केपी सिंह के अनुसार बैंकों को छात्रवृत्ति डालने के लिए भेजे गए खाता और आधार नंबर बदलकर राशि हड़प ली गई। अधिकारियों की मिलीभगत से इन्हें बदला गया। छात्रवृत्ति आवंटन की ऑनलाइन प्रक्रिया में भी कुछ कमियां हैं, जिनका फायदा उठाकर यह सब किया गया।
ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं हैं, आधार कार्ड नंबर भरने का विकल्प ऑफलाइन है, जिसे आसानी से बदल दिया गया, जिससे खाता संख्या बदलने में दिक्कत नहीं हुई। अन्य जिलों में भी जांच जल्दी पूरी की जाएगी। विजिलेंस का एक थाना तीन जिलों की जांच करेगा।
फिलहाल 2016 के बाद की जांच होगी
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना 1981 से चली आ रही है लेकिन ऑनलाइन इसे 2016 में किया गया है। इसलिए पहले 2016 के बाद वितरित राशि की जांच की जाएगी। केपी सिंह ने कहा कि 2016 से पहले की अवधि में बहुत बड़े के घोटाले की आशंका है। इसकी जांच ऑनलाइन राशि वितरण की जांच के बाद करेंगे।
घोटाले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर
विजिलेंस विभाग ने मंगलवार केा मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। उप-निदेशक राजिंद्र सांगवान, उप निदेशक जतिंद्र सिंह (सेवानिवृत्त), सहायक बिलेंद्र सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर कुलजीत सिंह, सुशील कुमार जिला कल्याण अधिकारी सोनीपत, सुरेंद्र कुमार कार्यवाहक जिला कल्याण अधिकारी सोनीपत, रेणु सिसोदिया जिला कल्याण अधिकारी रोहतक, बलवान सिंह, सेवानिवृत्त तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी रोहतक, सुरिंद्र कुमार लेखाकार-कम-लिपिक सोनीपत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
सरकारी खजाने को चपत लगाने पर अरविंद पुत्र चांदी राम हिसार, नवीन पुत्र प्रकाश गांव भैरण, जिला रोहतक, तेजपाल पुत्र तुलसी राम शर्मा गांव खरकखुर्द जिला भिवानी, और राहुल पुत्र सुभाष चंद पटेल नगर रोहतक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इन पर आपराधिक षड्यंत्र रचकर, आधार नंबर बदलकर धोखाधड़ी कर 23 करोड़ 6 लाख 92 हजार 273 रुपये का गबन करने का आरोप है। पांच करोड़ बीस लाख 58 हजार 332 रुपये की राशि बैंक में वापस आई है, जोकि संदिग्ध है।
बैंक की शिकायत पर विभाग ने की जांच
बैंक ने योजना से संबंधित खातों में मिसमैच पाया तो बैंक की शिकायत पर एससी, बीसी कल्याण विभाग ने इस मामले की जांच की। जिसके बाद ब्यूरो को पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया। अब तक की पड़ताल में पाया गया है कि घोटालेबाजों ने फर्जी संस्थानों, आधार कार्ड नंबर बदलकर व फर्जी छात्रों के नाम पर भी छात्रवृति योजना के तहत राशि लेकर गबन किया है।
अब तक की जांच में लगभग 30-40 प्रतिशत छात्र फर्जी पाए गए हैं और फर्जी संस्थानों की संख्या 25-30 प्रतिशत है। आगे की जांच में अगर अनियमितता पाई जाती है तो और मामले भी दर्ज किए जाएंगे।