नगर निगम के सदन की बैठक में सांसद पवन बंसल भाजपा पार्षदों के निशाने पर रहे। भाजपाइयो ने पवन बंसल के विरोध में नारे लगाए और रेलगेट प्रकरण में उनका इस्तीफा मांगा।
काली पटटी बांधकर आए भाजपा पार्षदों ने पूछा, ‘बंसल बताएं कि जब वे रेलमंत्री थे तो उनके भांजे ने रेलवे अधिकारी के प्रमोशन के लिए किस हैसियत से 90 लाख रुपये लिए थे।’ वहीं, कांग्रेसी पार्षदों ने बंसल के पक्ष और भाजपा के विरोध में नारे लगाए। भाजपा पार्षदों ने बंसल को बोलने नहीं दिया।
भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह को मेयर सुभाष चावला बोलने की इजाजत नहीं दे रहे थे। बंसल ने कहा कि हर नागरिक को प्रश्न पूछने का अधिकार है। वे सभी सवालों के जवाब देंगे। बहस के दौरान भाजपा और कांग्रेस के पार्षद कई बार मेयर के टेबल तक पहुंच गए।
भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह, अरुण सूद और देवेश मोदगिल ने बंसल से बूथ घोटाले में जवाब मांगा। बंसल ने कहा कि लोगों के लिए बूथ की सिफारिश करना गलत है तो वे इसे बार-बार करेंगे।
रेलगेट प्रकरण में बंसल ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की। केस में उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं है। उन्हें साजिश के तहत 105 कंपनियों का मालिक बताया जा रहा है।
भाजपा का विकास से नहीं कोई नाता : मेयर
बंसल ने कहा कि भाजपाई इतनी झूठ बोलते हैं कि उनके आगे हिटलर का सचिव (अगर जिंदा होते) भी कमजोर पड़ जाता। मेयर सुभाष चावला ने कहा कि भाजपा का शहर के विकास से कोई नाता नहीं है।
भाजपा बदनाम करने की राजनीति करती है। नॉन इश्यू को सदन में उठाने का कोई मतलब नहीं है।