फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन दो युवाओं को मिला ओबामा से मिलने का न्यौता

Sun, 25 Jan 2015 05:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के दो युवाओं को 27 जनवरी को दिल्ली के दूतावास में होने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के संबोधन कार्यक्रम के लिए न्योता मिला है। जिले के लिए यह बड़ी बात है कि अमेरिकी दूतावास द्वारा इन दोनों युवाओं को इनके सफल स्पेस रिसर्च वर्क को देखते हुए कार्यक्रम के लिए निमंत्रण भेजा गया है।
विज्ञापन


उधर, निमंत्रण मिलने के बाद जगाधरी के सुभाष नगर निवासी सौरभ कौशल और हुडा सेक्टर-17 निवासी निशांत अरोड़ा के घर पर खुशियों का माहौल है। सौरभ और निशांत दोनों ही दोस्त हैं और कलावड़ के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से बीटेक करने के बाद एमटेक कर रहे हैं।

दोनों मिलकर 2008 से से स्पेस साइंस के फील्ड में रिसर्च कर रहे हैं और उन्होंने स्पेस में जमा देब्रिस को हटाने के लिए नई तकनीक की खोज की है। दोनों को इनके रिसर्च के लिए बहुत से विदेशों से अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से यूएसए में जिरोम पियर्सन अवॉर्ड, डॉ. कलपना चावला के पिता द्वारा साइंटिस्ट अवॉर्ड, यंग इनोवेटर अवॉर्ड व सेम ग्लोबल अवॉर्ड फॉर यूथ शामिल हैं।
विज्ञापन


हाल ही में उन्हें भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा ने भी रिसर्च के लिए बधाई दी थी। निशांत और सौरभ का कहना कि यह उनके लिए गौरव की बात है कि अमेरिका के राष्ट्रपति के संबोधन कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया है।
विज्ञापन

स्पेस पर रिसर्च करने का मकसद

सौरभ और निशांत ने बताया कि स्पेस पर भेजे जाने वाले सेटेलाइट व अन्य उपग्रह कुछ समय बाद काम करना बंद कर देते हैं। वे लाखों किलोमीटर प्रति मिनट की स्पीड से चलते हैं और कई बार टकराकर टूट जाते हैं।

उनके दस सेंटीमीटर के छोटे-छोटे पार्ट्स स्पेस में घूमते रहते हैं, जो विभिन्न देशों द्वारा दूसरे ग्रहों पर किए जाने वाले मिशन में बाधा बनने के साथ बड़ी घटना का भी कारण बन सकते हैं। ऐसा न हो इसके लिए उनके द्वारा डीओरबिटक, यूज ऑफ नेनोमेस, एनर्जी प्रोडक्शन और रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी इजाद की गई है। इसी को लेकर वे गहन अध्ययन कर रहे हैं और अब तक उनकी रिसर्च से मिले तथ्यों को वैज्ञानिकों द्वारा सही माना गया है।

घर पर खुशी का माहौल
सौरभ के पिता रमेश कौशल जगाधरी में फैक्टरी चलाते हैं, जबकि निशांत के पिता गुलशन अरोड़ा रेलवे में कार्यरत हैं। दोनों दोस्त काफी समय से एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं और वर्ष 2012 में बीटेक करने के बाद रिसर्च वर्क में जुटे हुए हैं और साथ-साथ एमटेक भी कर रहे हैं।

इससे पहले निशांत ने हुडा सेक्टर-17 के स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल और सौरभ जगाधरी के एसडी पब्लिक स्कूल शिक्षा ग्रहण की थी। उनके परिजनों का कहना है कि बेटों की इस उपलब्धि पर उनका सीना चोड़ा हो गया है। उन्हें आशा है कि दोनों आगे चलकर भी विज्ञान के क्षेत्र में देश का भी नाम ऊंचा करेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें