आखिरी बजट में विरोधियों के लिए चुनावी चक्रव्यूह
हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मनोहर सरकार के मौजूदा कार्यकाल के आखिरी बजट में न केवल विरोधियों के लिए चुनावी चक्रव्यूह तैयार किया है, बल्कि लोकसभा चुनाव की पिच पर सरकार की जीत के लिए ‘गुगली’ भी डाल दी है। इस बार सरकार के लिए जीत का राह गांवों से ही होकर गुजरेगी।
वित्तमंत्री ने बजट में अबकी बार शहरों से ज्यादा गांवों पर ही मेहरबानी दिखाई है। कैप्टन के इस ‘मनोहर’ बजट में शहरियों की अपेक्षाकृत किसान और ग्रामीण प्रेम ज्यादा झलक रहा है। बजट से सरकार ने एक तीर से कई निशाने भी साधे हैं। चुनावों के मद्देनजर यदि वोट बैंक की स्थिति देखी जाए, तो गांवों से ज्यादा भाजपा का वोटर शहरों में है।
लेकिन वर्ष 2014 में सत्ता हासिल करने के बाद भाजपा की मनोहर सरकार ने ‘हरियाणा एक-हरियाणवी एक’ और ‘सबका साथ-सबका विकास’ की नीति पर चलते हुए शहरों केसाथ-साथ गांवों पर खास फोकस रखा है। पिछले साढ़े चार सालों में ग्रामीण विकास पर ढेरों योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन इस वित्त वर्ष के बजट में तो मनोहर सरकार ने गांवों के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया है।
ऐसा करते हुए सरकार ने विरोधी दलों के विकास कार्यों में भेदभाव को लेकर आगामी चुनावों में सरकार की घेराबंदी करने की रणनीति को भेदने की कोशिश की है।
कर्ज का मूल और ब्याज चुकाने में जाएगा 28 फीसदी बजट
हरियाणा सरकार के अनुमानित बजट का लगभग एक तिहाई हिस्सा कर्ज और उसका ब्याज चुकाने पर ही खर्च होगा। मनोहर सरकार ने सोमवार को अपना पांचवां बजट 1.32 लाख करोड़ रुपये का पेश किया है, जबकि प्रदेश पर 1.53 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसे चुकाने में कुल बजट के 20257.15 करोड़ रुपये यानी 27.91 प्रतिशत राशि चली जाएगी। सरकार को 2019-20 में सबसे अधिक अनुमानित आय 38.67 प्रतिशत अपने टैक्स से होगी। 32.36 प्रतिशत अनुमानित आय उधारियों से प्रस्तावित है। जिसमें स्टेट डेवलपमेंट लोन, फूड प्रोक्योरमेंट, नाबार्ड केंद्रीय लोन इत्यादि की राशि शामिल है।
15.96 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के करों में राज्य के हिस्से और सीएसएस एवं अन्य ग्रांट से होगी। गैर राजस्व कर से सरकार 7.58 फीसदी आय जुटाएगी। अन्य प्राप्तियां सरकार को 5.43 प्रतिशत होंगी। सरकार के कुल बजट का सबसे अधिक हिस्सा 30.69 प्रतिशत सामाजिक सेवाओं, शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण व जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग पर खर्च होगा। कर्ज और उसके ब्याज की अदायगी के अलावा 26.12 प्रतिशत राशि आर्थिक सेवाओं जैसे कृषि एवं संबद्घ क्षेत्र, उदय योजना सहित बिजली क्षेत्र, परिवहन, हवाई सेवाएं, सड़कें, ग्रामीण विकास व पंचायती राज क्षेत्र पर खर्च की जाएगी। 15.28 फीसदी राशि सामान्य सेवाओं यानी प्रशासनिक एवं पेंशन इत्यादि पर खर्च होगी।
कर्ज सीमा के अंदर, दीर्घकालिक विकास के लिए लिया : कैप्टन
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु दीर्घकालिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए कर्ज बेशक लिया है, मगर यह लोन सीमा के अंदर है। जीएसडीपी की ग्रोथ के मुताबिक लोन प्रतिशत हर साल कम किया है। कर्ज पेमैंट बढ़ी है, स्टांप ड्यूटी और जीएसडी कलेक्शन में इजाफा हो रहा है। आईटी के सदुपयोग से खर्च में कमी आई है और आमदनी बढ़ी है।
खर्च का ब्योरा एक नजर में
राजस्व लेखा पर 94291 करोड़, वित्तीय सेवाओं पर 666 करोड़, कर संग्रहण चार्ज पर 664 करोड़, सामान्य सेवाओं पर 34691 करोड़, प्रशासनिक सेवाओं पर 5934 करोड़, ऋण सेवाओं पर 16632 करोड़, अन्य सामान्य सेवाओं पर 12124 करोड़, सामाजिक सेवाओं पर 36114 करोड़, शिक्षा, खेलकूद, कला एवं संस्कृति पर 14861 करोड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर 4392 करोड़, तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण 1416 करोड़, अन्य सामाजिक सेवाएं 6984 करोड़, आर्थिक सेवाओं पर 22770 करोड़, ग्रामीण विकास पर 5064 करोड़, कृषि, मछली पालन पर 4740 करोड़, परिवहन पर 3146 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बजट की मुख्य बातें
श्लोक के साथ कैप्टन ने की बजट की शुरुआत, केंद्र सरकार की नई योजनाओं का किया स्वागत, प्रजा के सुख में सरकार के सुख का किया उल्लेख, 15 हजार से कम मासिक आय और पांच एकड़ तक भूमि वाले किसानों को पेंशन, इसके लिए बजट में 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान। सकल घरेलू उत्पाद में 8.2 फीसदी की वृद्धि, अगले पांच वर्ष में राजकोषीय बजट घाटा शून्य होने का अनुमान,
