पंजाब विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा का समर्थन लेकर पंथक नेताओं और सिख समुदाय की आलोचना का शिकार हुए शिअद को डेरे का भूत लगातार डरा रहा है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के चुनाव में उतरे शिअद के प्रत्याशी इस मुद्दे को लेकर अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेताओं से दूरी बनाकर चल रहे हैं।
डीएसजीएमसी चुनाव में उतरे शिअद के उम्मीदवारों ने अपने प्रचार केइश्तेहारों पर प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल का फोटो तक नहीं लगाया है। वे खुद को शिअद प्रत्याशी बताने से भी बच रहे हैं। इधर, डीएसजीएमसी चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही शिअद ने चंडीगढ़ से पार्टी के कई बड़े नेताओं को भी दिल्ली भेजा है ताकि वहां पार्टी उम्मीदवारों के हक में प्रचार किया जा सके,
लेकिन हालात यह हैं कि पार्टी उम्मीदवार ही इस कोशिश में लगे हैं कि शिअद के नेताओं को वे साथ लेकर प्रचार में न जाएं क्योंकि प्रत्याशियों को यह आभास हो गया है कि डेरे के समर्थन केचलते सिख शिअद से खासे नाराज हैं। यह नाराजगी डीएसजीएमसी चुनाव में शिअद प्रत्याशियों पर भारी पड़ सकती है।
शिअद प्रत्याशियों की एक परेशानी यह भी
सुखबीर सिंह बादल
- फोटो : अमर उजाला
शिअद प्रत्याशियों की परेशानी यह भी है कि सरना बंधुओं ने डीएसजीएमसी चुनाव में शिअद के खिलाफ इसी बात को मुद्दा बनाया हुआ है और वे सिख समुदाय के बीच इस मामले को शिअद द्वारा श्री अकाल तख्त के हुक्मनामे की अवज्ञा करना, बता रहे हैं।
शिअद प्रत्याशियों का यह भी मानना है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव और दिल्ली में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव अलग-अलग मामले हैं, लेकिन दोनों ही जगह सिख समुदाय शिअद की ओर से सिरसा डेरे का साथ लेने के मुद्दे को हजम नहीं कर पा रहा।
इस बीच, मंगलवार को एसजीपीसी की जांच कमेटी, जिसे शिअद की ओर से डेरा सिरसा का समर्थन लिए जाने की जांच का काम सौंपा गया था, ने एसजीपीसी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब यह रिपोर्ट श्री अकाल तख्त के जत्थेदार को सौंपी जाएगी, जो इस फैसला लेंगे। माना जा रहा है कि जांच कमेटी ने शिअद के उन नेताओं पर सीधे उंगली उठाई है, जो चुनाव से पहले सिरसा डेरे में जाकर डेरामुखी से मिले थे।
माना जा रहा है कि शिअद ने जांच के घेरे में आए अपने नेताओं को भी डीएसजीएमसी चुनाव से दूर रहने को कहा है। शिअद के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल और प्रधान सुखबीर सिंह बादल विदेश दौरे पर चले गए हैं। वे डीएसजीएमसी चुनाव में अपने पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करते दिखाई नहीं देंगे।