ब्लू व्हेल ने दुनिया भर में आतंक मचाया हुआ है। आए दिन कोई न कोई इसके चलते जान दे रहा है, ऐसे में मां बाप क्या करें कि बच्चे इस खतरनाक गेम के चक्कर में न पड़ें।
क्या करें मां बाप
इस गेम में ज्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे फंस रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं। चेक करें कि बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है। इलेक्ट्रानिक गैजेट के इस्तेमाल को चेक करें। बच्चा अकेला, गुमसुम रहता है या अचानक खुद को कमरे में बंद कर लेता है तो उसके साथ बैठकर बात करें। देखें कि कहीं बच्चा मोबाइल छत या बंद कमरे में जाकर तो यूज नहीं कर रहा। अचानक व्यवहार बदलता है तो काउंसलर या मनोचिकित्सक की मदद लें। माता पिता समय निकालें तो बच्चों को इससे बचाया जा सकता है।
ये हैं लक्षण
बहुत गुस्सा करना, चिड़चिड़ा रहना, ज्यादा मूड स्विंग्स होना, कमरे में बंद रहना, खाना छोड़ देना, देर रात तक जागना, गुमसुम रहना, बहुत जिद करना, हिंसक हो जाना, पढ़ाई से मन चुराना
ये सावधानियां बरतें
बच्चों के दोस्त बनें, उनकी जिंदगी का हिस्सा बनें। छोटी-छोटी बात पर न टोकें। मन की बात जानें। बातचीत के अंदाज में बच्चों से पूछताछ करते रहें। उनके फैसलों का सम्मान करें। उनके डर को सुनें, उससे निकलने में उनकी मदद करें। देखें, बच्चा इंटरनेट पर कौन गेम कितने समय देख रहा है। बच्चे के लिए गैजट इस्तेमाल करने का टाइम तय करें।
क्या है ब्लू व्हेल गेम
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यह ऑनलाइन खेला जाने वाला टास्क गेम है। यह खेल चैलेंजर्स (खिलाडी या प्रतिभागी) और इंटरनेट पर गेम के माध्यम से निर्देश देने वालों के बीच जुड़ा होता है। 50 दिन के इस गेम में रोजाना लेवल-दर-लेवल एक टास्क खिलाड़ी को पूरा करना होता है।
इस लेवल सूची में सुबह 3.20 बजे जागना, क्रेन पर चढ़कर छलांग लगाना, अजीबोगरीब कार्टून या चित्र खिलाड़ी को हाथ या बांह पर गुदवाना, हाथ की नस काटना, गुप्त कार्य करना, एक सुई को अपने हाथ या पैर पर चुभोना, एक पुल या छत पर खड़ा होना, गाने सुनना व देखना शामिल होता है। धीरे-धीरे गेम बच्चे की मानसिकता पर हावी होने लगता है और आखिरकार जानलेवा साबित होता है।
ऐसे भी मिलता है चैलेंज
इंटरनेट पर खेले जाने वाले इस गेम में 50 दिन तक रोज एक चैलेंज बताया जाता है। हर चैलेंज को पूरा करने पर हाथ पर एक कट करने के लिए कहा जाता है। चैलेंज पूरे होते-होते आखिर तक हाथ पर व्हेल की आकृति उभरती है। चैलेंज के तहत हाथ पर ब्लेड से एफ-57 उकेरकर फोटो भेजने को कहा जाता है।
हॉरर वीडियो या फिल्म देखने का भी चैलेंज है। हाथ की 3 नसों को काटकर उसकी फोटो क्यूरेटर को भेजना भी एक चैलेंज है। ऊंची से ऊंची छत पर जाने को इस गेम में कहा जाता है। व्हेल बनने के लिए तैयार होने पर अपने पैर में ‘यस’ उकेरना होता है। तैयार होने पर खुद को चाकू से कई बार काटकर सजा देना भी चैलेंज का हिस्सा है।
ब्लू व्हेल अब भारत पहुंचा
ब्लू व्हेल
- फोटो : social media
भारत में यह गेम हाल ही चर्चा में आया है। लेकिन रूस से लेकर अर्जेंटीना, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, चीन, जॉर्जिया, इटली, केन्या, पराग्वे, पुर्तगाल, सऊदी अरब, स्पेन, अमेरिका, उरुग्वे जैसे देशों में कम उम्र के कई बच्चों ने इस चैलेंज की वजह से अपनी जान गंवाई है। अभी तक भारत के तमिलनाडू, पांडूचेरी, पंजाब, हरियाणा, लखनऊ व अन्य कई स्थानों पर इसके गिरफ्त में फंसकर कई युवा अपनी जान खो चुके हैं हालांकि कुछ खुशनसीब रहे, जो बचा लिए गए।