प्रदेश में रोजगार का अत्याधुनिक प्रदर्शन, 8.2 फीसदी जीडीपी हासिल करने का लक्ष्य, विजन 2020 पर कर रहे काम, 1.32 लाख करोड़ रुपये का कुल बजट, यह पिछले साल के मुकाबले 9.79 प्रतिशत अधिक है, पूंजीगत व्यय में 28.7 प्रतिशत, राजस्व व्यय के रूप में 71.3 फीसदी की बढ़ोत्तरी, स्वास्थ्य का बजट 12 प्रतिशत बढ़ाया, शिक्षा का बजट 9.3 फीसदी की वृद्धि, उच्च शिक्षा पर 17 फीसदी की वृद्धि,
तकनीकी शिक्षा पर 10 फीसदी की वृद्धि, खेल एवं युवा मामले पर 13.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन में 43.5 फीसदी की बढ़ोतरी, सहकारिता क्षेत्र के लिए 74 फीसदी की वृद्धि, कृषि, पशुपालन और बागवानी में 4.5 फीसदी की वृद्धि, गृह विभाग को 7.5 फीसदी अधिक बजट प्रस्ताव, एसवाईएल नहर के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान, कर्मचारी बीमा के लिए 172 करोड़ का प्रावधान,
किसानों की वित्तीय व सामाजिक सुरक्षा के लिए 1500 करोड़ का प्रावधान। स्किल एवं डेवलेपमेंट के लिए 680 करोड़, पहली बार कारपोरेट सैलरी पैकेज योजना, कर मुक्त बजट, किसी न कर का प्रस्ताव नहीं, गुरुग्राम में चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण, 9वीं से 12वीं तक छात्राओं के लिए मुफ्त बस सेवा, 2020 तक प्रदेश के सभी 167 मानवहित फाटकों को समाप्त करने का प्रस्ताव
नई योजनाएं नहीं, नया कर नहीं
1,32,165 करोड़ का बजट
कर्ज- 1.53,462 करोड़
राजस्व घाटा- 12022 करोड़
राजकोषीय घाटा- 22461 हजार करोड
पिछले साल से ज्यादा वृद्धि
बीते बजट से 14.73 फीसदी ज्यादा वृद्धि बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 2018-19 का बजट 1,15,198 करोड़ रुपये का था। जबकि इस बार 1,32,165 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है।
इस पर किया फोकस
बजट में कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय पर फोकस रखा गया है। प्रदेश का विकास आर्थिक सामाजिक आधार पर हो, इसलिए इन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ही अधिकतर योजनाएं सरकार आगामी वित्त वर्ष में बनाएगी।
ए और बी श्रेणी के उद्योगों को बिजली सब्सिडी
हरियाणा सरकार प्रदेश के ए और बी खंड में स्थित उद्योगों को दस किलोवाट तक कनेक्टड भार पर दो रुपये प्रति किलोवाट की दर से सब्सिडी देगी। सी और डी श्रेणी के उद्योगों को 20 किलोवाट तक के लोड पर दो रुपये प्रतिकिलो वाट की दर से सब्सिडी दी जा रही है।
शिक्षा
मौलिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए 12307 करोड़ आवंटित किए गए हैं। बीते बजट की तुलना स्कूली शिक्षा के बजट में 9.3 उच्च शिक्षा के लिए 2076 करोड़ का बजट रखा गया है। उच्च शिक्षा के बजट में सत्रह फीसदी की वृद्धि की गई है। तकनीकी शिक्षा के लिए 512 करोड़ का प्रावधान है।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 5040 करोड़ का आवंटन किया गया है। बीते बजट की तुलना में इस बार स्वास्थ्य पर 12.03 प्रतिशत की वृद्धि है। स्वास्थ्य एवं परिवार के लिए 3126 करोड़ चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए 1358 करोड़ का प्रावधान है।
कृषि
3834 करोड़ बजट आवंटित किया गया है। बीते बजट की तुलना में इसमें साढ़े चार प्रतिशत की वृद्धि की गई है। कृषि के लिए 2210 पशुपालन के लिए 1026, बागवानी के लिए 523 और मत्स्य पालन के लिए 73 करोड़ का प्रावधान है।
बिजली
बिजली विभाग के लिए 12988 करोड़ तथा रिनीवल एनर्जी के लिए 475 करोड़ का प्रावधान है। स्वास्थ्य एवं जन अभियांत्रकी विभाग के लिए 3605 करोड़ की राशि आवंटित की है। किसानों के लिए बिजली विभाग की ओर से अनेक योजनाएं शुरू की जाएंगी।
विभागों के बजट में इजाफा
सिंचाई एवं जल संसाधन
3324.51 करोड़ रुपये का बजट आवंटित। 2018-19 के संशोधित बजट की तुलना 6.2 फीसदी अधिक। बीते वर्ष 3130 करोड़ रुपये हुए थे आवंटित।
लोकनिर्माण, भवन एवं सड़कें
लोक निर्माण के क्षेत्र में और आगे बढ़ने के लिए भारी भरकम बजट दिया गया है। 3626.21 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बजट अनुमान 2018-19 के 3169.70 करोड़ रुपये की तुलना में वर्तमान आवंटित बजट 14.4 फीसदी अधिक है।
नागरिक उड्डयन
हवाई सेवाओं को बढ़ाने देने के लिए सरकार ने इस क्षेत्र का बजट पचास प्रतिशत से अधिक बढ़ाया है। विभाग को 214.10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह 2018-19 के बजट अनुमान 141 करोड़ रुपये से 51.9 प्रतिशत अधिक हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स को बढ़ावा देकर सरकार व्यवस्था परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। इस विभाग को 152.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह 2018-19 के संशोधित अनुमान 114.64 करोड़ रुपये से 33.2 प्रतिशत अधिक है।
