भारतीय जनता पार्टी 1997 के बाद पहली बार शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से अलग होकर पहली बार लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने जा रही है। भाजपा के लिए दिक्कत यह है कि अभी तक पार्टी शहरी मतदाताओं के बल पर ही सत्ता हासिल करती रही है और अकाली दल ग्रामीण। लिहाजा, अब अकाली दल साथ नहीं है, तो ऐसे में भाजपा को ग्रामीण इलाकों में पूरी ताकत झोंकनी होगी।
जालंधर संसदीय हलके में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। जिले में पांच सब डिवीजन, पांच तहसील, सात सब तहसील, 11 ब्लॉक और 12 कस्बे हैं। इनमें कुल 954 गांव हैं। तहसील के हिसाब से जालंधर-1 में 140, जालंधर-2 में 251, नकोदर में 147, फिल्लौर में 228 और शाहकोट में 178 गांव आते हैं।
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जालंधर सिटी में चार विधानसभा हलके हैं, जिसमें जालंधर नार्थ, केंद्रीय, वेस्ट व कैंट विधानसभा क्षेत्र है, जबकि ग्रामीण में शाहकोट, फिल्लौर, नकोदर, करतारपुर व आदमपुर शामिल हैं। इन पांच ग्रामीण हलकों में दो हलके करतारपुर व नकोदर में आप विधायक हैं। बाकी तीन स्थानों पर कांग्रेस का कब्जा है। जालंधर की कुल नौ विधानसभा क्षेत्रों में एक पर भी विधायक भाजपा का नहीं है, जिस कारण पार्टी को जहां शहरी क्षेत्र में अपना वोट बैंक बढ़ाना होगा और ग्रामीण इलाकों में ताकत झोंकनी होगी।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा खुद जालंधर में आकर बैठ गए हैं। उनका फोकस जालंधर का देहात इलाका है। पार्टी की तरफ से देहात हलके में सिख नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें केवल सिंह ढिल्लों के अलावा परमिंदर बराड़, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, बलवीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़ आदि शामिल हैं। पार्टी की तरफ से अपने नेताओं को कहा गया है कि वह ग्रामीण इलाकों में पूरा नेटवर्क तैयार करें। पार्टी की तरफ से आदमपुर व भोगपुर में अचानक अपनी सक्रियता बढ़ाई गई है। भोगपुर में कई नेताओं को भाजपा में शामिल करवाया गया है।
पार्टी की तरफ से आगामी दिनों में ग्रामीण इलाकों में लगातार मीटिंग करने का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसके तहत पार्टी जहां ग्रामीण इलाकों में ताबड़तोड़ रैलियां करेगी, वहीं सिख चेहरों को पार्टी में शामिल करवाने की तैयारियां की जा रही है। दरअसल, शहरों में मतदाताओं की अधिक संख्या हिंदू समुदाय की है, जबकि ग्रामीण में दलित व सिख बिरादरी के मतदाता ज्यादा हैं।
भाजपा की तरफ से सिख चेहरों को आदेश जारी किया गया है कि वह गांव तक संपर्क कायम करें और वहां पर अपनी टीम व बूथ स्तर पर कमेटी का विस्तार करें। पार्टी के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा का कहना है कि भाजपा का ग्रामीण इलाकों में अभियान काफी सकारात्मक है और कई ऐसी योजनाएं तैयार की गई हैं कि भाजपा के साथ गांवों के लोग भी खुलकर साथ आ जाएं।
ईसाई भाईचारा भी उतरेगा मैदान में
सभी पार्टियां अपने उम्मीदवार का एलान करने में समय ले रही हैं। अकेली कांग्रेस ही है, जिसने अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही ईसाई भाईचारा भी राजनीति के मैदान में उतरने जा रहा है। कपूरथला के तहत आती खोजेवाल चर्च के प्रोफेट हरप्रीत दिओल ने राजनीति में उतरने की घोषणा की है। हालांकि प्रोफेट हरप्रीत दिओल ने कहा कि वह खुद राजनीति में नहीं आ रहे हैं व उनका राजनीति से कोई लेना देना है। वह धर्म के क्षेत्र में ही काम करेंगे, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए 35 कोस्टल क्रिश्चियन कम्युनिटी प्रबंधक कमेटी ने पार्टी बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चुनाव के बाद ईसाई भाईचारे को हर बार नजरअंदाज किया जाता है।