शिविर के पहले दिन एक दिव्यांग खिलाड़ी को कैंप से बाहर निकाल दिया गया
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प्राथमिक प्रशिक्षण केंद्र भानू पंचकूला में आयोजित 4 दिवसीय दिव्यांग राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर पहले ही दिन सुविधाओं को लेकर विवादों में घिर गया।
शिविर का आयोजन भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस बल की ओर से किया गया था। शिविर के पहले दिन एक दिव्यांग खिलाड़ी को कैंप से बाहर निकाल दिया गया, जबकि एक खिलाड़ी खुद शिविर छोड़ गया। दोनों खिलाड़ियों ने शिविर के संचालकों पर गंभीर आरोप जड़े, वहीं, मेहता फाउंडेशन के संस्थापक आदित्य मेहता ने आरोपों को नकारते हुए कहा, कुछ लोग शिविर का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते यह कदम उठाना पड़ा।
सोने से लेकर शौचालय तक दिक्कतें: दिव्यांग प्रदीप
राष्ट्रीय शिविर से निकाले गए दिव्यांग खिलाड़ी प्रदीप मूलरूप से गाजियाबाद(यूपी) से बैडमिंटन में हिस्सा लेने के लिए आए थे। उनका आरोप था कि शिविर में उन्हें सुविधाओं के अभाव से सोने से लेकर शौचालय जाने तक परेशानी हुई। वह स्पाइनल कॉड इंजरी (पैरा प्लीजिया) से पीड़ित है। सोने के लिए उसे हार्ड गद्दा दिया गया। वह पूरी रात सो नहीं पाया। वाटर और एयर युक्त गद्दे पर सोता तो ठीक रहता। चंडीगढ़ से उसे स्पेशल 2200 रुपये के गद्दे खरीदकर लाने पड़े।अगर इस गद्दे पर लगातार चार दिन सो जाता तो उसके पीठ पर जख्म बन जाते। उसने विरोध जताया तो उन्हें शिविर से बाहर निकाल दिया गया।
स्पाइनल कॉड इंजरी से पीड़ितों को कोई सुविधा नहीं: दिव्यांग रवि
शिविर का आयोजन भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस बल की ओर से किया गया था।
शिविर खुद छोड़कर गए हरिद्वार के दिव्यांग खिलाड़ी रवि सरवालिया ने शिविर संचालकों पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। साथ ही, कहा कि न तो शिविर से सेंटर आने के लिए कोई वाहन सुविधा दी गई, न ही उसके व्हील चेयर का पेंचर ठीक करवाया। शिविर में स्पाइनल कॉड इंजरी के पीड़ितों के लिए कोई सुविधा नहीं है। सोने के लिए सख्त गद्दे मिले, अगर इस गद्दे पर वह सोता तो उसे बेड सोर हो जाता। शौचालय के लिए भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कोट्स
पिछले दो दिनों से प्रदीप और रवि एसी रूम की डिमांड कर रहे थे। अक्सर रात को कॉल कर बाहर रूम लेकर रहने की बात करते थे। हम उन्हें यहां मजबूत बनाने के लिए इस प्रशिक्षण शिविर में लाए थे। रहा सवाल गद्दे का तो जितनी सुविधाएं फाउंडेशन के पास थी, प्रतिभागियों को दिया गया है। बार बार प्रतिभागियों से मिलकर उन्हें भड़का रहे थे। इसी वजह से उन्हें शिविर से निकाल दिया गया है।
आदित्य मेहता, संस्थापक, आदित्य मेहता फाउंडेशन।