यूटी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के निर्माण का प्रस्ताव
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शिलान्यास के 10 साल बाद भी यूटी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग का का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। यूटी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग का वर्ष 2007 में शिलान्यास किया गया था। लेकिन दस सालों में बिल्डिंग निर्माण के लिए एक भी ईंट नहीं लगी। लेकिन कंस्ट्रक्शन एस्टीमेट सीधा 20 करोड़ रुपये बढ़ गया है।
शुरुआती दौर में बिल्डिंग का एस्टीमेट 52 करोड़ रुपये बनाया गया था जो अब बढ़कर 72 करोड़ रुपये हो गया है। प्रशासन हर साल अपने बजट और मुख्य प्रोजेक्ट्स में सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के निर्माण की बात दोहराता है। इस बार भी मुख्य प्रोजेक्ट्स की सूची में इसे ऊपर रखा गया है। लेकिन अभी भी इसके शुरू होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
इस बिल्डिंग के लिए फंड का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। प्रशासन ने करीब 6 महीने पहले बिल्डिंग निर्माण का रिवाइज्ड एस्टीमेट बनाकर केंद्र सरकार के पास भेजा था। लेकिन अभी तक भी इसकी मंजूरी नहीं मिल पाई है। किसी प्रोजेक्ट पर 50 करोड़ रुपये से अधिक के बजट खर्च की मंजूरी केंद्र सरकार से लेनी जरूरी होती है। इस प्रोजेक्ट का एस्टीमेट 72 करोड़ है, इसलिए उसे केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है।
बजट में एक बार फिर दोहराया यूटी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के निर्माण का प्रस्ताव
यूटी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के निर्माण का प्रस्ताव
यह बिल्डिंग सेक्टर-9डी के प्लॉट नंबर-7 में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और पुलिस हेडक्वार्टर के बीच खाली पड़ी जगह में बनाई जानी है। निर्धारित 2.72 एकड़ जमीन पर सात मंजिला बिल्डिंग बननी है। यह बिल्डिंग एन्वायरमेंट फ्रेडली होगी। अभी तक यूटी सेक्रेटेरिएट की अपनी बिल्डिंग नहीं है। सालों से यूटी सेक्रेटेरिएट का काम इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की बिल्डिंग में चल रहा है। अभी सेक्रेटेरिएट की मौजूदा बिल्डिंग में जगह कम होने के कारण प्रशासन के कई डिपार्टमेंट अलग-अलग सेक्टरों में चल रहे हैं। जिससे लोगों को भी डिपार्टमेंट ढूंढने में खासी परेशानी होती है। कई तरह की मंजूरी लेने के लिए अलग-अलग बिल्डिंग का चक्कर लगाना पड़ता है। बिल्डिंग बनने के बाद यह सभी डिपार्टमेंट एक छत के नीचे आ जाएंगे। इससे शहर के लोगों को अपने कामों को पूरा करवाने के लिए दूसरी जगह जाने की जरूरत नहीं होगी।
यह ऑफिस होंगे शिफ्ट
बिल्डिंग बनने के बाद कंट्रोलर लीगल मेट्रोलॉजी, फूड एंड सप्लाई, डायरेक्टोरेट सोशल वेलफेयर, एक्साइज एंड टैक्सेशन, असिस्टेंट रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसायटीज, डिप्टी कमिश्नर कम एग्रीकल्चरल, सेक्रेटरी स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड, ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफि सर के सभी ऑफि सेज नई बिल्डिंग में ही शिफ्ट होनी हैं।
यूटी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग का एस्टीमेट बनाकर केंद्र सरकार के पास भेजा हुआ है। 50 करोड़ से ऊपर के खर्च की केंद्र सरकार से लेनी अनिवार्य होती है। मंजूरी मिलने के बाद कंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया शुरू होगी। बजट एस्टीमेट पर मंत्रालय स्तर पर बातचीत चल रही है। अगले कुछ दिनों में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुकेश आनंद, चीफ इंजीनियर, यूटी प्रशासन।