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन और वन
13.09 करोड़ रुपये आवंटित। बीते बजट में 8.07 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। सरकार ने वास्तुकला विभाग को 11.18 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। बीते बजट में विभाग को 10.20 करोड़ रुपये मिले थे।
खान एवं भू विज्ञान
101.55 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। बीते बजट में 70.38 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इस बार 44.3 फीसदी बजट अधिक मिला है।
बजट में ये की नई घोषणाएं
. ईएसआईसी करनाल के तरावड़ी, कुरुक्षेत्र, चरखी दादरी और कैथल में नई डिस्पेंसरी और पंचकूला में ईएसआई स्वास्थ्य देखभाल के लिए निदेशालय व डिस्पेंसरी का भवन निर्माण 2019-20 में सिरे चढ़ने की उम्मीद है।
. नौवीं से 12वीं तक की 22 हजार छात्राओं को निशुल्क परिवहन सुविधा।
. तकनीकी शिक्षा के पुनरुद्घार, पुनर्जीवन व दोबारा सृजन का लक्ष्य। हरित परिसर, प्रौद्योगिकी कार्यक्रम, उत्कृष्टता केंद्र, पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, शिक्षण पद्घति में सुधार लाना।
. 294 बस्तियों में पेयजल आपूर्ति का प्रस्ताव। जलापूर्ति बढ़ाने के लिए 1059 करोड़ की 13 योजनाएं प्रगति पर।
. 2022 तक 150 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य। 49.8 मेगावाट क्षमता की चार पराली आधारित जैव ऊर्जा परियोजनाएं स्वतंत्र बिजली कंपनियों को आवंटित, 2020 में चालू होने की संभावना। हर साल परियोजनाओं में 5.55 लाख टन पराली की खपत होगी। 2023 तक एक हजार टीपीडी क्षमता का सीबीजी प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य। इससे हर साल चार लाख टन कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन होगा।
. 30 मेगावाट की ग्रिड कनेक्टेड रूफ टॉप सौर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। 278 गौशालाओं में 1606 केवी क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होंगे।
. किसानों को दो और पांच एवनी के सौर वाटर पंप सिस्टम दिए जाएंगे। 75 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। बिजली संचालित नलकूपों को सौर ऊर्जा से चलाया जाएगा। यमुनानगर में मारूपुर व करनाल के बियाना फीडर के लिए पायलट योजना तैयार। आंगनबाड़ी केंद्रों में लाइट व पंखे चलाने के लिए 3 एलईडी लाइट, दो पंखों और दो यूएसबी पोर्टल बाली सौर गृह प्रणालियां स्थापित करने की योजना तैयार। 9500 केंद्रों में होंगी स्थापित।
. 100 जलवाय स्मार्ट गांव स्थापित किए जाएंगे। ई-रवाना प्रणाली परीक्षण आधार पर पंचकूला के अलावा अन्य जिलों में शुरू होगी।
. जल्द मिलेंगे 7520 पुलिस कर्मी। फरीदाबाद, जींद व सोनीपत में तीन और चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
. पंचकूला में राज्य पुरातात्विक संग्रहालय। अंबाला में उपक्षेत्रीय विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा।
‘मेडल फैक्टरी’ में खिलाड़ियों का हौसला और बढ़ेगा
हरियाणा को खेलों की दुनिया में मेडल फैक्टरी कहा जाता है। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन या नेशनल गेम्स हो हरियाणा के खिलाड़ियों ने कभी देश को मायूस नहीं किया है। पिछले साल राष्ट्रमंडल खेल-2018 में भारत ने जीते कुल 66 पदकों में से 22 पदक, एशियन गेम्स-2018 में कुृल जीते गए 69 पदकों में से 17 पदक और खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2019 में 178 पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने ही कब्जाए हैं। इन खिलाड़ियों की प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने भविष्य में भी इन खिलाड़ियों का हौसला और बढ़ाने की मंशा इस बजट में जाहिर की है।
सरकार ने इस बार खेल एवं युवा मामले के बजट में 13.9 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए बजट को बढ़ाकर 401.17 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वित्तमंत्री ने बजट में इस बात पर भी इतराते हुए बताया कि उनकी सरकार ने 8601 खिलाड़ियों को 213.16 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि भी बांटी है, जबकि पिछली सरकार ने 2009-10 से 2013-14 की अवधि के दौरान केवल 51.84 करोड़ रुपये ही खिलाड़ियों को इनाम स्वरूप बांटे थे। वित्तमंत्री ने इस दौरान प्रदेश के योग्य खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती में श्रेणी-वन, टू व थ्री के पदों में 3 प्रतिशत और श्रेणी चार में 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान की भी घोषणा की।
