कांग्रेस की ओर से विधायक करण दलाल ने सदन में पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया और नियुक्तियों के लिए हुड्डा का भी धन्यवाद करने की बात कही। दलाल ने कहा कि जब से ये लगे हैं, तब से इन्हें सेवा सुरक्षा प्रदान कर वित्तीय लाभ दें। इस पर वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।
श्रम राज्य मंत्री नायब सैनी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस उंगली कटवाकर शहीद होना चाह रही है। विधेयक पारित होने के बाद अतिथि अध्यापकों ने शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को मिठाई खिलाकर उनका धन्यवाद किया। शिक्षा मंत्री ने गेस्ट टीचर्स को पूरे मन से बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
2013 में तत्कालीन एसीएस ने शपथ पत्र देकर हटाने के लिए मांगे थे 322 दिन
फरवरी 2013 में तत्कालीन स्कूल शिक्षा सचिव सुरीना राजन ने सुप्रीम कोर्ट में इनकी नियुक्ति संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान गेस्ट टीचर्स को सेवामुक्त करने के लिए 322 दिन का समय लेते हुए उसके बाद हटाने का शपथ पत्र दे दिया था। मगर, दिसंबर 2014 में सत्ता संभाल चुकी भाजपा सरकार ने मुख्य सचिव से हाईकोर्ट में नया शपथ पत्र दिलाया। जिसमें खाली पदों पर इनकी सेवाएं लेने की बात कही गई, जिससे एक भी शिक्षक नहीं हटा। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि गेस्ट टीचर्स की नौकरी सुरक्षित कर वह गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
गेस्ट टीचर्स को नियुक्ति के समय पीरियड के हिसाब से पैसे मिलते थे, 2009 में इन्हें 13500 रुपये के मानदेय पर किया गया। इसके बाद इनके वेतन में आंदोलनों के दौरान बढ़ोतरी होती गई। भाजपा सरकार ने प्रदेश में कार्यरत गेस्ट टीचर्स को वेतन पर लाते हुए सितंबर 2018 में 25 फीसदी बढ़ोतरी की।
पहले जेबीटी और ड्राइंग टीचर्स को 21 हजार 715 रुपये मिलते थे अब उन्हें 26 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। टीजीटी को 24 हजार 1 रुपये की जगह 30 हजार रुपये और पीजीटी और लेक्चरर को 29 हजार 715 की जगह 36 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है।
राजरानी की रोहतक में गोली लगने से हुई मौत
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि आंदोलन के दौरान गेस्ट टीचर्स पर गोली तक कांग्रेस शासन में चली। जींद की राजरानी की रोहतक में गोली लगने से मौत भी हुई। हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी अजय लोहान व गेस्ट टीचर्स धर्मबीर कौशिक, राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि 22 हजार में से लगभग साढ़े तेरह हजार गेस्ट ही स्कूलों में अब रह गए हैं।
13 साल के दौरान लगभग पांच सौ की मौत हो गई, जबकि बाकी या तो दूसरे विभागों में पक्की नौकरी पा गए या फिर दूसरा कामधंधा शुरू कर दिया। 2005 में गेस्ट टीचर्स का एक मजदूर से भी कम वेतनमान तय किया गया था।