यह अधिकारी एजेंटों व बिचौलिए की मिलीभगत के साथ वाहनों की फिजिकल वेरिफिकेशन किए बिना ही मॉडल के हिसाब से 2800 रुपये से लेकर 1000 रुपये प्रति वाहन रिश्वत के तौर पर लेते थे और फिर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर देते थे। इस संबंधी शिकायतें मिलने के बाद विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर संगरूर के दफ्तर की अचानक जांच की।
मौके पर ही तीन आरोपियों को काबू कर लिया गया, जिनमें एजेंट धरमिंदर पाल उर्फ बंटी निवासी संगरूर, क्लर्क गुरचरन सिंह और डाटा एंट्री ऑपरेटर जगसीर सिंह शामिल रहे। साथ ही करीब 40 हजार रुपये की रिश्वत की राशि व घोटाले से संबंधित कई दस्तावेज भी बरामद किए गए। मामले में आरटीए रविंदर सिंह गिल, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर महिंदरपाल, क्लर्क गुरचरन सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर जगसीर सिंह, बिचौलिए धरमिंदरपाल उर्फ बंटी व सुखविंदर सुक्खी और अन्य एजेंटों के खिलाफ विजिलेंस थाना पटियाला में केस दर्ज किया गया है।
करीब आठ सालों से चल रहा था फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया है कि पिछले आठ सालों से यह सब काम चल रहा था और हर महीने 2000-2500 वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे। इस दौरान आरोपी रिश्वत के तौर पर बड़ी रकम वसूलते थे। मामले में फिलहाल जांच जारी है और अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।