पंजाब में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पंजाब विधानसभा चुनाव में हार का ठीकरा शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पर फोड़ा। हालांकि सीधे तौर पर शिअद का नाम नहीं लेते हुए वे इशारों-इशारों में अपनी बात कह गए। शाह ने कहा कि शिअद के साथ गठबंधन में भाजपा छोटा पार्टनर रही है, फिर भी हम हार के कारणों की समीक्षा करेगी। उन्होंने शिअद के साथ पुराने गठबंधन पर यह कहते हुए इशारों-इशारों में सवालिया निशान लगा दिया कि ‘गठबंधन अभी बरकरार है।’ शाह पार्टी के विस्तार कार्यक्रम के तहत शनिवार को शहर में थे।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अमित शाह से पंजाब के विधानसभा चुनाव में हार के कारणों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब दे रहे थे। यह पूछे जाने पर कि क्या आगामी लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा अकेले चुनाव लड़ेगी? शाह ने कहा कि रणनीति बनाई जा रही है और पार्टी सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम फैसला लेगी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2014 के आम चुनाव में जिस बहुमत के साथ जीती थी, 2019 में उससे कहीं ज्यादा अंतर से जीतेगी। गोवा और मणिपुर में भाजपा द्वारा जोड़तोड़ करके सरकार बनाने के सवाल पर शाह ने कहा कि दोनों राज्यों में जनता का प्यार पार्टी को मिला है और भाजपा का वोट बैंक बढ़ा है। यही कारण है कि इन दोनों राज्यों में स्पष्ट बहुमत न मिलने के बावजूद भाजपा की सरकार बनी है।
किसानों को लेकर काम कर रही केंद्र सरकार
रोड शो में अमित शाह
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पंजाब में पिछली सरकार और मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की आत्महत्या के मामलों पर शाह ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों की मदद से किसानों को बचाने का काम कर रही है। लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा। ईवीएम में धांधली संबंधी आप के आरोप को लेकर किए गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ‘आप’ को यह बताना चाहिए कि जब उन्होंने दिल्ली में 70 में 67 सीटें हासिल की थीं, तब क्या ईवीएम में गड़बड़ी की गई थी।
जल्द सुलझ जाएगा एसवाईएल का मुद्दा
पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच यह मामला जल्द सुलझा लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हाल ही में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की दिल्ली में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक भी हुई है और इस मामले पर ऐसा हल खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे दोनों राज्यों के हित प्रभावित न हों। चंडीगढ़ को पंजाब को दिए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर अमित शाह ने स्पष्ट जवाब नहीं देते हुए कहा, ‘चंडीगढ़ की जो स्थिति है। चंडीगढ़ की वही स्थिति है।’