भारतीय हॉकी टीम के कप्तान पदमश्री सरदारा सिंह की स्टडी से जुड़ा एक सच आपको चौंका देगा। क्या आप जानते हैं कि सरदारा सिंह ने अभी तक ग्रेजुऐशन भी पास नहीं की। चार साल से वे इस कोशिश में हैं कि ग्रेजुऐशन कंप्लीट कर लें।
कोच बदलेव सिंह ने बताया कि सरदारा सिंह को ग्रेजुएशन के कुछ पेपर देने हैं। वह चार साल से ग्रेजुऐशन पूरी करने की सोच रहा है मगर एग्जाम के दिनों में कोई न कोई टूर्नामेंट आ जाता है जिससे वह पेपर नहीं दे पा रहा।
इस बार वीसी साहब से प्रार्थना करेंगे कि बाद में सरदार सिंह अपने बचे हुए पेपर दे सके। जिससे उसकी ग्रेजुएशन पूरी हो सके। ताकि उसका प्रमोशन डीएसपी से एसपी के पद पर हो सके।
ऐसा शिष्य पाकर हो गया धन्य
वहीं सरदारा सिंह के कोच बलदेव सिंह ने बताया कि सरदारा को पदमश्री मिलने की खबर से वह बहुत खुश हैं। सरदारा सिंह उनके प्रथम शिष्य हैं और जब शिष्य को कोई सम्मान मिलता है तो सीना गर्व से और फूल जाता है।
सरदारा सिंह ने जो उपलब्धि पाई है उससे वह बहुत खुश हैं इसस नौजवानों को प्रेरणा मिलेगी। अभी कुछ दिन पहले सरदारा सिंह उनसे मिला था बातचीत के दौरान उन्होंने उससे कहा था कि कभी भी जिंदगी में संतुष्ट नहीं होना हमेशा आगे बढ़ते रहना है। हॉकी को देश में ऊंचाइयों तक ले जाना है।
सरदारा सिंह को पदमश्री मिलने से परिवार में जश्न
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदारा सिंह को पदमश्री से सम्मानित किए जाने पर सरदार सिंह के गांव संतनगर में खुशी का माहौल है। परिजनों ने सरदारा सिंह को पदमश्री का सम्मान मिलने पर एक दूसरे का मुंह मीठा करवाया और बधाई देने वालों के साथ बैठकर चाय पी।
सरदारा सिंह के पिता गुरनाम सिंह ने बताया कि उनको अपने बेटे पर नाज है उसने माता-पिता, गांव और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि देश की बड़ी हस्तियां अमिताभ बच्चन, बादल साहब के साथ सम्मान मिलना बड़े ही गर्व की बात है। ऐसे में यह सम्मान का महत्व और बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि अब तो सरदारा की उपब्धियों पर जश्न मनाने की आदत हो चुकी है वह कोई न कोई ऐसी उपब्धियां हासिल करता रहता है जिससे उनको बहुत गर्व होता है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान सरदारा सिंह का सम्मान नहीं बल्कि हर उस नौजवान का सम्मान है जो सरदारा सिंह जैसा बनना चाहता है। इस सम्मान से हॉकी के प्रति देश में उत्साह बढ़ेगा और नौजवानों को प्रेरणा मिलेगी।