फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाह रे चंडीगढ़ निगम: 18 साल तक उन मकानों को भेजते रहे नोटिस जो थे ही नहीं, ऐसे खुली पोल

Wed, 05 Oct 2022 10:53 AM IST
ajay kumar नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नगर निगम ने डेटा तैयार किया तो पता चला कि विवादित संपत्तियों के कारण उनका 150 करोड़ रुपये का एरियर फंस गया है। इसमें 35 करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला अदालत में विचाराधीन है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ नगर निगम।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ नगर निगम 18 साल तक ऐसी इमारतों को संपत्ति कर का नोटिस भेजता रहा जो वास्तव में मौके पर थी ही नहीं। नगर निगम का 1.35 करोड़ रुपये का संपत्ति कर अटकने के बाद सभी संपत्तियों का अटैचमेंट नोटिस निकाल दिया गया। संपत्ति अटैच करने के लिए अधिकारी मौके पर पहुंचे तब पता चला कि ज्यादातर संपत्तियां मौके पर नहीं हैं, वहीं जो संपत्ति हैं उनका कोई वारिस नहीं है और वह सीज हैं। इसके बाद नगर निगम ने तत्काल डीसी दफ्तर को पत्र लिखकर इन संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। पत्र में पूछा गया है कि क्या पहले यहां कोई संपत्ति थी कि नहीं। संपत्ति थी तो वह कहां गई। जो संपत्ति सील है वह किसने की है। 

विज्ञापन


नगर निगम वर्ष 2004 से लोगों को संपत्ति कर का नोटिस भेज रहा है। इस दौरान कुछ संपत्तियों को लगातार नोटिस जाते रहे लेकिन इन्हें रिसीव कौन कर रहा है, यह किसी ने नहीं देखा। निगम ने वर्ष 2019 से अपने डाटा को ऑनलाइन करना शुरू किया। इस दौरान सालों से जिन संपत्तियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी, उन्हें अटैच करने का नोटिस निकाला गया।

संपत्ति को अटैच करने के लिए उसके मालिक के हस्ताक्षर जरूरी हैं। जब टीम ने मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि वहां कोई बिल्डिंग ही नहीं है। कुछ संपत्तियां सीज हैं और उनका कोई वारिस नहीं है। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न होने के कारण संपत्तियों को अटैच भी नहीं किया जा सकता था, इसलिए निगम ने डीसी दफ्तर से इन संपत्तियों की स्थिति की जानकारी देने को कहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

निगम का 150 करोड़ का एरियर फंसा, संपत्ति सीज किसने की जानकारी नहीं
नगर निगम ने डेटा तैयार किया तो पता चला कि विवादित संपत्तियों के कारण उनका 150 करोड़ रुपये का एरियर फंस गया है। इसमें 35 करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला अदालत में विचाराधीन है। साथ ही 2.5 करोड़ रुपये चैरिटेबल ट्रस्ट के मामले में फंसे हैं। सेक्टर-46 और 41 में टीनशेड हटाकर बूथ बनाए गए थे लेकिन उसकी जानकारी निगम को नहीं दी गई इसलिए टीनशेड का एक करोड़ रुपये संपत्ति कर बकाया है। साथ एक करोड़ रुपये की संपत्ति सीज है और 45 लाख रुपये इंडस्ट्रियल एरिया में संपत्ति कर के ब्याज माफी के नाम पर फंसा है। इसके अलावा अन्य जगहों पर बकाया एरियर फंसा है। 

अभी तक 60 हजार आवासीय व 10 हजार व्यावसायिक संपत्ति कर बकाया
इस वित्तीय वर्ष में आवासीय संपत्ति में एक लाख 40 हजार में से 80 हजार लोगों ने कर भर दिया है। 60 हजार लोगों का कर बकाया है। आवासीय संपत्ति में 29 हजार लोगों में से 19 हजार ने संपत्ति कर भर दिया है, 10 हजार लोग रह गए हैं। इससे पहले निगम ने अपना सिस्टम ऑनलाइन करने का काम शुरू किया तो ऐसे लोगों को भी नोटिस भेज दिए जिन्होंने संपत्ति कर भर दिया था। जिन लोगों के पास पुरानी रसीदें नहीं थीं उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

सबसे ज्यादा यहां मिलीं गुमनाम संपत्तियां

 
सेक्टर गुम और बेनाम संपत्ति
11 63
9 11
8 14
7 13
27 31
29 39
18 24
15 18
38 29
37 17
29 2
28 5
39 13
36 2
34 4
35 3
19 1
 

हम हर तरफ से कोशिश कर रहे हैं संपत्ति कर को पूरी तरह से समायोजित किया जाए। सरकारी और निजी संपत्ति की वास्तविक स्थिति को जानने और सीज संपत्ति की जानकारी के लिए एस्टेट ऑफिस को पत्र लिखा है ताकि हमें अपने सही एरियर की जानकारी मिल सके। आनिंदिता मित्रा, चंडीगढ़ नगर निगम आयुक्त।




 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें