कजौली वाटर वर्क्स के दो नए फेज के अलावा शहर के कई प्रोजेक्टों पर संकट के बादल छा गए हैं। प्लान बजट में निगम को मात्र 84 करोड़ रुपये मिलने से कई प्रोजेक्टों की रफ्तार थम जाएगी।
नगर निगम ने प्रशासन से प्लान बजट में 572 करोड़ 40 लाख रुपये की मांग की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से इस राशि का करीब सातवां हिस्सा ही दिया गया है, जबकि पिछले साल 102 करोड़ प्लान बजट में मिले थे।
कजौली वाटर वर्क्स के दो नए फेजों को अब एफडी का सहारा
कजौली वाटर वर्क्स के चौथे और पांचवें फेज से मिलने वाले 40 एमजीडी पानी के प्रोजेक्ट पर भी संकट के बादल छा गए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए ही 250 करोड़ का बजट पास करके प्रशासन से मांग की गई थी। मगर अब जो ग्रांट मिली है उसमें से निगम शहर में किसी बड़े प्रोजेक्ट का भी निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकता।
ऐसे में अब निगम अपनी एफडी तुड़वाकर प्रोजेक्ट को पूरा कर सकता है, लेकिन ऐसा करने पर भी नगर निगम वित्तीय संकट में आ जाएगा। निगम ने पिछले साल ही एफडी तुड़वाकर पंजाब को इस प्रोजेक्ट के लिए 98 करोड़ दिए हैं। इस समय एफडी में 300 करोड़ बचे हैं। मेयर अरुण सूद का कहना है कि कजौली वाटर वर्क्स के दोनों नए फेज से पानी हर हालत में आएगा। इस प्रोजेक्ट के अलावा शहर के अन्य काम के लिए कभी भी पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी। उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो अलग से भी केंद्र सरकार से बजट लाने का प्रयास किया जाएगा।
ये प्रोजेक्ट हो सकते हैं प्रभावित
-50 सेक्टरों की प्रमुख सड़कों की कारपेटिंग। (एक किलोमीटर सड़क की कारपेटिंग पर ही करीब एक करोड़ रुपये खर्च आता है)
- सेक्टर-37, 38 वेस्ट, 43, गांव कजेहड़ी और 50 नए सामुदायिक केंद्रों का निर्माण। नगर निगम को नए सामुदायिक केंद्र और पुराने की रेनोवेशन के लिए 25 करोड़ की जरूरत है।
-नगर निगम ने 15 करोड़ से साइकिल ट्रैक पर एलईडी लाइट्स, डिस्पेंसरी, अस्पताल और स्कूलों में बिजली के काम का प्रस्ताव पास किया था।
- शहर के अंडरग्राउंड सीवरेज सिस्टम को मजबूत करने की बात बजट में शामिल थी, लेकिन अब बजट में कटौती से यह काम प्रभावित होगा।
प्लांट भी हो रहा है बंद
डड्डूमाजरा में बना जेपी का गारबेज प्लांट भी 31 मार्च को बंद हो जाएगा। ऐसे में नगर निगम के पास इतना बजट नहीं है कि वह खुद ही प्लांट चला सके। प्लांट में इस समय 120 कर्मचारी काम कर रहे हैं जोकि प्लांट बंद होने पर बेरोजगार हो जाएंगे।