नायब तहसीलदार पदोन्नति की परीक्षा दो माह में करवाने का दिसंबर में दिलाया था विश्वास
जुलाई 2024 में करवाई गई परीक्षा, याचिकाकर्ता मार्च में पदोन्नति से पहले हो गया रिटायर
चंडीगढ़। कानूनगो से नायब तहसीलदार पदोन्नति के लिए विभागीय परीक्षा दो माह में करवाने का दिसंबर में विश्वास दिलाने के बाद उसे तोड़ना मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना का मामला मानते हुए मुख्य सचिव को तलब कर लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए रेशम सिंह ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह कानूनगो है और 31 मार्च 2024 को रिटायर होने जा रहा है। वह नायब तहसीलदार के तौर पर पदोन्नति के लिए योग्य है। लेकिन सरकार विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं कर रही है। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए दो माह में परीक्षा कराने का आदेश दिया था। इसके बाद याची रिटायर हो गया। लेकिन परीक्षा आयोजित नहीं की गई। इसके चलते अवमानना याचिका दाखिल की गई। अवमानना याचिका पर सरकार ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि पहले 18 और 22 मार्च को परीक्षा का निर्णय लिया था। लेकिन विभागीय कारणों से परीक्षा नहीं हो सकी। इसके बाद अप्रैल में परीक्षा तिथि तय की गई। लेकिन चुनावी ड्यूटी के चलते परीक्षा को स्थगित कर दिया। इसके बाद जुलाई के प्रथम सप्ताह में दो चरणों में परीक्षा हुई थी।
हाईकोर्ट ने कहा, इस प्रकार की दलीलें देकर सरकार हाईकोर्ट में दिलाए विश्वास को नहीं तोड़ सकती। यह प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है। याची बिना पदोन्नति पाए रिटायर हो गया, वह भी बिना किसी दोष के। वह पदोन्नति के लिए सभी योग्यताएं रखता था, सिवाय विभागीय परीक्षा पास करने के। ऐसे में अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव अवमानना के आरोप तय करने के लिए कोर्ट में हाजिर रहें। हाईकोर्ट ने छूट दी कि यदि वह चाहे तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी शामिल हो सकते हैं।