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Chandigarh News: शाहपुर कॉलोनी के 75 परिवारों को बड़ा झटका

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चंडीगढ़। शाहपुर कॉलोनी में रहने वाले 75 परिवारों को चंडीगढ़ प्रशासन की स्मॉल फ्लैट्स स्कीम के तहत आवास मिलने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। यूटी एस्टेट ऑफिस ने इन सभी आवेदकों को चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 के तहत फ्लैट आवंटन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। प्रशासन के मुताबिक संबंधित परिवार सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमणकारी नहीं थे बल्कि निजी कृषि भूमि पर रह रहे थे इसलिए वे योजना की पात्रता शर्तों के दायरे में नहीं आते।
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एस्टेट ऑफिस की ओर से जारी आदेश में राजेश कुमार गिरि सहित शाहपुर कॉलोनी के अन्य निवासियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके दावों की जांच पहले ही स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की जा चुकी है। यह प्रक्रिया पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पूरी की गई। प्रशासन के अनुसार 26 फरवरी को सभी याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था। इस दौरान उनसे वोटर रिकॉर्ड, चुनावी सूची और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था।
दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद स्क्रीनिंग कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आवेदक योजना की मूल पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 का उद्देश्य उन झुग्गीवासियों का पुनर्वास करना था जिन्होंने वर्ष 2006 में किए गए बायोमेट्रिक सर्वे के दौरान सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर रखा था। योजना के तहत केवल उन्हीं लोगों को पात्र माना गया था, जिनका नाम उस सर्वे सूची में दर्ज था।
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प्रशासन ने अपने आदेश में तहसीलदार (राजस्व) और संबंधित हल्का पटवारी द्वारा 23 मई 2025 को किए गए फील्ड सर्वे का भी हवाला दिया है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सभी 75 आवेदक शाहपुर कॉलोनी की निजी कृषि भूमि पर रह रहे थे। इस आधार पर उन्हें योजना का लाभ देने से इनकार कर दिया गया। आदेश में यह भी कहा गया है कि निजी कृषि भूमि पर किए गए निर्माण पंजाब न्यू कैपिटल (पेरीफेरी) कंट्रोल एक्ट, 1952 की धारा 5, 6 और 11 का उल्लंघन हैं। चूंकि आवेदक सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमणकारी नहीं पाए गए, इसलिए उन्हें पुनर्वास योजना के तहत फ्लैट आवंटित नहीं किए जा सकते। एस्टेट ऑफिस ने साफ किया है कि इस संबंध में स्पीकिंग ऑर्डर पहले ही जारी किया जा चुका था और सभी 75 याचिकाकर्ताओं को अयोग्य घोषित किया जा चुका है। ऐसे में वर्तमान आवेदन पर आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। प्रशासन के इस फैसले के बाद प्रभावित परिवारों के दोबारा अदालत का रुख करने की संभावना जताई जा रही है।
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