देश की अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए नया आयकर स्लैब एक क्रांतिकारी कदम है। आप देखना, इससे आने वाले समय में कितना फायदा होगा। यह स्लैब मध्यम वर्गीय व्यापारियों के लिए काफी फायदेमंद है और देश को उठाने के लिए एक बेहतरीन कदम है। पांच लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। जबकि आगे 2.5 लाख के बाद पांच फीसदी इनकम टैक्स लगता था।
नई स्लैब में अब लोग पांच लाख तक रिटर्न भरेंगे तो उनको टैक्स नहीं लगेगा, इससे नए आयकर दाता बढ़ जाएंगे। ऐसे लोग अपनी इनकम ज्यादा से ज्यादा दिखाने की कोशिश करेंगे, जो टैक्स नहीं अदा करना चाहते। 5 से 7.5 लाख तक आय पर 10 फीसदी का टैक्स लगेगा तो इस स्लैब में भी काफी लोग आ जाएंगे क्योंकि पहले टैक्स की दर 20 फीसदी होती थी।
7.5 लाख से 10 लाख की आय पर 15 फीसदी टैक्स होगा। 10 लाख से 12.5 लाख की आय पर 20 फीसदी टैक्स होगा। नई टैक्स व्यवस्था के तहत इसमें कोई डिडक्शन शामिल नहीं होगा, जो डिडक्शन लेना चाहते हैं वो पुरानी दरों से टैक्स दे सकते हैं। यानी कि टैक्सपेयर्स के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होगी।
यह नए स्लैब तब लागू होंगे, जब करदाता अपने दूसरे एक्जेम्पशन यानी दूसरे छूट या लाभ को छोड़ेगा। मेरा तो यह भी मानना है कि इनकम टैक्स में बड़े बदलाव के बाद टैक्स रियायतों के जरिए बचत प्रोत्साहित करने की नीति खत्म हो जाएगी। इससे बचत में गिरावट बढ़ेगी और बीमा, मेडिक्लेम, छोटी बचत स्कीमों पर भी इसका असर होगा। अगर होम लोन पर टैक्स छूट भी नई स्कीम का हिस्सा होती है तो हाउसिंग भी प्रभावित होती। अब अगर लोग नई स्लैब का हिस्सा बनेंगे तो उनको तमाम पॉलिसी को अलविदा कहना होगा तो ऐसे में कंपनियों पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं।
पहले सरकार की तरफ से बीमा, निवेश, घर का किराया, स्कूल की फीस समेत 100 रियायतों को पुरानी टैक्स स्लैब में शामिल किया गया था, जिसमें अब 70 रियायत नई स्लैब में खत्म कर दी गई है। अगर आपको पांच लाख रुपये तक इनकम टैक्स की स्लैब में आना है तो इन रियायतों को छोड़ना पड़ेगा जिसका असर उन तमाम कंपनियों पर होगा जो टैक्स रिबेट के लिए कार्य करती हैं।
इससे एक फायदा यह भी होने जा रहा है कि लोग अब ज्यादा से ज्यादा सफेद धन को नए स्लैब में शो करेंगे जो कारोबार में निवेश के लिए फायदेमंद साबित होगा। अगर सफेद धन मार्केट में बढ़ता है तो निश्चित तौर पर रियल एस्टेट कारोबार बढ़ेगा। प्रापर्टी निवेश काफी बढ़ेगा और मार्केट में बूम आ सकती है। दिनेश सरना, लेखक आयकर विभाग के सीनियर एडवोकेट और अर्थशास्त्री हैं।
यह बजट देश की आर्थिकता को मजबूत करेगा। बीते कुछ समय से देश में छाई मंदी को दूर करने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर की टैक्स दरों में कमी कर मध्यम वर्गीय लोगों को बड़ी राहत दी है। जीएसटी के सरलीकरण के साथ-साथ देश के बड़े शहरों को आपस में जोड़ने के लिए बनाए जाने वाले राष्टीय राजमार्ग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन पैदा करेंगे। छोटे शहरों में हवाई अड्डे के निर्माण की घोषणा से तरक्की के रास्ते खुलेंगे। दविंदर पाल सिंह, उद्योगपति व सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट से जहां अपनी सरकार द्वारा पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के रखे लक्ष्य को एक कदम आगे बढ़ाया है, वहीं मध्यम वर्ग के लोगों को टैक्स की छूट देकर उनके हाथों में अधिक नगदी देने के प्रयास किए गए हैं। इससे लोगों की खरीददारी करने की क्षमता बढ़ेगी। प्रधानमंत्री के प्रयासों को सफल करने के लिए लोग ईमानदारी से टैक्स भी भरें। जीएसटी फॉर्म का सरलीकरण छोटे व्यापारियों को राहत देगा। कमल डालमिया, चेयरमैन अमृतसर फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
बजट 2020-21 में इनकम टैक्स की नई दरों में सेक्शन 80 सी की छूट को बाहर रखना करदाताओं की उलझनें बढ़ाने वाला है। अगर सरकार बचत को प्रोत्साहन नहीं देना चाहती तो करदाताओं के लिए पेंशन की सुविधा दे। इस बजट में उद्योग को प्रोत्साहित करने हेतु कारगर कदम नहीं उठाए गए जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है। देश की लड़खड़ाती जीडीपी को भी इस बजट से राहत नहीं मिलेगी क्योंकि बचत पर मार पड़ने से खपत पर भी असर पड़ेगा। बजट व्यापार जगत की आशाओं पर खरा नहीं उतरा। प्यारा लाल सेठ, अध्यक्ष, पंजाब व्यापार मंडल
बजट में जिस प्रकार कृषि को राहत दी गई है, वैसी व्यापार जगत को नहीं दी गई। इनकम टैक्स दरों में बदलाव आंखों में धूल झोंकने के बराबर है। जीएसटी में अप्रैल में नए फॉर्म की घोषणा से व्यापारी स्तब्ध हैं क्योंकि जीएसटी में अब तक छोटे बड़े एक हजार बदलाव पहले ही किए जा चुके हैं। एक भारत एक बिजली दर की घोषणा नहीं की गई। वित्तमंत्री ने इनकम टैक्स उपभोक्ताओं को कोई भी सुविधा जैसे की मेडिकल, बीमा और पेंशन नहीं दिए जाने पर व्यापारी निराशा में हैं। बैंकों में जमा पूंजी पर 1 लाख से 5 लाख की गारंटी संतोषजनक नहीं है। सरकार उपभोक्ता की पूर्ण जमा राशि पर गारंटी दे। समीर जैन, महामंत्री, पंजाब व्यापार मंडल