1000 नई खेल नर्सरी को वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। सरकार ने राई में खेल विश्वविद्यालय खोलने का भी निर्णय लिया है। इस विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक खेल प्रशिक्षण संस्थान होगा और यह खेल से संबंधित पाठ्यक्रमों और खेल अनुसंधान की जरूरतें पूरा करेगा। कौशल विकास में भी सरकार ने अपना विजन पेश किया है। इसके अंतर्गत 21 राजकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में दोपहिया चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना करके लड़कियों/ महिलाओं को चालन कौशल प्रदान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग, हरियाणा और हीरो मोटो कॉर्प लिमिटेड के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इसके अलावा 24 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपग्रेड करने का भी प्रस्ताव है। कौशल विकास की सभी योजनाओं के लिए इस बार बजट में 24.1 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। रोजगार की दिशा में सरकार अपने अन्य प्रयासों के साथ-साथ सक्षम युवा योजना को भी और मजबूत बनाएगी। सक्षम हरियाणा अभियान के एक भाग के रूप में 16332 बेरोजगार युवाओं को ओला और ऊबर के साथ समझौते के तहत कैब/टैक्सी ड्राइवरों (सक्षम सारथी) के रूप में नियोजित किया गया है। इसकेअलावा बेरोजगारी भत्ता योजना समेत रोजगार से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के लिए सरकार ने 51.3 प्रतिशत अपना बजट बढ़ाया है।
बिजली विभाग के बजट पर कैंची, चौबीस घंटे बिजली का वादा
इस बार बिजली विभाग के हिस्से में अपेक्षाकृत कम बजट आया है। लेकिन उसके बावजूद हरियाणा सरकार ने गांवों में चौबीस घंटे बिजली देने का वादा किया है। इसके साथ-साथ सरकार ने उदय (उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना) स्कीम के तहत बिजली वितरण के घाटे को भी कम करने के प्रयासों में और तेजी लाने की भी मंशा बजट में जाहिर की है। इस बार बिजली विभाग का बजट 12988.61 करोड़ रखा गया है। जबकि पिछले साल ये बजट 15372.16 करोड़ था। लोकसभा चुनाव से पहले पेश हुए इस बजट में सरकार की ओर से वित्तमंत्री ने दावा किया है कि सरकार सभी को चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध करवाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। ‘म्हारा गांव-जगमग गांव’ योजना के तहत 675 फीडरों के अधीन आने वाले 3205 गांवों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पंचकूला, अंबाला, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सिरसा और फतेहाबाद जिलों के सभी गांवों में 24ङ्ग7 बिजली सप्लाई की बात वित्तमंत्री ने बजट में कही है।
शहरी बजट में हुई सिर्फ 241.9 करोड़ की वृद्धि
वर्ष 2016-17 में हरियाणा सरकार ने शहरी स्थानीय निकाय व नगर एवं ग्रामीण आयोजन विकास के लिए 3408.16 करोड़ बजट का प्रावधान किया था। वित्त वर्ष 2017-18 में यह बजट बढ़ाकर 4973.58 करोड़ कर दिया गया। इस साल सरकार की मेहरबानी शहरी विकास पर रही। उसके बाद वर्ष 2018-19 में फिर से शहरों पर फोकस करते हुए विकास बजट 5626.84 करोड़ कर दिया गया। लेकिन इस साल वर्ष 2019-20 में ये वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही और विकास बजट 5868.74 करोड़ रहा। जोकि गत वर्ष की तुलना में सिर्फ 241.9 करोड़ ही ज्यादा है। इसमें शहरी स्थानीय निकाय का बजट तो ज्यादा नहीं बढ़ा, लेकिन नगर एवं ग्राम आयोजन विभाग के बजट में 37.4 प्रतिशत की वृद्धि की गई।
ग्रामीण बजट में इस बार 916.76 करोड़ का इजाफा
शहरों की अपेक्षाकृत इस बार गांवों का बजट 674.86 करोड़ अधिक रखा गया है। सरकार ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के लिए वर्ष 2016-17 में 3167.55 करोड़ का बजट रखा था। वर्ष 2017-18 में इसे बढ़ाकर 4963.09 करोड़ कर दिया गया। लेकिन वर्ष 2018-19 में यह 4277.40 करोड़ हो गया। लेकिन इस बार 21.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बजट का प्रावधान 5194.16 करोड़ कर दिया गया है। जोकि गत वर्ष की तुलना में 916.76 करोड़ अधिक है।
अब ‘स्टार्ट-अप विलेज’ से होगा ग्रामीण उद्यमों का उदय
स्टार्ट अप की पहुंच अब शहरों तक ही नहीं रहेगी। ‘स्टार्ट अप विलेज’ के माध्यम से हरियाणा सरकार अब गांवों को भी औद्योगिक मजबूती देगी। इसके लिए सरकार ने स्टार्ट अप विलेज आंत्रप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीआईपी) शुरू किया है। इस प्रोग्राम के तहत सरकार गांवों में उद्योगों को बढ़ावा देते हुए ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर करते हुए ग्रामीण युवाओं को अपने रोजगार के लिए भी प्रेरित करेगी।
