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किसान आंदोलन में सुखबीर बादल ने बिक्रम मजीठिया को किया किनारे, सियासी गलियारों में चर्चा

Tue, 29 Sep 2020 02:05 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, जालंधर

सार

  • आगे आकर खुद सुखबीर ने संभाला मोर्चा, मजीठिया बच रहे हैं बयानबाजी से
  • ईडी के पास लंबित मामलों की जांच के कारण भी मजीठिया बैकफुट पर
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Bikram Majithia, Sukhbir Badal
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विस्तार
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किसानों के तीन कानून पास होने के बाद अकाली दल शोर शराबा मचा रहा है, लेकिन धरनों-प्रदर्शनों से शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल के सारथी विक्रमजीत सिंह मजीठिया गायब हैं। इस बात की राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या विक्रमजीत सिंह मजीठिया को केंद्र सरकार के खिलाफ बयानबाजी से दूर रखना एक रणनीति है या ईडी की फाइल का खौफ लिहाजा सुखबीर बादल ने खुद मोर्चा संभाल रखा है और मीटिंग में भी मजीठिया को तरजीह नहीं दी जा रही है।
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अकाली दल में कोई समय था कि दोआबा व माझा की जिम्मेदारी विक्रमजीत सिंह मजीठिया के कंधों पर थी। मजीठिया को माझा का जरनैल भी कहा जाता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के खिलाफ मजीठिया ने खूब धरने-प्रदर्शन किए और खुद सड़कों पर आते रहे। अब किसानों के लिए अकाली दल ने पंजाब में मोर्चा संभाला है और प्रदर्शन शुरू किए हैं। प्रदर्शन से विक्रमजीत सिंह मजीठिया नदारद हैं। वह अमृतसर हलके से बाहर नहीं निकले और न ही उन्होंने कृषि अध्यादेशों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है।

ऐसी भी चर्चा है कि भाजपा व आरएसएस अकाली दल की गतिविधियों पर पूरी नजर रखे है और अकाली दल के हर कदम की रिपोर्ट रोजाना दिल्ली भेजी जा रही है। ईडी की फाइल दोबारा खुल सकती है, ऐसे भी कयास लगाये जा रहे हैं।
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बुजुर्ग लीडरशिप भी विक्रमजीत सिंह मजीठिया से खुश नहीं

भोला ड्रग रैकेट में विक्रमजीत सिंह मजीठिया को ईडी सम्मन कर चुकी है और अभी केस की जांच पूरी नहीं हुई है। हरसिमरत कौर बादल के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन अब हरसिमरत के पीएम मोदी की टीम से बाहर आते ही दोबारा चर्चा शुरू हो गई है कि मजीठिया को ईडी दोबारा बुला सकती है।

दरअसल, अकाली दल की बुजुर्ग लीडरशिप भी विक्रमजीत सिंह मजीठिया से खुश नहीं है। अकाली दल में बुजुर्ग नेता रंजीत सिंह बह्मपुरा, सेवा सिंह सेखवां, पूर्व विधायक बोनी अजनाला, पूर्व सांसद रतन सिंह अजनाला मजीठिया से खफा होकर पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। ये नेता प्रकाश सिंह बादल के करीबी थे, लेकिन मजीठिया की टीम ने माझा में इस टीम को किनारे लगा दिया था, यहीं कारण है इन नेताओं ने अकाली दल को अलविदा कह दिया।

हालांकि प्रकाश सिंह बादल माझा व दोआबा की बागडोर मजीठिया को सौंपे जाने से नाखुश हैं। इसको लेकर प्रकाश सिंह बादल खुलेआम स्टेज पर कह चुके हैं कि अगर मजीठिया का बस चले तो मुझसे सीएम की कुर्सी भी छीन लें। अब किसानों के पक्ष में धरनों से मजीठिया का अचानक गायब होना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना है। मजीठिया ही दोआबा में अपनी टीम चलाते रहे हैं और उनके इशारों पर ही दोआबा की अकाली लीडरशिप काम करती है।
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