चीन को गलवां घाटी के कब्जे वाले क्षेत्र से वापस भेजने के लिए जोरदार कदम उठाने की वकालत करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारत सरकार से अपील की कि वह चीन को कब्जे वाली जमीन तुरंत खाली करवाने के लिए अल्टीमेटम जारी करे। इसमें स्पष्ट चेतावनी दी जाए कि ऐसा न करने की सूरत में उनके लिए गंभीर नतीजे निकलेंगे।
चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि हालांकि ऐसी कार्रवाई से भारत को कुछ नतीजे भुगतने पड़ेंगे लेकिन क्षेत्रीय अखंडता पर ऐसी घुसपैठ और हमले जारी रखने को और सहन नहीं किया जा सकता। कैप्टन ने कहा कि पिछले तजुर्बे से पता लगता है कि जब भी आक्रमकता का सामना हुआ, चीन हमेशा पीछे हट गए।
गोली न चलाने का समझौता किसने किया
कथित समझौते, जिसने भारतीय फौज को गोली चलाने से रोका (चाहे उनके पास हथियार थे) पर सवाल उठाते हुए कैप्टन ने यह जानने की मांग की कि ऐसा समझौता कौन लेकर आया? उन्होंने कहा कि एक पड़ोसी दुश्मन के साथ ऐसा समझौता कैसे हो सकता है। किसी भी स्थिति में यह स्पष्ट है कि भारतीय सैनिकों पर हमला चीन की तरफ से पहले ही किया गया था, जो बेढंगे लेकिन खतरनाक हथियारों से तैयार होकर आए थे।
गलवां घाटी में भारतीय जवानों के कमांडिंग अफसर के घेरे में आ जाने पर हथियार होने के बावजूद जवान गोली चलाने में असफल क्यों रहे, यह जानने की मांग करते हुए कैप्टन ने कहा कि चीनियों के हाथों कर्नल की शहादत समूची भारतीय फौज के लिए अपमानजनक है। वह यह विश्वास नहीं कर सकते कि ऐसा दर्दनाक दृश्य देखने के बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जवान गोली चलाने में असफल रहे। यह घटित होते समय जवान तैनात क्यों नहीं थे? और यदि थे तो अफसरों और जवानों के हमले की मार के नीचे आने पर उनको बचाने के लिए हथियारों का प्रयोग क्यों नहीं किया गया।’
कैप्टन का सुखबीर को जवाब- पूर्व फौजी होने के नाते राय रखने का हक है
शिअद प्रधान सुखबीर बादल की तरफ से ट्वीट द्वारा गलवां घाटी के मुद्दे पर उन पर राजनीति खेलने के लगाए आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए कैप्टन ने कहा कि एक पूर्व फौजी होने के नाते उनको मसले संबंधी अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। 20 जवानों के शहीद हो जाने पर कोई फौजी यहां तक कि कोई भारतीय भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।