बजट में प्रधानमंत्री कुसुम योजना को नए साल में भी विस्तार देते हुए योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप लगाने में मदद की घोषणा की गई है। यह योजना पिछले साल देश में लागू की गई थी। इसी तरह, किसानों की आय दोगुनी करने की केंद्रीय योजना का उल्लेख भी बजट में है लेकिन यह 2022 तक होगा।
इस साल किसानों के लिए 15 लाख करोड़ के कृषि लोन की बात भी कही गई है लेकिन पंजाब के लिए समस्या यह है कि यहां प्रति व्यक्ति आय पूरे देश में सबसे अधिक है, जिसके चलते बीते कई सालों से अनेक केंद्रीय योजनाओं में पंजाब के लोग पात्र घोषित नहीं हो पाते, क्योंकि वे पहले से ही ज्यादा कमा रहे हैं।
पंजाब की जिन अन्य मांगों पर आम बजट 2020-21 पूरी तरह खामोश-
- सरहदी जिलों में ढांचागत विकास के लिए केंद्रीय परियोजनाएं नहीं।
- सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए विशेष बजट का प्रावधान नहीं।
- पंजाब के सरहदी जिलों में रेलवे के विस्तार की मांग की अनदेखी।
- पठानकोट-गुरदासपुर रेलवे लाइन डबल करने, गुरदासपुर जिले के अंतर्गत रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने का फैसला नहीं।
- फिरोजपुर-चंडीगढ़ ट्रेन को फाजिल्का से चलाने, फाजिल्का-हरिद्वार सीधी ट्रेन, जलालाबाद-मुक्तसर नई रेल लाइन, जालंधर व जालंधर कैंट स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फरीदकोट में छह रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग, राजपुरा-मोहाली रेललाइन का बाकी 14 किमी. हिस्सा पूरा कर चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेललाइन की मांग इस बार भी पूरी नहीं हुईं।
- लंबे समय से टैक्स में राहत की मांग कर रहे साइकिल, होजिरी, लोहा इंडस्ट्री हुई मायूस।
- पर्वतीय पड़ोसी राज्यों की तरह पंजाब को भी विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पर चुप्पी।
- किसानों की कर्ज माफी की राज्य सरकार की योजना में केंद्र से सहयोग की आस रही अधूरी।