नाइट फूड स्ट्रीट खाना खाने जा रहे युवकों की बाइक अचानक स्लिप हो गई। हादसे में पीयू के कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल हो गया। हादसा पंजाब यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 3 पर हुआ। हादसे में चालक की मौके पर मौत हो गई और दूसरे का पीजीआई में इलाज चल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बाइक विशाल ठाकुर(27) चला रहा था। जबकि, पिछली सीट पर आशीष नाम का युवक बैठा था। विशाल और आशीष मूलरूप से हमीरपुर, हिमाचल के रहने वाले हैं। विशाल पंजाब सचिवालय में कांट्रैक्ट पर जॉब कर रहा था, जबकि, आशीष पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ रहा है।
प्रत्यक्षदर्शी सेक्टर-25 निवासी आकाश के अनुसार बाइक सवार सेक्टर-15 की ओर से राइट टर्न लेकर सेक्टर-25 की ओर जा रहे थे। जैसे ही पीयू गेट नंबर-3 पर पहुंचे अचानक बाइक फिसलकर डिवाइडर से जा टकराया। इस दौरान बाइक से दोनों सवार उछलकर दूर जा गिरे।
हादसे के बाद गेट के सामने राहगीरों की भीड़ लग गई। वहीं, सूचना पाकर पहुंची पीसीआर पुलिस ने दोनों को पीजीआई भर्ती करवाया। लेकिन, विशाल ठाकुर को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हादसे में मरने वाले के दोस्त ने सुनाई दर्द की दास्तां
पंजाब यूनिवर्सिटी गेट नंबर-3 के सामने हादसे में मौत के मुंह से बचकर निकलने बाइक सवार आशीष ने घटना की पूरी दास्तां पुलिस को सुनाई। उसने बताया कि रात के 9:40 पर विशाल का फोन आया था।
उसने कहा कि यार आशीष बहुत दिनों से एक पार्टी बाकी है। तुम भी काम पूरा करके नाइट फूड स्ट्रीट पर आ जाओ। वहीं दोनों खाना खाकर साथ में ही रूम पर चल देंगे। लेकिन, किसको पता था कि अपने दोस्त के साथ उसकी यह आखिरी पार्टी होगी।
कुछ देर आराम के बाद आशीष ने बताया कि रात में नाइट फूड स्ट्रीट पर खाना खाने के बाद हम लोग बाइक से डड्डूमाजरा को निकले। जैसे ही बाइक पीयू गेट के सामने पहुंची अचानक स्लिप कर गई।
हादसा इतना भयानक था कि विशाल करीब पांच फीट ऊपर से दस मीटर दूर जाकर गिरा। इस दौरान उसका हेलमेट नीचे गिर गया था और उसका सिर डिवाइडर से जा टकराया। उसने कहा कि गंभीर हेड इंजरी होने की वजह से ही उसकी मौत हुई होगी।
तकलीफ छिपाकर मुस्कुराने की आदत थी
हादसे में घायल आशीष ने बताया कि विशाल उसके अच्छे दोस्तों में था। दोनों डड्डूमाजरा में किराए पर रहते थे। आशीष ने कहा कि विशाल बहुत ही नेक दिल इंसान था। अपनी मुश्किलों को अपनी मुस्कुराहट में बड़ी आसानी से छिपा लेता था। उसने कभी भी अपनी किसी समस्या को किसी के सामने नहीं रखा। खुद की समस्याओं का खुद से हल खोजने की उसमें जिद थी।