मोहाली फोर्टिस हॉस्पिटल के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. प्रियदर्शिनी रंजन की लिखी किताब ‘इंकंपैटिबल ब्लड टाइप किडनी ट्रांसप्लांट’ का चंडीगढ़ के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (होम) अनिल कुमार ने रिलीज की। इस बुक में अलग ब्लड ग्रुप होने पर किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार व सरल भाषा में जानकारी दी गई है।
इस मौके पर फोर्टिस हेल्थकेयर के रीजनल डायरेक्टर (नॉर्थ) कर्नल हरिंदर सिंह चहल भी मौजूद रहे। डॉक्टरों ने दावा किया कि यह पहली किताब है, जो स्पष्ट करती है कि डोनर और मरीज के ब्लड ग्रुप अलग-अलग होने पर भी किडनी ट्रांसप्लांट करना मुमकिन है।
यूटी प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में मेडिकल क्षेत्र में बड़े तौर पर प्रगति हुई है। किडनी ट्रांसप्लांट से लेकर निपुण डॉक्टर्स विभिन्न ब्लड ग्रुप के लोगों का ट्रांसप्लांट करने में भी सक्षम हुए हैं, जिससे हजारों मरीजों को नई उम्मीद मिली है।
डॉ. रंजन यूएसए के जॉन्स हॉप्किंस के इंकंपैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर से ट्रेनिंग हासिल की है। ओम प्रकाश, संतोष कुमारी और सरोज को किडनी ट्रंासप्लांट के बाद नई जिंदगी मिली, जो इससे पहले कई सालों से उनके लिए नामुमकिन सा था। ब्लडग्रुप मैच नहीं होने से इनका ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था।
डॉ. रंजन ने जानकारी दी कि ट्रांसप्लांट के लिए हमेशा से एक जैसे ब्लड ग्रुप होने जरूरी होते थे। कुल चार तरह के ब्लड ग्रुप होते हैं - ए, बी, एबी और ओ। टाइप ए, ए और ओ के साथ मैच कर सकता था। टाइप बी, बी और ओ के साथ। टाइप एबी का मेल ऐबी, ए, बी या ओ के साथ हो सकता था पर टाइप ओ के लिए टाइप ओ ही अनिवार्य था।
यदि आप किसी दूसरे ब्लड ग्रुप का ट्रांसप्लांट लेते थे तो आपका शरीर पूरी तरह खत्म भी हो सकता था। फोर्टिस हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम पर बात करते हुए कर्नल चहल ने कहा, ‘अस्पताल में किडनी के मरीजों के लिए अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं मौजूद हैं, जिसमें पूरे साज-सामान के साथ ऑपरेशन थिएटर और डोनर के लिए लैप्रोस्कोपिक नेफ्रेक्टॉमी की सुविधा के साथ रीनल आईसीयू भी शामिल है।