मरीज की हालत ठीक नहीं हैं, उसकी आंखें नहीं खुल रही हैं। पहले कोरोना हुआ था। ठीक होने पर समस्या हुई तो निजी अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि ब्लैक फंगस है। वहां इएनटी के डॉक्टर से 50 हजार में ऑपरेशन करने की बात हुई लेकिन उनके व्यवहार के चलते ऑपरेशन नहीं कराया। पीजीआईएमएस के डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और नाक से फंगस निकाला। अब समस्या है कि मरीज को पैरालाइज की शिकायत हो गई है। मरीज को दिन में पांच इंजेक्शन लगते हैं, इनकी कीमत सवा दो हजार है। लेकिन बाजार में मिलता छह हजार रुपये में है। 50 हजार रुपये के इंजेक्शन लगवा चुका हूं। - सतीश पहलवान, जसिया।
ब्लैक फंगस पहले ईएनटी विभाग के पास आता है। यह बीमारी शुगर, कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को होने की संभावना रहती है। यह सामान्य बीमारी नहीं है, इस समय कोरोना के चलते इस पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। जब ब्लैक फंगस नाक व आंख को क्षतिग्रस्त करता हुआ दिमाग तक पहुंचता है तब मरीज के जीवन को खतरा हो जाता है। नेत्र विभाग में पिछले दो दिनों तक ऐसा कोई केस नहीं आया है। - डॉ. जितेंद्र फौगाट, एसोसिएट प्रोफेसर, नेत्र विभाग, पीजीआईएमएस।
इंजेक्शन की कमी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केमिस्ट इसे ब्लैक करें। यदि किसी को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचा है तो उसकी शिकायत हमें दें। हम नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करेंगे। - मंदीप मान, ड्रग कंट्रोलर।