महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा के सहयोगी दलों शिव सेना और हजकां से किनारा करने पर पंजाब में सहयोगी शिअद से गठबंधन पर भी आशंकाओं के बादल मंडराने लगे हैं।
हालांकि, शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल और पंजाब भाजपा प्रमुख कमल शर्मा लगातार यह कहते आए हैं कि प्रदेश में दोनों पार्टियों के बीच अटूट रिश्ता है, लेकिन मौजूदा हालात कुछ और ही इशारा कर रहे हैं।
उत्तरप्रदेश में विधानसभा की 25 सीटें लड़ने और देशभर में उपस्थिति दर्ज करवाने के सुखबीर बादल के बयान को बदलते हालात के नतीजे के रूप में देखा जा रहा है।
देशभर में उपस्थिति चाहता है शिअद
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए बीते शुक्रवार को प्रत्याशी घोषित करते समय सुखबीर ने घोषणा की थी कि उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव में शिअद के 25 उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा था कि शिअद देशभर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा। सियासी माहिर इसे शिअद की एक सोची-समझी रणनीति करार दे रहे हैं।
चूंकि, भाजपा ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद महाराष्ट्र में शिव सेना और हरियाणा में हजकां से किनारा कर लिया है, इसलिए इस बात की आशंकाएं पैदा होने लगी हैं कि कहीं पंजाब में शिअद के साथ भी ऐसा ही न हो।
यह आशंकाएं इस नजरिए से भी काफी प्रबल होती दिखाई पड़ रही हैं कि पिछले कुछ समय में पंजाब भाजपा नेताओं ने शिअद के प्रति तल्ख रवैया अख्तियार किया हुआ है।
सुखबीर ने बयान से दिया भाजपा को संकेत
सुखबीर के बयान का मतलब यह निकाला जा रहा है कि उन्होंने भाजपा को स्पष्ट संकेत दिया है कि देशभर में बसे सिखों के दम पर शिअद हर प्रदेश में दस्तक देगा। उसे अन्य दलों की तरह न लिया जाए।
इस वक्त दिल्ली में तीन विधायकों और हरियाणा से एक लोकसभा सदस्य के साथ शिअद पंजाब सहित इन दोनों प्रदेशों में पहले ही उपस्थिति दर्ज करवा चुका है। हरियाणा के पिछले विधानसभा चुनाव में भी शिअद का एक उम्मीदवार जीता था।
इस बार फिर इनेलो के साथ गठबंधन में वहां के दो विधानसभा क्षेत्रों से शिअद उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। राजस्थान और हिमाचल में भी शिअद चुनाव लड़ चुका है। अब उत्तरप्रदेश व अन्य प्रदेशों की बात करके सुखबीर ने एक नई चर्चा छेड़ दी है।