वित्त मंत्री अरुण जेटली में नए नोटों पर ब्रेल लिपि बनाने केदावे किए थे, लेकिन यह पूरे नहीं हो पाए हैं। इस कारण नोट पहचानने में हमें दिक्कत हो रही है। दो हजार रुपये का नोट 20 रुपये का लगता है।
वहीं 500 का नोट 10 रुपये का नोट लगता है। हम कैशलेस के पक्ष में हैं, लेकिन हमें बैंकों में अलग लाइन और स्वैपिंग मशीन टाकिंग सॉफ्टवेयर की सुविधा होनी चाहिए। यह सुविधा हमें नहीं मिलती है। इसी कारण हमें परेशानी होती है।
नोटबंदी के 35वें दिन अमर उजाला से बातचीत के दौरान सेक्टर - 26 स्थित इंस्टीट्यूट फार द ब्लाइंट के प्रिंसिपल जेएस जायरा ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि मुझे दिखाई नहीं देता है।
हम पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट के साइज को देखकर पहचान लेते थे। लेकिन मौजूदा दो हजार रुपये का नोट बीस रुपये का लगता है। इसकेसाइज को कम किया है। अगर ब्रेल लिपि नोटों पर दर्ज होती तो हम हर नोट की पहचान आसानी से कर सकते थे। हम सरकार से गुजारिश कर रहे हैं कि नोटों पर ब्रेल लिपि दी जाना चाहिए।