हरियाणा के बांगड़ क्षेत्र में आने वाली हिसार और सिरसा लोकसभा सीटों पर इस बार कमल खिलाने की राह में कई कांटे हैं। दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता ही चुनौती बन गए हैं। कई नेता प्रत्याशियों का खुलकर विरोध कर रहे हैं तो कई अंदरखाते मुखालफत कर रहे हैं।
अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दोनों सीटों को लेकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने नाराज नेताओं को साधने के साथ हिसार और सिरसा के प्रत्याशियों रणजीत चौटाला और अशोक तंवर की राह से कांटों को निकालना शुरू कर दिया है।
भाजपा प्रत्याशियों के बढ़ते विरोध से भाजपा को हो रहे नुकसान को डैमेज कंट्रोल करने के लिए मनोहर लाल सिरसा और हिसार का दौरा कर रहे हैं। रविवार को उन्होंने एक-एक करके उन्होंने कई नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात की। सिरसा में रविवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ भाजपा नेताओं का डिनर डिप्लोमेसी भी नाराजगी दूर करने की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उनके सभी नेता एक साथ हैं।
दोनों सीटों पर नए चेहरों पर दांव
भाजपा ने हिसार और सिरसा दोनों ही सीटों पर नए चेहरों पर दांव खेला है। इसी बात को लेकर स्थानीय नेताओं में नाराजगी है। नेताओं का तर्क है कि जब भाजपा में ही इतने नेता हैं तो बाहरी नेताओं को टिकट क्यों। हिसार में कैप्टन अभिमन्यु और कुलदीप बिश्नोई शांत बैठे हैं और भाजपा प्रत्याशी के साथ नहीं आ रहे हैं। इन दोनों का क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। हिसार में रणजीत चौटाला को मजबूत करने के लिए मनोहर ने पूर्व मंत्री हरी सिंह सैनी और कुलदीप बिश्नोई के खास समर्थक रणधीर पनिहार से घर जाकर मुलाकात की।
सिरसा में गोपाल कांडा भी अशोक तंवर के साथ नहीं आ रहे हैं। हालांकि, शनिवार को मनोहर लाल ने सांसद सुनीता दुग्गल, कांडा के भाई गोविंद कांडा से मुलाकात की और बाद में मनोहर लाल गोपाल कांडा से मिलने के लिए उनकी कुटिया में पहुंचे। कांडा इस बात से नाराज हैं कि उनको निर्दलीय कोटे से मंत्री नहीं बनाया गया। करीब सात घंटे तक प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तंवर के लिए सिरसा में कांटे निकालने की कोशिश की। सूत्रों का दावा है कि कांडा बंधुओं को विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट दिलाने का आश्वासन दिया गया है।
मीनू बेनीवाल थाम सकते हैं भाजपा का दामन
भाजपा-जजपा गठबंधन के रणनीतिकार मीनू बेनीवाल भाजपा का दामन थाम सकते हैं। भाजपा के पदाधिकारियों से उनकी कई मुलाकात हो चुकी हैं। वह मुख्य रूप से ऐलनाबाद विधानसभा में सक्रिय हैं। पिछली बार उपचुनाव में भी वह टिकट के दावेदार थे, लेकिन बात नहीं बन सकी। अब लोकसभा चुनाव में वह शांत बैठे हैं और भाजपा प्रत्याशी अशोक तंवर के साथ नहीं दिख रहे हैं। हालांकि, इससे पहले वह भाजपा की रैलियों को सफल बनाने के लिए लगातार काम करते रहे हैं। संभावना है कि तंवर की जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा जल्द बेनीवाल को भगवा पटका पहना दे।