बर्ड वाचिंग की आदत जिसमें एक बार पड़ जाती है, वह उसका मुरीद बन जाता है। सेक्टर 46 के रहने वाले सिद्धार्थ नागर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उन्होंने करीब साढ़े पांच साल पहले बर्ड वाचिंग की शुरुआत की थी, लेकिन अब उनमें ऐसा जुनून छाया है कि जब भी उन्हें वक्त मिलता है, वे बर्ड वाचिंग करते हैं। कई बार तो ऐसा हुआ कि जब वे आफिस जा रहे थे, रास्ते में उन्हें खूबसूरत पक्षी मिले और वे बर्ड वाचिंग में जुट गए। उनकी गाड़ी में हर वक्त वरनाकुलर रहता है। उनको देखकर ही कई लोगों ने बर्ड वाचिंग का रास्ता चुना।
प्रकृति प्रेमी थे, बर्ड वॉचर भी बन गए
सिद्धार्थ बताते हैं कि वे शुरू से ही प्रकृति प्रेमी रहे हैं। उन्हें ट्रैवलिंग का शौक है। एक बार वे गुजरात के गीर नेशनल पार्क में घूमने गए। वहां पर वे जब फोटोग्राफी कर रहे थे, तभी उन्हें कुछ खूबसूरत पक्षी दिखे। इन पक्षियों के बारे में जब वहां मौजूद गाइड के बारे में पूछा तो उसने पक्षियों के बारे में जानकारी दी और गुजरात के पक्षियों की एक बुक गिफ्ट में दी।
जब उन्होंने किताब से बर्ड्स के बारे में जानकारी हासिल की तो उनमें दिलचस्पी बढ़ी। तभी उनके एक मित्र ने बताया कि चंडीगढ़ में बर्ड रेस के बारे में सूचना दी। सिद्धार्थ ने बर्ड रेस में हिस्सा लिया और पहली ही रेस में उनकी टीम ने पहला पुरस्कार हासिल किया।