उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीएम के अपने जिले व उनकी पत्नी के संसदीय क्षेत्र में ही कानून-व्यवस्था कांग्रेसियों ने अपने हाथों में ले रखी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 11 दिसंबर तक पटियाला पुलिस ने नाजायज पर्चा रद्द न किया और मामले के असली आरोपियों की गिरफ्तारी न की तो संघर्ष का एलान किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी, तो मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
मजीठिया व चीमा को दिखाईं काली झंडियां
पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया और डॉ. दलजीत सिंह चीमा जब गांव तख्तूमाजरा पहुंचे तो दोनों नेताओं को ग्रामीणों ने काली झंडियां दिखाईं। दोनों नेताओं ने इस पर कहा कि अगर वह एक महिला की मौत का अफसोस करने आए तो इसमें क्या गलत है।
गांव के सरपंच हरंसगत सिंह ने बताया कि गांव के इस परिवार में पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं पर उस समय मजीठिया या अन्य कोई अकाली नेता दुख प्रगट करने नहीं आया। जिन लोगों ने उन पर हमला किया था, उनको बचाने के लिए व पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए यह घटिया राजनीति हो रही है। जिस महिला की मौत हुई है वह पिछले कुछ साल से बीमार थी और उसका सरकारी अस्पताल पटियाला में इलाज चल रहा था। अकाली नेता जो विधायक मदन लाल जलालपुर पर आरोप लगा रहे हैं, वह बेबुनियाद है। जिन लोगों ने मुझ पर जानलेवा हमला किया था पुलिस ने उन पर कानून मुताबिक कार्रवाई की है।