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बजट 2020: पंजाब की झोली फिर खाली, न कोई विकास योजना और न ही कोई विशेष पैकेज

Sat, 01 Feb 2020 09:32 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Budget 2020 - फोटो : पीटीआई
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लोकसभा में शुक्रवार को बजट सत्र के आरंभ में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अभिभाषण में केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहाकि पंजाब में इस साल श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व बड़े पैमाने पर मनाने का एलान किया है। इससे उम्मीद जगी कि शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब 2020-21 का आम बजट पढ़ेंगी तो उसमें पंजाब के इस बड़े धार्मिक आयोजन के लिए बजट का प्रावधान भी होगा। 

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दो सालों की तरह ही इस बार भी केंद्र सरकार का बजट किसी भी स्तर पर पंजाब को छू कर नहीं गुजरा। दो आम बजट की तरह ही इस बार भी पंजाब की झोली खाली रही। सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब द्वारा लंबे समय से की जा रही विशेष पैकेज की मांग, कर्ज में डूबे प्रदेश के किसानों के लिए कर्ज माफी योजना में योगदान, पड़ोसी पर्वतीय राज्यों को विशेष पैकेज के कारण पंजाब से उद्योगों का पलायन की भरपाई, राज्य के जल संसाधनों के संरक्षण, प्रदेश के सिर चढ़े भारी भरकम कर्ज और बकाया सीसीएल की राशि में केंद्रीय मदद जैसे अहम मुद्दों पर आम बजट पूरी तरह खामोश रहा है।

 रेल बजट में तेजस जैसी एक सौ ट्रेनें देशभर में चलाने की बात कही गई है लेकिन इनमें से कोई रेलगाड़ी पंजाब से होकर गुजरेगी, ऐसा कोई वादा नहीं किया गया है। इसी तरह 27 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रेक के विद्युतीकरण की बात भी कही गई है। 2020-21 के बजट में शामिल इन योजनाओं के 2022-23 तक पूरा होने का भरोसा दिलाया गया है।

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बजट में प्रधानमंत्री कुसुम योजना को नए साल में भी विस्तार देते हुए योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप लगाने में मदद की घोषणा की गई है। यह योजना पिछले साल देश में लागू की गई थी। इसी तरह, किसानों की आय दोगुनी करने की केंद्रीय योजना का उल्लेख भी बजट में है लेकिन यह 2022 तक होगा। 

इस साल किसानों के लिए 15 लाख करोड़ के कृषि लोन की बात भी कही गई है लेकिन पंजाब के लिए समस्या यह है कि यहां प्रति व्यक्ति आय पूरे देश में सबसे अधिक है, जिसके चलते बीते कई सालों से अनेक केंद्रीय योजनाओं में पंजाब के लोग पात्र घोषित नहीं हो पाते, क्योंकि वे पहले से ही ज्यादा कमा रहे हैं।

पंजाब की जिन अन्य मांगों पर आम बजट 2020-21 पूरी तरह खामोश-
  • सरहदी जिलों में ढांचागत विकास के लिए केंद्रीय परियोजनाएं नहीं।
  •  सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए विशेष बजट का प्रावधान नहीं।
  •  पंजाब के सरहदी जिलों में रेलवे के विस्तार की मांग की अनदेखी।
  •  पठानकोट-गुरदासपुर रेलवे लाइन डबल करने, गुरदासपुर जिले के अंतर्गत रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने का फैसला नहीं।
  • फिरोजपुर-चंडीगढ़ ट्रेन को फाजिल्का से चलाने, फाजिल्का-हरिद्वार सीधी ट्रेन, जलालाबाद-मुक्तसर नई रेल लाइन, जालंधर व जालंधर कैंट स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फरीदकोट में छह रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग, राजपुरा-मोहाली रेललाइन का बाकी 14 किमी. हिस्सा पूरा कर चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेललाइन की मांग इस बार भी पूरी नहीं हुईं।
  •  लंबे समय से टैक्स में राहत की मांग कर रहे साइकिल, होजिरी, लोहा इंडस्ट्री हुई मायूस।
  • पर्वतीय पड़ोसी राज्यों की तरह पंजाब को भी विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पर चुप्पी।
  • किसानों की कर्ज माफी की राज्य सरकार की योजना में केंद्र से सहयोग की आस रही अधूरी।
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