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Chandigarh News: आप के साथ दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डाल सकता है बॉडी पियर्सिंग का क्रेज

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चंडीगढ़। युवाओं पर बॉडी पियर्सिंग का फैशन मेनिया इस कदर हावी होता जा रहा है कि वे इसके चक्कर में खुद की सेहत की भी परवाह नहीं कर रहे। इस फैशन क्रेज को पूरा करने के लिए वह न चाहते हुए खुद को संक्रमण की जद में धकेल रहे हैं। आमतौर पर नाम और कान में पियर्सिंग का चलन तो परंपरागत तौर से चला आ रहा है। लेकिन अब युवा होंठ, जीभ, आइब्रो, नाभी, ठुड्ढी, गाल पर भी पियर्सिंग करवा रहे हैं। पियर्सिंग के दौरान की गई एक छोटी सी लापरवाही उनके लिए तो खतरनाक साबित हो ही रही है, साथ ही वे अनजाने में दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डालने का काम कर रहे हैं।
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त्वचा रोग विशेषज्ञों के यहां पियर्सिंग के बाद संक्रमण का शिकार होकर पहुंचने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि फैशन के चक्कर में फंसकर वे अपनी त्वचा को संक्रमित कर रहे हैं। पीजीआई त्वचा रोग विभाग के डॉ. विग्नेश नारायण ने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में पियर्सिंग वाले मामले बढ़ रहे हैं। पियर्सिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले मेटल के कारण उन्हें एलर्जी हो रही है। इससे आस-पास के त्वचा की टिशू भी प्रभावित हो रही हैं। इसका समय रहते इलाज न होने पर दाग गहरा हो जाता है। जख्म संक्रमित होने से परेशानी बढ़ सकती है।

वहीं इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजी के सदस्य डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि अगर पियर्सिंग सही तरीके से नहीं की गई तो खुजली, जलन, घाव से पानी और पस निकलने जैसी परेशानी हो सकती है। वहीं जिन मरीजों को पहले से त्वचा संबंधी कोई परेशानी हो तो उनकी समस्या तेजी से बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि प्रशिक्षित व्यक्ति से स्टरलाइज उपकरण से ही पियर्सिंग कराए। नींद की गोली खाने की बजाय लोकल एनीस्थिसिया का प्रयोग करने को कहें। अगर एलर्जी की आशंका हो तो एलर्जी का टेस्ट करवा लें।
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पियर्सिंग करवाई है तोइन बातों का रखें ध्यान

पियर्सिंग करवाया है, तो नहाते समय भी सावधानियां बरतें, वहां पानी का संपर्क न हो। कपड़े पहनते समय भी ये ध्यान रखें कि जख्म पर जरा भी झटका न लगे।

नाक-कान के पियर्सिंग करवाने के बाद पानी में डिटॉल डाल कर कॉटन का कपड़ा गीला कर वहां की सफाई करें।



पियर्सिंग वाली जगह पर अल्कोहल बेस्ट प्रोडक्ट लगाने से बचें, क्योंकि यह आपके त्वचा को शुष्क बना देती है।



पियर्सिंग कराने के बाद जब तक तक स्किन पूरी तरह ठीक न हो जाये, तैराकी से परहेज करें।



होंठ, गाल या जीभ पर पर पियर्सिंग करवाई है तो खाने के बाद और रात में सोने से पहले एंटीसेप्टिक माउथवॉश से कुल्ला करें।



एंटीबायोटिक क्रीम या ओइनमेंट का उपयोग न करें। इससे पियर्सिंग में धूल और गंदगी चिपक जाती है और उसमें ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।



नई पियर्सिंग के बल पर न सोएं। क्योंकि आपकी ज्वेलरी सोते समय कंबल, चादर या तकिये से उलझकर उस जगह के दर्द को बढ़ा सकती है और वहां धूल भी जम सकती है।



जब तक पियर्सिंग का घाव भर कर ठीक न हो जाए ज्वेलरी को उतारें नहीं। ऐसा करने से पियर्सिंग बंद हो जाएगी, और यदि वहां संक्रमण हो तो यह त्वचा में भी रह जाएगा।
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इतने दिन में भरता है पियर्सिंग का घाव
इयर कार्टिलेज, नथुने, गाल, निप्पल, नाभि- 6-12 महीने

इयरलोब, आइब्रो, सेप्टम, होंठ, लेब्रेट, ब्यूटीमार्क- 6-8 सप्ताह

जीभ- 4 सप्ताह




अगर आपने कुछ दिन पहले ही बॉडी पियर्सिंग कराई है तो रक्तदान करने से पहले इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा रहता है।

प्रो. रतिराम शर्मा, पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन
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