हरियाणा सरकार ने अपने बजट में इसके लिए भी प्रावधान करते हुए विशेष तौर पर इस प्रोग्राम पर जोर दिया है।वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु का मानना है कि इस प्रोग्राम का उद्देश्य ग्रामीण उद्यमों को शुरू करने में सहायता और सहयोग करना है। इस स्कीम के तहत वर्ष 2018-19 के दौरान 433 उद्यम स्वीकृत किए गए हैं और एसवीईपी के सघन क्रियान्वयन के लिए चार खंडों को सम्मलित किया गया है।
इसके अलावा सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन (एसपीएमआरएम) के तहत रुर्बन क्लस्टर चिह्नित और विकसित करेगी। ये क्लस्टर चिह्नित आर्थिक गतिविधियां चलाकर, कौशल व स्थानीय उद्यमशीलता विकसित करके और बुनियादी जन सुविधाएं उपलब्ध करवाकर विकसित किए जाएंगे। इस स्कीम के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 10 क्लस्टरों में 152 गांवों को शामिल किया गया है।
इसमें 241 कार्यों को शुरू किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त दीनबंधु ग्राम उदय योजना के तहत आंगनबाड़ियों, राज्य के पशु चिकित्सा अस्पताल, पशु चिकित्सा औषधालयों के लिए भी 47.57 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई है। 700 ग्राम ज्ञान केंद्रों के निर्माण की 210 करोड़ रुपये की एक परियोजना नाबार्ड की स्वीकृति के लिए विचाराधीन है।
अन्नदाता को ऊर्जा दाता बना दिखाया खुशहाली का सपना
भले ही इस बार हरियाणा सरकार ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर खर्च होने वाले बजट में कुछ खास इजाफा नहीं किया है, लेकिन किसानों को उनकी खुशहाली का सपना जरूर दिखाया है। इसी सपने में किसानों की आय दोगुनी करने की सरकारी मंशा भी दिखती है। सरकार चाहती है कि इस बार अन्नदाता को ऊर्जादाता भी बनाया जाए। खेतीबाड़ी के साथ-साथ धरतीपुत्र ऊर्जा भी पैदा करें और उसे बेचकर अपनी कमाई बढ़ाएं। इसके सरकार ने बजट में खास प्रावधान किए हैं। इन सभी प्रावधान के साथ सरकार ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के बजट में 4.5 करोड़ की वृद्धि की है।
बजट का यह 3834.33 करोड़ रुपये रखा गया है।‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ विजन को आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में कई पहल की है, जिनमें राज्य में बायोमास ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए जैव ऊर्जा नीति-2018 को अधिसूचित कर दिया है। इसमें वर्ष 2022 तक 150 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य है। वर्ष 2018-19 में 18 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य है। वर्ष 2019-20 में 30 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना, किसानों की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा पंप प्रणालियां प्रदान की स्कीम क्रियान्वित करना शामिल है।
इसके अलावा किसानों को उनकी फसलों का पूरा दाम मिले, सरकार ने ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ योजना भी शुरू की है। बागवानी फसलों के लिए भावांतर भरपाई योजनाओं का और विस्तार होगा। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा विशिष्ट मंडियों के विकास का काम शुरू हो गया है। फसल नुकसान के मुआवजे के लिए भी सरकार ने पूरी तत्परता बजट में दिखाई है। सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य में बागवानी के तहत क्षेत्र को 8.17 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाकर लगभग दोगुना करने और उत्पादन को तीन गुना करने के उद्देश्य से हार्टिकल्चर विजन तैयार किया है।
पशुपालन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वर्ष 2019-20 में 52 राजकीय पशु चिकित्सा अस्पतालों और 115 राजकीय पशु औषधालयों के निर्माण का प्रस्ताव है। मत्स्य पालन में वर्ष 2019-20 के अंत तक मछली पालन के अधीन जल क्षेत्र 20 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 21 हजार हेक्टेयर व मत्स्य उत्पादन 2.28 लाख मीट्रिक से बढ़ाकर 2.41 लाख मीट्रिक टन और प्रति हेक्टेयर मत्स्य उत्पादकता 11 हजार किलोग्राम की जाएगी। सहकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2020-21 तक 750 करोड़ रुपये की कुल लागत से शाहबाद चीनी मिल में 60 केएलपीडी का इथेनॉल प्लांट लगाने और सहकारी चीनी मिल पानीपत और करनाल का आधुनिकीकरण करने का प्रस्ताव है। इसके लिए बजट 1396.21 करोड़ रखा गया है।
लॉजिस्टिक वेयरहाउसिंग और रिटेल में खुलेंगे रोजगार के द्वार
