंस दिया गया, वीरवार को पुलिस द्वारा उनकी वेरिफिकेशन भी की गई। तब व्यापारियों को यह लगने लगा था कि इस बार शहर में पटाखे बिकेंगे, लेकिन शुक्रवार को अचानक से पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध का फैसला ले लिया गया। इससे व्यापारी बहुत उदास है। व्यापारियों का लाखों रुपये डूब गया है।
-विजय गोयल, पटाखा व्यापारी
फैसले से व्यापारियों को नुकसान
पटाखों पर बैन लगाए जाने के फैसले का विरोध करता हूं। इससे कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिन दुकानदारों ने पहले से ही माल खरीदा हुआ है, उनके लिए तो यह फैसला अप्रत्याशित है। उनके घाटे की भरपाई कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।
-कैलाश चन्द जैन, संयोजक, चंडीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल
प्रशासन अपने फैसले की समीक्षा करे
हम चंडीगढ़ प्रशासन के फैसले का विरोध करते हैं। दिवाली से सात से आठ दिन पहले पटाखों पर रोक लगाना अनुचित है। यदि ऐसा करना था तो लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू नहीं करते। इस बारे में प्रशासन सोचें और अपने फैसले की समीक्षा करें।
-चरणजीव सिंह प्रधान, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
पटाखा व्यापारियों के सपने चकनाचूर हो गए
प्रशासन ने पटाखे पर प्रतिबंध लगाकर सरासर व्यापारियों के साथ नाइंसाफी की है। व्यापारी वर्ग पहले से ही कोरोना काल की मंदी की मार से गुजर रहे थे। ऊपर से इस तरह के फैसले लेने से व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। इस दिवाली व्यापारियों को उम्मीद बंधी थी, लेकिन उनके सपने फिर से चकनाचूर हो गए।
-मलकीत सिंह, प्रधान मनीमाजरा व्यापार मंडल
रोक लगानी थी तो स्टाल लगाने की प्रक्रिया क्यों शुरू की
प्रदूषण से हम भी डरते हैं, लेकिन फैसला पहले ले लिया जाता तो व्यापारियों को नहीं खलता। अब जो व्यापारी माल लेकर आ चुके हैं, उनका क्या होगा। उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा। यदि रोक लगानी थी तो स्टाल लगाने की प्रक्रिया क्यों शुरू की?
-संजीव चड्ढा, महासचिव व्यापार मंडल
पटाखे प्रतिबंध करने के फैसले पर कांग्रेसियों में बिखराव
चंडीगढ़। कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। पटाखों पर प्रतिबंध लगने के बाद कांग्रेसियों की ओर से आई प्रतिक्रियाओं में बिखराव देखने को मिला। चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा पटाखा व्यापारियों के समर्थन में दिखे। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अपने फैसले पर दोबारा से विचार करना चाहिए। पहले व्यापारियों से लाइसेंस के लिए आवेदन करवाए और उसके बाद ड्रॉ निकाल दिया। विक्रेताओं ने पैसे भी लगा दिए। उनका कहना है कि चंडीगढ़ कांग्रेस इस मुद्दे पर व्यापारियों के साथ है। दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व निगम प्रतिपक्ष के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने प्रशासन का आभार जताकर उनके फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वे प्रशासन का धन्यवाद करते हैं।
पटाखे पर बैन लगने से कोरोना से होने वाले बड़े नुकसान को टाल दिया है। उन्होंने पीजीआई निदेशक डॉ. जगतराम का हवाला देते हुए कहा कि यदि पटाखे चलेंगे तो कोरोना और फैलेगा। जिंदा रहेंगे तो दिवाली अगले साल फिर धूमधाम से मनाएंगे। इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एचएस लक्की ने कहा कि हर बड़े मुद्दे पर कांग्रेस के पदाधिकारियों के बीच एक राय होनी चाहिए। आपस में बैठकर एक राय लेकर चलने से पार्टी के कार्यकर्ताओं में संशय नहीं रहेगी। इससे पार्टी में कमजोर होती है। सदस्यों को आत्मसंयम होकर पार्टी के बारे में सोचना चाहिए।