बजट लेने के मामले में चंडीगढ़ दूसरी यूटी से भी पिछड़ गया। दूसरी यूटी पर वित्त मंत्रालय कुछ ज्यादा मेहरबान रहा। प्लान हेड में सभी यूटी में अंडमान एंड निकोबार को सबसे ज्यादा बजट मिला। प्लान हेड में अंडमान-निकोबार को चंडीगढ़ से तीन गुना से भी अधिक बजट मिला। अंडमान-निकोबार को मंत्रालय से प्लान हेड में 2250 करोड़ रुपये का बजट मिला है। जबकि चंडीगढ़ को महज 700 करोड़ रुपये ही मिल पाया है।
दादर एंड नगर हवेली भी इस मामले में चंडीगढ़ से आगे निकल गई। इस यूटी को प्लान हेड में 900 करोड़ रुपये का बजट मिला। हालांकि नॉन प्लान हेड में चंडीगढ़ को सभी यूटी से ज्यादा बजट मिला है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस बार अंडमान एंड निकोबार की तर्ज पर ही मंत्रालय से अधिक बजट मांगा था। 2095 करोड़ रुपये का बजट एस्टीमेट मंत्रालय को भेजा गया था।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा नगर निगम के लिए रखा गया था। इस बार निगम के लिए 600 करोड़ से अधिक का बजट मांगा गया था। इसका सबसे बड़ा कारण निगम के पास अपना राजस्व स्त्रोत नहीं होना बताया जा रहा है। अपने काम चलाने के लिए निगम को बार-बार एफडी तुड़वानी पड़ती है, लेकिन प्रशासन की यह योजना वित्त मंत्रालय को रास नहीं आई।
चंडीगढ़ पहले से विकसित, नहीं है अधिक बजट की जरूरत
बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ के बारे में मंत्रालय की अलग राय है। उनका मानना है कि चंडीगढ़ देश का नियोजित शहर है। यहां सभी चीजें पहले से ही बेहतर हैं। ऐसे में उसको ज्यादा बजट की जरूरत नहीं है। यूटी प्रशासन के अधिकारी मंत्रालय के अधिकारियों को अपनी बजट की जरूरत मजबूती से नहीं बता पाए। इस कारण यूटी को 700 करोड़ से ही संतोष करना पड़ा। कम बजट मिलने से चंडीगढ़ में विकास के पहिए की रफ्तार धीमी हो जाएगी।
बिना विधानसभा वाली यूटी को मिले बजट का चार्ट
यूटी-------------------------प्लान-------------नॉन प्लान
अंडमान एंड निकोबार-----2250--------------1795.02
दादर एंड नगर हवेली-----900----------------155.84
चंडीगढ़--------------------700-----------------2834
दमन एंड दीव-------------575----------------187.72
लक्षद्वीप------------------525----------------699.54