कयासों और दावों के विपरीत भाजपा के उम्मीदवारों की पहली सूची में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा अपने विरोधियों पर भारी पड़े। अपने मजबूत समर्थकों को टिकट दिलाकर न केवल रामबिलास का सियासी कद बढ़ा है, बल्कि टिकटों के रूप में उन्हें राजनीतिक रूप से संजीवनी भी मिल गई है।
सूची के माध्यम से उन्होंने विरोधियों पर पहली चोट कर दी है। भाजपा की पहली सूची में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी का नाम न आना जहां क ई कयासों को जन्म दे रहा है, वहीं राव इंद्रजीत के विरोधियों को टिकट देना भी नई राजनीति को जन्म दे रहा है।
रामबिलास को लेकर गंभीर नहीं था बीजेपी
पिछले काफी समय से रामबिलास को लेकर भाजपा कई मुद्दों को लेकर गंभीर नजर नहीं आई। ऐसे में ऐसा मानना लगा था कि भाजपा में उनका कद कम हो गया। यह धारणा उस समय प्रबल हुई जब सभी को दरकिनार कर इंद्रजीत भाजपा में शामिल हुए, बल्कि मोदी कैबिनेट में मंत्री पद भी हासिल कर लिया।
इसी के भरोसे वे खुद को सीएम का दावेदार भी जताते रहे हैं। राव इंद्रजीत के पार्टी में आने के बाद रामबिलाश शर्मा हासिए पर धकेल दिए गए। सूत्रों का कहना है कि सूची के माध्यम से पार्टी से साबित कर दिया है कि दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को एक दायरे में रखा जाए, साथ ही अपने नेताओं को आगे बढ़ाया।
इसी रणनीति पर काम करते हुए पार्टी ने विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी ने अलग लाइन और लैंथ निर्धारित की हैं। इसीलिए तो लगातार तीन बार हार चुके रामबिलास शर्मा को टिकट देने के लिए पार्टी ने एक सेंकेड भी नहीं लगाई है, इतना ही नहीं उनके समर्थकों भी टिकट दे दी।
बेटी को टिकट न दिलवा पाए इंद्रजीत सिंह
राव इंद्रजीत सिंह भाजपा की पहली लिस्ट में अपनी बेटी को टिकट नहीं दिलवा पाए। वे आरती राव के लिए रेवाड़ी से टिकट मांग रहे हैं, हालांकि यहां पर भाजपा ने अभी केंडिडेट घोषित नहीं किया है। गुड़गांव से राव इंद्रजीत सिंह अपने खामखास जीएल शर्मा को टिकट दिलाना चाह रहे थे, जबकि यहां उमेश अग्रवाल को टिकट मिली, इन्हें शर्मा के नदजीक माना जाता है।
इसी प्रकार राव इंद्रजीत बादशाहपुर से मेयर विमल के लिए टिकट कि सिफारिश कर रहे थे, लेकिन यहां भी उनकी नहीं चली और उनके न चाहते हुए भी राव नरवीर को टिकट दिया गया। राव नरवीर को भी शर्मा का साथी माना जाता है। तमाम विरोध के बावजूद रामबिलास शर्मा अपने रिश्तेदार मूलचंद शर्मा को बल्लभगढ़ से टिकट दिलाने में कामयाब रहे।
हालांकि, नारनौल में जरूर टिकट वितरण को लेकर विवाद है। विश्वसीय सूत्र इस बात का दावा करते हैं कि आरती राव को टिकट मिल जाएगा, लेकिन सियासी हलकों में सवाल यह है कि अहीरवाल के इतने बड़े नेता की लड़की को पहली लिस्ट में स्थान क्यों नहीं दिया गया?
यह चेक एंड बैलेंस का गेम
भाजपा के सियासी रणनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा इस सूची के माध्यम लिटमेस टेस्ट कर रही है, जिससे यह पता लग जाए कि पार्टी के अंदर किस सीट को लेकर क्या चल रहा है।
अभी तक जो सीटें घोषित की गई हैं, उनमें से 20 ऐसी सीटें हैं, जो पहले से ही तय थी। पार्टी व दिग्गजों की असली परीक्षा दूसरी लिस्ट में होगी।
अगर पार्टी इसी लाइन और लैंथ पर कायम रही और 90 सीटों पर इसी प्रकार का प्रयोग दोहराया गया तो दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं के पास अपने समर्थकों को जवाब देने के लिए शायद कुछ न बचे।
कई दिग्गजों के रिश्तेदारों को नहीं मिली टिकट
भाजपा की उम्मीदवारों की पहली सूची में परिवारवाद को स्थान नहीं मिल पाया है। हालांकि, बीजेपी ने बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को दी है। इसके अलावा उनके किसी समर्थक को टिकट नहीं दी गई।
असंध से वे रामप्रकाश गोगी व रादौर से निलय सैनी के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन यहां पार्टी अपने पुराने सिपोही श्याम सिंह राणा पर व ब शी सिंह पर दांव लगाया।
बीरेंद्र के खासमखास रहे धर्मपाल शर्मा का पहली लिस्ट में नाम न आना कई संकेत दे रहा है, हालांकि धर्मपाल शर्मा टिकट के प्रति आश्वस्त हैं।
बता दें कि रत्नलाल कटारिया पत्नी के लिए, सांसद रमेश कौशिक गन्नौर से भाई के लिए, कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे के लिए तिगांव, सांसद धर्मबीर तौशाम से अपने भाई लाला के लिए टिकट मांग रहे हैं, पहली सूची में इन्हें टिकट नहीं दी गई है।