बीबी जागीर कौर कभी शिअद (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान की नजदीकी थीं। 1995 में बीबी जागीर कौर शिअद (बादल) की सदस्य बनीं। 1996 में एसजीपीसी के चुनाव में उन्होंने पहली बार सदस्य का चुनाव लड़ा और जीतीं। इसके बाद पहली बार 1997 में भुलत्थ विधान क्षेत्र से भाग्य आजमाया और विधायक बनीं। तब मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी। 2019 के लोक सभा चुनाव में बीबी जागीर ने पहली बार खडूर साहिब लोक सभा हलके से चुनाव लड़ा लेकिन वे हार गईं।
पुलिस प्रशासन ने एसजीपीसी परिसर में किए कड़े सुरक्षा प्रबंध
एसजीपीसी अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनाव से पहले पुलिस की ओर से कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह समुद्री हाल जहां अध्यक्ष पद का चुनाव होना था वहां बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। एसजीपीसी परिसर स्थित गुरु राम दास सरायें व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब के रास्तों पर अवरोध लगाकर सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। एसजीपीसी परिसर में प्रवेश करने वालों पर पुलिस की कड़ी नजर थी।
शिअद (बादल) में सुखबीर-मजीठिया संस्कृति भारी : ढींडसा
शिअद (डेमोक्रेटिव) के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ढींडसा ने कहा कि जब से शिअद (बादल) में सुखबीर बादल व बिक्रम मजीठिया कल्चर भारी हुआ है, तबसे एसजीपीसी चुनाव में लिफाफा संस्कृति भारी हो गई है। एसजीपीसी अध्यक्ष का नाम लिफाफे से निकालना सिखों की इस महान संस्था के अस्तित्व को नकारने जैसे है। एसजीपीसी के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनाव के समय गुरुद्वारा एक्ट के नियमों का पालन करना काबिज धड़े की बड़ी जिम्मेदारी है।
आईटी विंग ने वोटिंग के दौरान ही बीबी जागीर कौर को घोषित कर दिया था विजेता
एसजीपीसी के आईटी सेल ने अध्यक्ष पद की वोटिंग के दौरान ही बीबी जागीर कौर को विजेता घोषित कर दिया। एसजीपीसी की सोशल मीडिया साइट में बीबी जागीर कौर के अध्यक्ष चुने जाने पर देश-विदेश से बधाइयां मिलने लगीं जबकि उस समय एसजीपीसी के सदस्य वोटिंग कर रहे थे। नियमानुसार जब तक चुनाव परिणाम न आ जाएं तब तक किसी को विजेता घोषित नहीं किया जा सकता।