फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीएसएफ जवान के सीने में धड़का हिमाचल के बेटे का दिल

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। हिमाचल के 50 साल के पुरुष ने दुनिया से जाते हुए 6 लोगों की बेरंग जिंदगी में खुशियां भर दी हैं। हिमाचल के बेटे का दिल सेना के एक जवान के सीने में धड़क रहा है और फेफड़ा बहरीन निवासी 29 साल के युवक में प्रत्यारोपित किया गया है जबकि कॉर्निया और किडनी को पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल चार मरीजों को प्रत्यारोपित की गई है।
विज्ञापन

मरीज के ब्रेन डेड घोषित होने पर उनके परिजनों द्वारा लिए गए अंगदान के निर्णय के बाद प्राप्त अंगों का मिलान किया गया। इससे पता चला कि फेफड़े और दिल के लिए पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल किसी मरीज की क्रॉस मैचिंग नहीं हो पा रही है। बिना देरी किए पीजीआई प्रशासन ने उसकी सूचना आसपास के अस्पतालों को दी। इसके बाद दिल्ली में भर्ती 44 साल के एक बीएसएफ के जवान के लिए दिल और चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में भर्ती बहरीन निवासी 29 साल के युवक के लिए फेफड़ा अलग-अलग ग्रीन कोरिडोर बनाकर भेजा गया।
बॉक्स
बहादुर पत्नी ने लिया निर्णय, बोलीं- इस दुख से किसी अन्य परिवार को न गुजरना पड़े
अपने पति के अंगदान का निर्णय लेने वाली बहादुर पत्नी का कहना है कि उनका परिवार और वह जिस दुख से गुजर रही हैं, उसकी पीड़ा कोई और नहीं समझ सकता। उन्होंने अपने सीने पर पत्थर रख अपने पति के अंगों के दान का निर्णय लिया है ताकि इस दुख से किसी अन्य परिवार को न गुजरना पड़े। उन्होंने अपनी पहचान उजागर किए बिना लोगों को सिर्फ यह संदेश दिया कि हमने अंगदान के जरिए अपने प्रिय को दुनिया से जाने के बाद भी दूसरों के माध्यम से जीवित रखने का प्रयास किया है। ऐसा कर दूसरों की खत्म होती जिंदगी को पुनर्जीवन प्रदान किया जा सकता है। इसलिए दुख की घड़ी में अंगदान का निर्णय लेकर दूसरों की जान बचाने का फर्ज निभाना होगा।
विज्ञापन

बॉक्स
चेन्नई और दिल्ली के लिए बना ग्रीन कॉरिडोर
27 जनवरी 2022 का दिन हिमाचल निवासी एक परिवार के लिए उस वक्त दुख में बदल गया जब उनके परिवार के एक सदस्य सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए। दुर्घटना के दौरान सिर में आई गंभीर चोट के बाद परिजनों ने उन्हें स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां से 28 जनवरी को उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान एक फरवरी की शाम पीजीआई की ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि किडनी और कॉर्निया प्रत्यारोपित करने के लिए मरीज मिलने के बाद दिल और फेफड़े को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से बाहर भेजने का निर्णय लिया गया। इसके लिए पीजीआई ने पुलिस और ट्रैफिक विभाग के साथ संपर्क कर दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर बनवाएं। इसके माध्यम से दोपहर 3.25 बजे दिल्ली के लिए व 3.55 पर चेन्नई के लिए चार्टर उड़ान के माध्यम से दिल और फेफड़े को भेजा गया। दोनों ही अंग चेन्नई और दिल्ली के मरीजों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं। उन्होंने ग्रीन कॉरिडोर में सहयोग के लिए मोहाली पुलिस, सीआईएसएफ और हवाई अड्डे के कर्मचारियों को सराहनीय प्रयास के लिए धन्यवाद दिया।
कोट-
अंगदाता परिवार के निर्णय का पीजीआई प्रशासन सम्मान करता है। जिस कठिन दौर में उस परिवार ने अपने प्रिय के अंगदान करने का निर्णय लिया उसे कोई सामान्य व्यक्ति नहीं समझ सकता। उस परिवार को आदर्श रूप में लेते हुए अन्य लोगों को भी अंगदान को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए, जिससे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे लाखों मरीजों को पुन: जीवन जीने का मौका मिल सके।
विज्ञापन

-प्रो सुरजीत सिंह, प्रभारी निदेशक पीजीआई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें