हरियाणा में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत चरम पर पहुंच चुकी है। सत्तारूढ़ भाजपा व कांग्रेस के सामने आने वाले दिनों में सबसे बड़ी चुनौती बगावत को रोकने की होगी। दोनों दलों में ही 90 सीटों पर टिकट के इच्छुक नेताओं की भरमार है। कांग्रेस में टिकट को लेकर 1200 से अधिक आवेदन आए हैं तो भाजपा में आंकड़ा कई गुना है। रविवार से टिकट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
भाजपा ने टिकट वितरण को लेकर रविवार को संसदीय दल की बैठक बुलाई है। पीएम नरेंद्र मोदी अपने सात दिवसीय दौरे से स्वदेश लौट आए हैं, उनकी मौजूदगी में ही संसदीय दल की बैठक होगी।
इसमें संसदीय बोर्ड के सदस्यों के मौजूद रहने के साथ ही हरियाणा के प्रतिनिधि के तौर पर अधिकृत प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला 90 सीटों की टिकटों का पैनल प्रस्तुत करेंगे, जिस पर पीएम नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा व संसदीय बोर्ड के सदस्य अंतिम निर्णय पर मुहर लगाएंगे। कांग्रेस की राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कमेटी की पहली बैठक 30 सितंबर को होगी,जिसकी अध्यक्षता कमेटी चेयरमैन मधुसूदन मिस्त्री करेंगे।
बैठक में विधानसभा उम्मीदवारों की निर्विवाद सूची पर जहां अंतिम मुहर लगाई जाएगी, वहीं अन्य सीटों के पैनल को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी। इसके बाद कांग्रेस की पहली सूची आएगी। भाजपा पहली सूची 29 सितंबर को जारी होने का दावा कर रही है। उम्मीद के अनुसार सिंगल पैनल वाली सीटों की घोषणा इसी दिन हो सकती है। हालांकि, एक साथ ही सभी 90 भाजपा उम्मीदवारों की सूची भी जारी करने की अटकलें हैं।
दावेदार ज्यादा होने पर बगावत की आशंका
भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदार बहुत ज्यादा हैं। इसलिए टिकट घोषित होने पर बगावत की आशंका है। चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेता जरूर जुगत भिड़ाएंगे। क्योंकि, भाजपा व कांग्रेस दोनों ही सभी आवेदकों को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं। दोनों ही पार्टियों में अनेक नेता ऐसे हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ने का मन बनाया हुआ है।
बड़े नेताओं को साधने में छूटेंगे पसीने
भाजपा व कांग्रेस में बड़े नेता अपने चहेतों व परिवार के लोगों के लिए टिकट चाह रहे हैं। इनमें भाजपा की तरफ से सांसद भी शामिल हैं तो कांग्रेस के कई दिग्गज परिजनों को टिकट के लिए अड़े हुए हैं। अब दोनों दलों को टिकट वितरण के बाद जहां परिजनों व चहेतों के लिए टिकट मांग रहे नेताओं को मनाना होगा, वही असंतुष्टों से भी निपटना पड़ेगा ताकि भितरघात से चुनावी गणित न गड़बड़ाए।