बुढ़ाखेड़ा गांव की सरपंच कविता लाठन ने कहा कि जिस तरह कविता ने संजय को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की, यह उसके साहस को दिखाता है। अन्य लड़कियों को भी इस बहादुरी से प्रेरणा लेनी चाहिए। कविता को शहीद संजीव लाठर की पुण्यतिथि पर 30 नवंबर को सम्मानित किया जाएगा। जल्द ही गांव में अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़ा जाएगा।
कविता बोली-सिर्फ बच्चे की जान की थी परवाह
वहीं बच्चे को बाचने वाली कविता का कहना है कि दोपहर 12 बजे उसे बच्चे के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। उसने देखा कि छह कुत्ते एक बच्चे को नीचे गिराकर नोच रहे हैं। ऐसे में वह कुत्तों की ओर दौड़ पड़ी। कुत्तों को भगा दिया। कविता के अनुसार उस समय उसे कोई खतरा या डर नहीं महसूस हुआ। उसे सिर्फ बच्चे की जान की परवाह थी। कविता ने 12वीं पास कर चार साल पहले स्कूल छोड़ दिया था। बच्चे की जान बचाने पर कविता खुद पर गर्व महसूस कर रही है।