हरियाणा सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले किसान और श्रमिक वर्ग को साधने के साथ ही विधानसभा चुनाव में विजय पताका फहराने की नींव भी रख दी है। प्रदेश सरकार बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी के अलावा निजी क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया कराने की तैयारी में है। सरकार ने अपने अंतिम बजट में लॉजिस्टिक वेयरहाउसिंग और रिटेल पॉलिसी जल्दी ही लागू करने की घोषणा की है। इन दोनों क्षेत्रों में युवाओं को सरकार बड़े पैमाने पर एडजस्ट करना चाहती है।
फार्मास्युटिकल और टेक्सटाइल पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जा चुका है। केएमपी के किनारे सरकार ग्लोबल इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना विकसित करेगी। 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अनुमानित निवेश से यह कॉरिडोर विकसित होगा। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि केएमपी के साथ-साथ ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पंचग्राम विकसित करने का काम भी चल रहा है। प्रदेश में सात यूनिवर्सिटी में सात इन्क्यूबेट सेंटर स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, हर सेंटर पर तीस लाख रुपये खर्च होंगे।
35 हजार सौर पंप होंगे स्थापित
सरकार 3 एचपी से 10 एचपी क्षमता के पचास हजार ऑफ ग्रिड सोलर पंप स्थापित करेगी। इसे 75 प्रतिशत राज्य सब्सिडी के साथ नाबार्ड से कर्ज लेकर दो चरणों में लागू किया जाएगा। 2018-19 में पहले चरण में 15 हजार व 2019-20 में दूसरे चरण में 35 हजार सोलर पंप किसानों के लिए लगाए जाएंगे। सरकार ने रेलवे ओवर व अंडर ब्रिज का प्रावधान कर मानवरहित रेलवे फाटकों को समाप्त करने जा रही है। 2020 तक सरकार 167 मानवरहित फाटकों को समाप्त करेगी।
20 हजार करोड़ रुपये निवेश और 1.2 लाख लोगों को रोजगार का लक्ष्य
सरकार ने अगले पांच साल में आईअी और ईएसडीएम क्षेत्रों में बीस हजार करोड़ रुपये के निवेश और 1.2 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। सरकार चाहती है कि जीएसडीपी में आईटी और ईएसडीएम सेक्टर के योगदान को 9.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जाए। इसके अलावा सरकार कम से कम 500 स्टार्ट अप को इन्क्यूबेट करने और नागरिकों, व्यवसायियों के लिए सुरक्षित एवं लचीले साइबर स्पेस के विकास पर भी काम कर रही है।
सार्वजनिक उपक्रमों की सुधरी आर्थिक सेहत, अब घाटे में मात्र चार उपक्रम
हरियाणा के सार्वजनिक उपक्रमों की माली हालत में सुधार आया है। मात्र चार उपक्रम ही घाटे ही में रह गए हैं। वर्ष 2017-18 में कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत 22 सार्वजनिक उपक्रमों में से 18 उपक्रमों ने शुद्ध लाभ अर्जित किया, जबकि वर्ष 2013-14 में 13 सार्वजनिक उपक्रम शुद्ध लाभ की स्थिति में थे। वर्ष 2017-18 में इन 18 उपक्रमों का अर्जित लाभ 1116.16 करोड़ रुपये था। घाटे में रहने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या वर्ष 2013-14 के 9 से कम होकर वर्ष 2017-18 में 4 रह गई है। राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का सकल घाटा भी कम हुआ है।
वर्ष 2017-18 में यह कम होकर 19.89 करोड़ रुपये रह गया। सहकारी समितियां अधिनियम, 1984 के तहत पंजीकृत 19 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने भी सुधार के लक्षण दिखाए हैं। लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या 2013-14 में पांच थी, जो बढ़कर 2017-18 में सात हो गई। इसी अवधि के दौरान उनका लाभ 72.91 करोड़ रुपये से बढ़कर 132.20 करोड़ रुपये हुआ। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि पूंजीगत व्यय का आर्थिक विकास पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, इसलिए सरकार कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात बढ़ाने पर जोर देगी।
पूंजी निवेश भी करने लगे उपक्रम
बजट अनुमान 2018-19 के 30,011.76 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की तुलना में संशोधित अनुमान 2018-19 में 35,040.59 करोड़ रुपये तक बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। बजट अनुमान 2019-20 में यह और बढ़कर 37,924.09 करोड़ रुपये होने की संभावना है। कुल व्यय के अनुपात में पूंजीगत व्यय 2017-18 के 22.50 प्रतिशत से बढ़कर संशोधित अनुमान 2018-19 में 29.11 प्रतिशत हो गया। बजट अनुमान 2019-20 में यह कुल बजट का 28.69 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी व्यापक पूंजी निवेश कर रहे हैं। वर्ष 2019-20 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 4185.00 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करने का अनुमान रखा है।
