एजेएल प्लॉट अलॉटमेंट प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी के मामले में मंगलवार को केस सुनवाई के लिए लगा, लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से आरोपी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पेशी पर नहीं पहुंचे। मामले के दूसरे आरोपी मोती लाल वोहरा ने भी पेशी से छूट ली हुई है। इस पर कोर्ट ने मामले की आगामी तारीख 29 अक्टूबर को निर्धारित की है।
गौरतलब है कि पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल ने 24 अगस्त, 1982 को अलॉट कराया था। कंपनी को इस पर 6 माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था। कंपनी 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई।
30 अक्टूबर, 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अलॉटमेंट रद्द करके प्लॉट को रिज्यूम कर लिया। फिर 26 जुलाई, 1995 को मुख्य प्रशासक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी।
14 मार्च, 1998 को कंपनी की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को प्लॉट की अलॉटमेंट बहाली के लिए अपील की। फिर 14 मई, 2005 को चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा, लेकिन कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया।
18 अगस्त, 1995 को नई अलॉटमेंट के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। 28 अगस्त, 2005 को एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए। साथ ही कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू करके एक साल में काम पूरा करने को कहा गया।