एक रेलवे के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दिल्ली-लखनऊ रूट पर सबसे प्रीमियम ट्रेन स्वर्ण शताब्दी है। जिससे दिल्ली से लखनऊ जाने में करीब साढे 6 घंटे का समय लगता है और ‘तेजस’ को 6 घंटे 20 मिनट का, यानी कोई चमत्कार नहीं कर दिया है तेजस ने, जैसा कि बताया जा रहा है।
हां, एक बात जरूर है कि तेजस एक्सप्रेस में एसी चेयरकार का किराया 1,125 रुपये वसूला जा रहा है, जबकि स्वर्ण शताब्दी का किराया 800 से ज्यादा नहीं है और उसमे भी सीनियर सिटीजन और बच्चों को रेलवे द्वारा दी जा रही सामान्य छूट मिलती है। लेकिन तेजस में यात्रियों को ऐसी कोई छूट नहीं मिलती। बता दें कि तेजस में किराया तय करने के लिए डायनेमिक फेयर सिस्टम लागू है। डायनेमिक फेयर सिस्टम फ्लाइट्स की बुकिंग के लिए भी लागू होता है। हो सकता है कि फेस्टिवल सीजन में फ्लाइट के किराए से ज्यादा टिकट तेजस का हो जाए।
भारतीय रेलवे की कुछ खास बातें
भारतीय रेलवे दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी रोजगार देने वाली कंपनी है और रेलवे में करीब 13 लाख लोग काम करते हैं। देशभर में करीब 1 लाख 15 किलोमीटर रेलवे ट्रैक हैं, 12 हजार से भी ज्यादा ट्रेनों का रोजाना संचालन होता है और रोजाना औसतन 2 करोड़ 30 लाख यात्री भारतीय रेलों में सफर करते हैं।
ये है बजट के पिटारे का सार-
- 4 स्टेशनों का री-डेवलपमेंट होगा।
- पीपीपी मोड के माध्यम से 4 स्टेशन और 150 यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
- रेलवे के स्वामित्व वाली भूमि पर रेल पटरियों के साथ एक बड़ी सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना।
- तेजस जैसी और ट्रेनों को देश के प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों से जोड़ा जाएगा।
- मुंबई से अहमदाबाद के बीच हाई स्पीड ट्रेन को सक्रिय रूप से चलाया जाएगा।
- 100 लाख करोड़ रुपये का नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया जाएगा।
- 27 हजार किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण किया जाएगा।