राजकोषीय दूरदर्शिता को मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार ने विकास गति को बनाए रखने के लिए राजकोषीय दूरदर्शिता को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। संसाधनों का कुशल और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘निष्पादन से जुड़ा परिव्यय’ (पीएलओ) के नाम से एक नई योजना शुरू की है। इससे फंड की पार्किंग पर अंकुश लगा है। सरकार ने योजना शुरू करने के बाद से अब तक दस हजार करोड़ रुपये ऐसे पकड़े हैं, जो विभागों ने बैंकों में बिना खर्च किए जमा कर रखे थे। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि यह राशि सरकार ने विभागों से विशेष कोष में जमा करा ली है, जिसे विकास कार्र्यों पर खर्च किया जाएगा। भविष्य में सरकारी फंड की पार्किंग को रोकने के लिए गठित हरियाणा वित्तीय सेवाएं निगम विशेष नजर रखेगा। निगम को यह ऑनलाइन पता चल जाएगा कि किस विभाग के पास बिना उपयोग किए हुए राशि जमा करके रखी गई है।
जीएसटी के लिए ये सब घोषणाएं की
आबकारी एवं कराधान - जीएसटी
हरियाणा ने जीएसटी, जिसने ‘एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर’ की अवधारणा को वास्तविकता बना दिया है, की कार्यान्वयन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की है और देश के शीर्ष राजस्व संग्रहकर्ताओं में अपनी जगह बनाई है। जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य के बीच करदाताओं के विभाजन के प्रथम दौर को अंतिम रूप दिया गया है। कुल 4.46 लाख करदाताओं में से, राज्य का 3.07 लाख करदाताओं पर और केंद्र का 1.38 लाख पर नियंत्रण है।
प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद, पूर्ववर्ती वैट/सीएसटी अधिनियमों के तहत पंजीकृत कुल 2.18 लाख डीलरों ने 31 दिसंबर, 2018 तक जीएसटी को अपनाया है। इसके अलावा, 2.28 लाख से अधिक डीलरों ने इस अधिनियम के तहत पंजीकरण कराया है, जिससे प्रदेश के राजस्व में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, विभाग द्वारा समय-समय पर बाजार सर्वेक्षण करवाया जा रहा है और 31 दिसंबर, 2018 तक 2,809 गैर-कार्यात्मक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का पंजीकरण रद्द किया गया है।
अप्रैल, 2018 में ई-वे बिल के कार्यान्वयन के बाद दिसंबर, 2018 तक 4 करोड़ से अधिक ई-वे बिल सृजित किए गए हैं। वर्तमान में हरियाणा प्रतिदिन औसतन एक लाख ई-वे बिलों के सृजन के साथ, ई-वे बिल सृजन में देश में चैथे स्थान पर है।
डीबीटी के लिए ये सब घोषणाएं की
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी)
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के तहत हरियाणा में 61 केन्द्र प्रायोजित योजनाएं तथा 74 राज्य योजनाएं चलाई जा रही हैं। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान छह लाभार्थियों को निकालने के परिणामस्वरूप 258.98 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
वित्त वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक (दिसम्बर, 2018 तक) कुल 1177.20 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इसके अलावा, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के तहत सभी योजनाओं में दिसम्बर, 2018 तक 3088.87 करोड़ रुपये का नोशनल लाभ हुआ है, यदि छंटनी किए गए लाभार्थी वर्ष 2014-15 से निरंतर सम्बन्धित योजनाओं में बने रहते तो यह लाभ नहीं होना था।
शहरों में होगा मेट्रो का विस्तार, सूबे को मिलेगी और रफ्तार
गांवों के साथ-साथ सरकार ने शहरी विकास पर भी अपना भावी विजन साफ कर दिया है। हरियाणा में जहां सरकार अब मैट्रो परियोजनाओं का और विस्तार करेगी, वहीं प्रदेश में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम भी डेवलप होगा। इससे हरियाणा के विकास और जन सुविधाओं को और रफ्तार मिलेगी। सरकार ने बजट में शहरों के विकास की योजनाओं का खाका भी खींचा है। बजट में मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार की झलक दिखाते हुए सरकार स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश के अन्य इलाकों को भी अब मेट्रो से जोड़ा जाएगा।
परियोजनाओं को और बढ़ावा देने के लिए नरेला से कुंडली, फरीदाबाद से गुरुग्राम, गुुरुग्राम के हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण सिटी सेंटर से रेलवे स्टेशन, बहादुरगढ़ से सांपला, बाढ़सा से द्वारका और गुरुग्राम में दक्षिणी परिधि सड़क पर मेट्रो का विस्तार करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी (शाहजहांपुर-नीमराम-बहरोड़) कॉरिडोर परियोजना के क्रियान्वयन की स्वीकृति प्रदान की है। इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कस्बों के निवासियों को आवागमन की आरामदायक और तीव्र सुविधा मिलेगी और परिवहन मांग में अत्यधिक वृद्धि होगी।
