पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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याचिका पर खंडपीठ के दोनों ही जजों के एकमत नहीं होने के कारण अब इस याचिका को चीफ जस्टिस के समक्ष भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। अब चीफ जस्टिस इस याचिका पर सुनवाई के लिए अलग से खंडपीठ का गठन कर सकते हैं या याचिका फुल बेंच का गठन कर सुनवाई के लिए भेजी जा सकती है। हालांकि फिलहाल अब आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई न होना पूर्व सीएम हुड्डा के लिए राहत की बड़ी खबर है।
नोटिस पर आपत्ति, नहीं दिया बचाव का मौका
ढींगरा आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा 11 मार्च 2016 को नोटिस भेज आयोग के समक्ष पेश होने के आदेश दिए थे। खंडपीठ के दोनों ही जजों ने कहा ही कि आयोग अगर किसी के खिलाफ शिकायत या कोई दस्तावेज मिलने पर नोटिस भेजता है तो वह धारा-8 बी के तहत ही भेजा जाना चाहिए था।
जांच में शामिल होने से पहले उनके खिलाफ मिली शिकायत और दस्तावेज की पूरी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी ताकि वह अपने बचाव में तथ्य या दस्तावेज पेश कर सकते। संविधान भी अनुच्छेद-14 के तहत इसका अधिकार प्रत्येक नागरिक को देता है। नोटिस एक्ट की धारा-8 बी के तहत भेजा ही नहीं गया, ऐसे में इस नोटिस को दोनों ही जजों ने अवैध माना है।