उपद्रवियों ने विधवा महिला का ढाबा जला दिया। हिम्मत देखिए, लोगों की मदद लेने से इंकार कर दिया और कहती है कि अपना ढाबा खुद खड़ा करुंगी।
वाकई विधवा महिला की हिम्मत और मानवता की हर किसी को दाद देनी होगी। उसमें आज भी इतनी हिम्मत है कि वह किसी से मदद नहीं लेना चाहती है और खुद मेहनत करके ढ़ाबा शुरू कर रही है।
दरअसल, गांधी कैंप की गली नंबर दो में रहने वाली विधवा महिला चंचल का ढ़ाबा रेलवे फाटक के पास है। उसके पति सुनील कुमार ने उसे शुरू किया था, लेकिन डेढ़ साल पहले ही उनकी मौत हो गई और उसी समय से चंचल उस ढाबे को संभाल रही है।
शहर में उपद्रव की ऐसी आग भड़की कि ढ़ाबे को आग लगा दी गई। चंचल की दो बेटियां है और दोनों पढ़ रही है। परिवार चलाने का एकमात्र जरिया ढ़ाबा भी जल जाने के बावजूद चंचल ने हिम्मत नहीं हारी है।