प्रथम चरण में तीन आरआरटीएस कॉरिडोर दिल्ली-पानीपत, दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर और दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ को क्रियान्वित करने को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए इस बार बजट में 500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा शहरों में अटल पुनरुत्थान और शहरी परिवहन के तहत हरियाणा के 18 कस्बों के लिए भारत सरकार ने 2565.74 करोड़ रुपये की राज्य वार्षिक कार्य योजना स्वीकृत की है। इसमें से 2274.50 करोड़ रुपये की लागत के 41 कार्य आवंटित कर दिए गए हैं। इसी योजना में विभिन्न पालिका सुधार के लिए भी हरियाणा को 6.40 करेाड़ की प्रोत्साहन राशि मिली है। शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए भी सरकारी योजनाओं पर काम चल रहा है।
मेडिकल की पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा
राज्य के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बजट 2019-20 में गुरुग्राम में बनने वाले चिकित्सा महाविद्यालय की भी चर्चा की। इस विश्वविद्यालय के निर्माण के बाद गुरुग्राम के युवाओं को मेडिकल की शिक्षा ग्रहण करने के लिए मीलों का सफर तय कर दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इसके अलावा निजी कालेजों में मोटी फीस भी नहीं देनी पड़ेगी। गुरुग्राम में मेडिकल कालेज बनने से इलाके के युवा अपने जिले में ही मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे।
इसके बनने से मरीजों को भी लाभ होगा। डॉक्टरों की कमी पूरी होने के अलावा मरीजों को हर बीमारी का इलाज जिले में ही मिलने में सहायता मिलेगी। वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के दौरान बताया कि नगर निगम गुरुग्राम, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) व शीतला माता श्राइन बोर्ड मिलकर इस चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना कर रहे हैं। इससे जिले में चिकित्सा सेवाओं में बढ़ोतरी होगी।
गत वर्ष मुख्यमंत्री मनोहर लाग ने इस चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। विश्वभर में मेडिकल हब के तौर पर पहचान बना चुके गुरुग्राम में यह पहला मेडिकल कालेज होगा। नगर निगम ने इसके लिए द्वारका एक्सप्रेसवे के पास धनकोट गांव में 40 एकड़ जमीन चिन्हित की है। मेडिकल कॉलेज का नाम शीतला माता के नाम पर ही होगा। बजट में इसके लिए भी राशि का प्रावधान किया गया है।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रदेश उप-प्रधान डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज बनने से जिले में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को फायदा होगा। पढ़ाई के लिए उन्हें दूसरे राज्यों या जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय में बचत होने के साथ ही जिले को नए डॉक्टर भी मिलेंगे। वहीं कॉलेज बनने से जिले में विशेषज्ञों व चिकित्सकों की कमी भी दूर होगी।
मानदेय दोगुना होने से नंबरदारों में खुशी
प्रदेश सरकार द्वारा बजट में मानदेय दोगुना करने से नंबरदार काफी खुश हैं। नंबरदारों ने बजट का स्वागत करते हुए वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के मानदेय बढ़ाने के निर्णय को सराहनीय करार दिया। उनका कहना है कि नंबरदार ही प्रशासन व लोगों के बीच की कड़ी का काम करते हैं। बजट में नंबरदारों का पहले 1500 रुपये से बढ़ाकर अब 3 हजार रुपये मासिक मानदेय किया है।
राव मानसिंह नंबरदार का कहना है कि पुराने जमाने से नंबरदार जमीनों की उगाही व गवाही करते आ रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने अब जाकर नंबरदारों का मान सम्मान बढ़ाया है। इससे पहले नंबरदारों को केवल 1500 रुपये माह मिलते थे। राम किसान प्रजापति नंबरदार कहते हैं कि सरकार जमीन खरीदने व बेचने के लिए नंबरदार की गवाही ही लेती है, लेकिन इसके बदले में कुछ भी नहीं मिलता।
अगर जमीन में कोई भी घपलेबाजी हो जाए, तो भी नंबरदार को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है। अब सरकार ने 3 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की घोषणा की है। अशोक कुमार शर्मा नंबरदार का कहना है कि सरकार को नंबरदारों के काम के हिसाब से अन्य सुविधाएं भी देनी चाहिए, क्योंकि नंबरदार ही प्रशासन व लोगों के बीच कड़ी का काम करते हैं।
चमन किशोर नंबरदार का कहना है कि राज्य सरकार ने बजट में 1500 से बढ़ाकर 3 हजार रुपये मेहनताना कर दिया है, जिससे सभी नंबरदारों में खुशी हैं।