चंडीगढ़। चार हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में बुधवार को सीबीआई जज सुशील कुमार गर्ग की विशेष अदालत ने रोपड़ की जिला जेल के पूर्व चिकित्सा अधिकारी राजीव जस्सी को दोषी करार दिया। वहीं मामले के अन्य आरोपी सतनाम सिंह को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत में सतनाम के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो पाया। दोषी चिकित्सा अधिकारी राजीव को 15 मार्च को सजा सुनाई जाएगी। बता दें कि मंगलवार को दोनों पक्षों ने अपनी अंतिम दलीलें पेश की थीं।
2014 में राजीव जस्सी के खिलाफ डॉली रानी नाम की महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13 (1) (डी), 13(2) के तहत मामला दर्ज किया था। डॉली रानी ने सीबीआई को बताया था कि उनका बेटा किसी मामले में रोपड़ जेल में बंद था। बेटे के स्वास्थ्य में परेशानी के चलते उसे इलाज के लिए पीजीआई रेफर करना था। डॉली ने आरोप लगाया था कि जेल के चिकित्सा अधिकारी राजीव जस्सी उनके बेटे को पीजीआई रेफर करने के लिए चार हजार रुपये की रिश्वत मांगी। आरोप के मुताबिक, राजीव जस्सी ने यह भी कहा था कि यदि वह चार हजार रुपये नहीं दे सकती तो उसे एक्वागार्ड दे दे। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, शिकायत देने के बाद डॉली अदालत में पेश नहीं हो रही थी। उन्हें अदालत में गवाही देने के लिए कई बार समन भेजा गया लेकिन वह अदालत नहीं पहुंची। असके बाद दिसंबर 2020 में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। अदालत में पेश न होने पर सेक्टर-36 थाना पुलिस ने महिला पर आईपीसी की धारा 174 ए के तहत मामला दर्ज किया था। पिछले महीने वह महिला मोहाली में किसी काम से आई हुई थी तो उसे गिरफ्तार कर सीबीआई अदालत में पेश किया गया। सीबीआई अदालत ने उसे सेक्टर-36 थाना पुलिस को सौंप दिया। जज ने कहा था कि डॉली इस केस में गवाह है। उसका मामले में मौजूद रहना आवश्यक है। बाद में डॉली ने इस केस में गवाही दी, जिसके बाद केस चला और आरोपी राजीव को अदालत ने दोषी करार दिया।