मेरी नजर में यह बजट पूरी तरह से देशहित में पेश किया गया है। आयकर टैक्स में जो भी नई स्लैब बनाई गई, यह कदम सराहनीय है। लेकिन इसमें एक बात मुझे ठीक नहीं लगी कि सरकार ने डिडक्शन को खत्म कर दिया है। सरकार को इस बारे में दोबारा विचार करना चाहिए। कृषि क्षेत्र में सरकार ने अच्छा प्रयास किया है, लेकिन सरकार को चाहिए कि बड़े किसानों पर पांच फीसदी तक टैक्स लगाया जाना चाहिए। अशोक जुनेजा, चेयरमैन, पंजाब प्लाईवुड एसोसिएशन
कहीं खुशी कहीं गम जैसे बजट
वित्तमंत्री का बजट कहीं खुशी कहीं गम जैसा है। साइकिल इंडस्ट्री की पहले से मांग थी कि चाइना बाईसाइकिल और साइकिल पाटर्स को भारत में डंप कर रहा है। इसे रोका जाना चाहिए। भारत सरकार ने साइकिल पर 20 फीसदी और पार्ट्स पर 30 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगा दी थी। लेकिन चाइना ने चालाकी से साफटा देशों से माल भारत में भेजना शुरू किया, जिन पर कस्टम ड्यूटी जीरो है। अमेरिका ने चाइना की तरफ से आने माल पर 67 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगा दी है, तो भारत क्यों नहीं। हम यूरोप को साइकिल पार्ट्स एक्सपोर्ट कर सकते हैं कि सरकार ने बजट में हमें अपग्रेड करने के लिए कुछ नहीं दिया। जीएसटी की बात करे तो साइकिल इंडस्ट्री पर 12 फीसदी और कच्चे माल पर 18 फीसदी है। हमारा पैसा तो जीएसटी में जा रहा है जैसे एक्सपोर्ट्स को डिजीटल भुगतान करने की बात कही गई है, उसी तर्ज पर एमएसएमई और साइकिल पार्टस को भी शामिल किया जाए। डीएस चावला, प्रधान यूसीपीएमए
बजट को 10 में से देंगे 5 नंबर
इस बजट में इंडस्ट्री को सीधे तौर पर कोई फायदा नहीं दिया गया है। इसे इज ऑफ डूईंग बिजनेस कहना ठीक रहेगा। अगर बजट को अंक देने की बात कहें तो मैं 10 में से 5 नंबर दूंगा। सबसे पहले एमएसएमई को ऑडिट करवाने के लिए एक करोड़ रुपये बढ़ा 5 करोड़ की छूट देना अच्छा कदम है। बजट में उत्पादन को बढ़ावा देने, क्वालिटी स्टैंडर अपग्रेड करने, निर्यात में डिजीटल रिफंड, डाटा सेंटर, आईपीआर के तहत अलग विभाग बनाने जैसे कदम सरहानीय है। हमें उम्मीद थी कि जीएसटी को कुछ कम किया जाएगा, लेकिन उस पर कोई राहत नहीं दी गई। मेरा अनुमान है कि इस बजट से जीडीपी 5.5 से छह फीसदी तक जा सकती है। उपकार सिंह आहूजा, प्रधान, सीआईसीयू
स्लैब में बदलाव भ्रमित करने जैसा
सरकार का यह बजट ठीक ठाक कहा जा सकता है। आयकर स्लैब में बदलाव एक भ्रमित करने जैसा है। हर व्यक्ति पहले पुराने तरीके से टैक्स की गणना करेगा, फिर नए स्लैब के अनुसार। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की सालाना आय 7.50 लाख है तो पुरानी स्लैब के अनुसार उसे 26 हजार 500 रुपये टैक्स देना पड़ेगा। नए स्लैब के अनुसार उसे 37 हजार 500 रुपये देने पड़ेंगे। सरकार ने बजट में शिक्षा, कृषि क्षेत्र में बड़ी घोषणाएं की है लेकिन यह बताया नहीं कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा। बजट की कॉपी मिलने पर सब कुछ साफ हो जाएगा। दिनेश कुमार, उप प्रधान इन डॉयरेक्ट टैक्स एसोसिएशन