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Chandigarh News: शिक्षकों की कमी के कारण गिरा बोर्ड रिजल्ट, इस बार सुधारना बड़ी चुनौती

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चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों के लिए इस बार दसवीं और बारहवीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम सुधारना चुनौती बना हुआ है। पिछले साल शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों के बोर्ड परीक्षा परिणाम में गिरावट आई थी। इसे लेकर शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की भर्ती शुरू करवाई थी लेकिन अभी तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसका असर इस बार के परिणामों पर पड़ सकता है।
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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों का सीबीएसई 10वीं के परीक्षा परिणाम में पिछले साल के मुकाबले इस बार 22.5 प्रतिशत की कमी आई थी। पिछले सत्र 2020-21 में पासिंग प्रतिशत 96.6 था, वहीं इस बार सत्र 2021-22 में पासिंग प्रतिशत 74.1 रहा है। इस बार शहर के कुल 96 सरकारी स्कूलों में 9809 छात्र ही पास हुए थे और 453 विद्यार्थी फेल हुए, 2970 छात्रों की कंपार्टमेंट आई थी। वहीं, सीबीएसई 12वीं बोर्ड में पिछले साल के मुकाबले ओवरऑल पासिंग प्रतिशत में 7.54 प्रतिशत गिरावट आई थी। सिर्फ गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल मनीमाजरा का ही पासिंग प्रतिशत 100 रहा था। अन्य सभी स्कूलों में बच्चों के नंबरों में गिरावट आई है। 12वीं में 721 छात्रों की कंपार्टमेंट आई है।
सरकारी शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कामों में लगा दी जाती है ड्यूटी
पहले ही शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गैर-शैक्षणिक कामों में शिक्षकों की बीएलओ स्तर पर ड्यूटी लगवा दी जाती है। विभागों की योजनाओं के सर्वे, चाइल्ड मैंपिंग, सरकारी एक मासिक और हफ्तों तक चलने वाले अभियानों का टारगेट भी स्कूल शिक्षकों पर थोपा जाता है। ऐसे में शिक्षक अपनी कक्षाओं और बच्चों को पढ़ाने पर फोकस ही नहीं कर पाते हैं।
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छात्रों को दी जा रही ऑनलाइन अध्ययन सामग्री
स्कूल शिक्षा निदेशक हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़ ने बताया कि इस साल परिणाम निराशाजनक रहा था। शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करवाई जा चुकी है। वहीं, स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं लगाने के साथ शिक्षक ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और रिकॉर्डिंग भी छात्रों को उपलब्ध करवा रहे हैं जिससे अगर विद्यार्थी किसी कारणवश कक्षा में उपस्थित नहीं हो पाया है तो वह घर बैठकर पढ़ सकता है। वह घर में बैठकर अध्ययन सामग्री से कक्षा के पाठ्यक्रम का रिवीजन भी कर सकता है। स्कूलों को इस बार विद्यार्थियों को अधिक से अधिक मॉक टेस्ट हल करवाने के निर्देश भी दिए जाएंगे जिससे छात्र परीक्षा के लिए तैयार हो सकें और उनकी कमियों का पता लगाकर शिक्षक उन पर काम कर सकें।
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