ऐसे स्मार्ट फोन में पहुंच रहा व्लू व्हेल गेम
- गेम आसानी से उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह गुप्त रूप से सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से फैल रहा है।
- कभी-कभी स्मार्ट फोन पर अज्ञात तरीके से एक लिंक प्राप्त होता है, जिसको खोलने पर गेम स्टार्ट हो जाता है।
- सोशल मीडिया पर इस गेम को ग्रुप द्वारा फैलाया जा रहा है।
- इस गेम को प्रतिभागी अकेला भी खेल सकता है और अपने दोस्तों को भी जोड़ सकता है।
- शेयर इट से एक-दूसरे से गेम आदान-प्रदान करने का सिस्टम भी शामिल है।
बच्चे के फोन में गेम तो नहीं, ऐसे लगाएं पता
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- फोटो : blue whale
साइबर एक्सपर्ट प्रवीन मोर ने बताया कि इस गेम को स्मार्ट फोन में छुपाने का भी ऑप्शन होता है। ऐसे में हो सकता है कि आपके बच्चे के फोन में ये गेम हो, लेकिन आप इसे नहीं ढूंढ पाएं। ऐसे में गेम का पता लगाने के लिए बच्चे के फोन में इन सेटिंग्स को चेक करें। फोन की सेटिंग से डिवाइस से एप में जाकर चेक करें। यदि फोन में लॉक या हाइड एप हैं तो सेटिंग से डिवाइस से एप्स में जाकर उस एप को ओपन करे। फिर उसको फोर्स स्टॉप कर दें, जिससे एप लॉक डिलीट हो जाएगा।
पैरेंट्स सबसे पहला बचाव
मनोचिकित्सक जेपी अग्रवाल के अनुसार ब्लू व्हेल गेम से बचने का सिर्फ एक रास्ता है और वह मां-बाप की सतर्कता ही हो सकता है। दरअसल, इस गेम को खेलने में लंबा समय लगता है और इसके समय व टास्क को ज्यादातर बच्चे पूरा घर पर ही करते है। अगर बच्चों को किसी तरीके की परेशानी होती है तो वे हिचकिचाएं नहीं, अपनी दिक्कतें माता-पिता के साथ साझा करें ताकि उनकी परेशानी का समाधान निकल सके। सबसे जरूरी माता-पिता भी अपने बच्चे का ध्यान रखें और उनकी सोशल मीडिया की सभी गतिविधियों को देखते रहें ताकि वे अपने बच्चे के बारे में सारी चीजों से अवगत रहें।
पैरेंट्स के साथ स्कूलों को भी कर रहे अवेयर
पैरेंट्स एसोसिएशन चंडीगढ़ के प्रेसिडेंट नितिन गोयल ने बताया कि ब्लू व्हेल गेम से बचाव के प्रति पैरेंट्स व स्कूलों में जाने के साथ सोशल मीडिया पर अवेयर किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि क्या करें और क्या ना करें, इसका एडवाइजरी भी जारी कर बांटा जा रहा है। किसी बच्चे के मनोवृत्ति, दिनचर्या में अचानक परिवर्तन व सोशल नेटवर्किंग पर लगाव बढ़ना खतरे की घंटी हो सकती है।
स्मार्ट फोन यूजर्स यूथ में डर
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- फोटो : blue whale
ब्लू व्हेल गेम को लेकर स्मार्ट फोन इस्तेमाल करने वाले यूथ से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ब्लू व्हेल गेम के बारे में सुनने व थोड़ी बहुत जानकारी रखने की बात कबूली लेकिन मौत का रिव्यूज आने के कारण कभी नहीं खेलने का प्रण भी लिया। एक भी यूथ में किसी को गेम डाउनलोड, खेलना व पूरी प्रक्रिया के बारे में मीडिया व वायरल विडियो के अतिरिक्त जानकारी नहीं थी। उन्होंने अपनी फैमिली, दोस्तों में भी अवेयर किया।
पुलिस खूनी गेम को लेकर संजीदा, स्कूलों को एडवाइजरी जारी
‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ नामक गेम से अब तक करीब 150 लोग मौत को गले लगा चुके हैं। ऐसे में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की जनहित याचिका दायर की गई है, वहीं बढ़ती घटनाओं के बाद सरकार ने सभी स्कूलों को एडवाइजरी जारी कर दी है। साथ ही इसका लिंक ब्लाक करने के निर्देश दिए हैं।
साइबर क्राइम, चंडीगढ़ की डीएसपी रश्मि यादव का कहना है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और याहू पर सरकार ने इस जानलेवा गेम के लिंक ब्लाक करवा दिए हैं। लेकिन अभिभावकों और टीचर्स की भी यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चे का ध्यान रखें। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह को सोशल मीडिया से इस घातक गेम को हटाने के लिए पत्र लिखा है।
स्कूलों को जारी की गई है एडवाइजरी
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला और बालकृष्ण गोयल ने बताया कि सरकार ब्लू व्हेल से होने वाली घटनाओं से बहुत चिंतिंत है। इस बाबत नेशनल कमीशन ने भी एडवाइजरी जारी की है। साथ ही स्टेट कमीशन, सीबीएसई और महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने भी स्कूलों को एडवाइजरी जारी कर दी है।
अपनी और परिवार की जानकारी न करें शेयर
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फेसबुक, इंस्टाग्राम और याहू पर सरकार ने इस जानलेवा गेम के लिंक ब्लाक करवा दिए हैं। लेकिन अभिभावकों और टीचर्स को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इस चक्रव्यूह में फंस चुके बच्चों की काउंसलिंग करवाएं। उन्हें प्यार की जरूरत है, उन्हें डांटे नहीं। बच्चों को भी चाहिए कि वे अपनी व अपने परिवार की जानकारी यदि कोई मांगे तो न दें। क्योंकि इस गेम में फंसने का एक बड़ा कारण यह भी है कि खेलने से मना करने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दी जाती है।
- रश्मि यादव डीएसपी, साइबर क्राइम, चंडीगढ़
आउटडोर गेम्स की तरफ दें ध्यान
ब्लू व्हेल गेम के भंवर में फंसकर दो बार जान देने की कोशिश करने वाले पठानकोट के छात्र की काउंसलिंग करने वाली मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सोनिया मिश्र ने बताया कि आजकल आउटडोर गेम्स न खेलने की वजह से बच्चों की सहनशक्ति, नजर, शारीरिक फिटनेस पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे को चाहिए कि वह नेट केवल जरूरत के समय ही इस्तेमाल करे। आनलाइन गेम्स की बजाए वह बाहर खेले जाने वाले गेम्स को ज्यादा वरीयता दें। बच्चा जब भी ऐसी गेम खेलता है, वह अभिभावकों से छिपकर खेलता है। बच्चे का स्वभाव उग्र होने लगता है तो वह खाना-पीना छोड़ देता है।
पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगता। बच्चा डिप्रेशन में जाने लगता है और माता-पिता व दोस्तों से दूरी बना लेता है। जब भी बच्चों में ऐसा कोई लक्षण दिखे तो मातापिता को सतर्क हो जाना चाहिए। बच्चे को कभी अकेला न छोड़ें। उस पर नजर रखें, लेकिन उसे एहसास न होने दें कि आप उस पर नजर रख रहे हैं। ऐसे बच्चे को प्यार की जरूरत होती है। उसे लगना चाहिए कि उसके मातापिता, दोस्त और समाज उसके साथ हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के दोस्त बनकर पेश आएं, ताकि बच्चा उनसे कुछ न छिपा पाए।