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पुराने कार्यकाल के दौरान कई पंथक संकट खड़े कर चुकी हैं बीबी जागीर 

Sat, 28 Nov 2020 01:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अशोक नीर, अमृतसर
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बीबी जागीर - फोटो : File Photo
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डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम को माफी देने, बरगाड़ी बेअदबी, बहिबलकलां गोली कांड व लापता पावन स्वरूपों के साथ-साथ कई पंथक मामलों में कटघरे में खड़े शिअद ने लगभग 20 वर्ष बाद बीबी जागीर कौर को एसजीपीसी के अध्यक्ष पद की ‘सेवा’ सौंपी है। 1999 में जब तत्कालीन एसजीपीसी अध्यक्ष जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा-तत्कालीन व शिअद सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल के बीच अहम का टकराव हुआ था तब बादल ने सत्ता बल का फायदा उठाते हुए जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा को मार्च 1999 में एसजीपीसी अध्यक्ष पद से हटा दिया था। 

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प्रकाश सिंह बादल ने उस समय एसजीपीसी में जत्थेदार टोहरा के 24 वर्ष के अध्यक्षीय काल के प्रभाव को समाप्त करने व अकाली दल को संकट से निकालने के लिए पहली बार किसी महिला को एसजीपीसी का अध्यक्ष नियुक्त किया था। तब बीबी जागीर कौर का पहला कार्यकाल मार्च 1999 से नवंबर 1999 तक और दूसरा कार्यकाल नवंबर 1999 से  लेकर नवंबर 2000 तक रहा। वर्ष 2000 में  बेटी हरप्रीत कौर उर्फ रोजी की हत्या के आरोपों में घिरी बीबी जागीर कौर को उस समय एसजीपीसी के अध्यक्ष की लंबी पारी खेलना का मौका नहीं मिला। 

शिअद (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर बादल के लिए नाराज हो चुके पंथक वोट व पंथक मुद्दों पर घिरे बादल परिवार को बाहर निकालने के लिए संकटमोचन की दरकार थी। लिहाजा बादल परिवार ने एक बार फिर बीबी जागीर कौर पर अपना विश्वास प्रकट किया और उनकी ताजपोशी की। बीबी जागीर ने बादल परिवार के साथ अपने रिश्तों को कभी कमजोर नहीं होने दिया। इस बार एसजीपीसी के अध्यक्ष पद की सेवा कांटों से भरी है। 
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एसजीपीसी के आगामी साल में बादल परिवार को एक पंथक चेहरे की तलाश थी, जो चुनाव में पंथक मुद्दों पर विरोधियों को पंथक मर्यादायों के अनुसार जवाब दे सके। बीबी जागीर कौर एक डेरे की प्रमुख हैं। पंथक मर्यादाओं की जानकार हैं। लेकिन पंथक वोटों को शिअद के पक्ष में वे कितना मोड़ पाएंगी इसका पता तो आगामी चुनाव में चलेगा।  

विवादों से बीबी जागीर का पुराना नाता
अपने पिछले कार्यकाल के दौरान बीबी जागीर कौर ने कई पंथक मुद्दों पर भी ऐसे विवाद छेड़ दिए जिससे शिअद (बादल) की पंथ विरोधी छवि बनने लगी थी। उन्होंने तत्कालीन श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी पूर्ण सिंह के साथ सीधा टकराव पैदा किया। बीबी जागीर एसजीपीसी के पहली प्रधान थी, जिसे अकाल तख्त साहिब में तलब किया गया था। सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में महिलाओं के कीर्तन करने के मुद्दे पर भी बीबी जागीर को पंथक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। उनके कार्यकाल में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब को यूनेस्को की हेरिटेज सूची में शामिल करने के लिए बनाए गए डोजियर का भी विरोध झेलना पड़ा था।
 
बेटी की हत्या के आरोपों में हुआ राजनीतिक नुकसान 
बेटी की हत्या के आरोपों के कारण बीबी जागीर कौर को राजनीतिक नुकसान भी झेलना पड़ा। 2007 में जब प्रदेश में अकाली-भाजपा सरकार का गठन हुआ तब बीबी जागीर कौर को भुलत्थ विधान सभा हलके से करारी हार मिली थी लेकिन 2012 में बीबी जागीर कौर ने एक बार फिर अपने विधान सभा हलके से चुनाव जीतीं और बादल सरकार में मंत्री बनीं। अभी मंत्री बने एक महीना ही बीता था की मार्च 2012 में बीबी जागीर कौर को सीबीआई की अदालत ने बेटी की हत्या के आरोप में पांच वर्ष की कैद की सजा सुनाई। तब जागीर कौर को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बीबी जागीर ने इस सजा के विरुद्ध पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जहां से 2018 में उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था।
 

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1996  में पहली बार लड़ा था एसजीपीसी चुनाव 

बीबी जागीर कौर कभी शिअद (अमृतसर) के  अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान की नजदीकी थीं। 1995 में बीबी जागीर कौर शिअद (बादल) की सदस्य बनीं। 1996 में एसजीपीसी के चुनाव में उन्होंने पहली बार सदस्य का चुनाव लड़ा और जीतीं। इसके बाद पहली बार 1997 में भुलत्थ विधान क्षेत्र से भाग्य आजमाया और विधायक बनीं। तब मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी। 2019 के लोक सभा चुनाव में बीबी जागीर ने पहली बार खडूर साहिब लोक सभा हलके से चुनाव लड़ा लेकिन वे हार गईं।

पुलिस प्रशासन ने एसजीपीसी परिसर में किए कड़े सुरक्षा प्रबंध
एसजीपीसी अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनाव से पहले पुलिस की ओर से कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।  एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह समुद्री हाल जहां अध्यक्ष पद का चुनाव होना था वहां बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। एसजीपीसी परिसर स्थित गुरु राम दास सरायें व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब के रास्तों पर अवरोध लगाकर सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। एसजीपीसी परिसर में प्रवेश करने वालों पर पुलिस की कड़ी नजर थी।

शिअद (बादल) में सुखबीर-मजीठिया संस्कृति भारी : ढींडसा
शिअद (डेमोक्रेटिव) के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ढींडसा ने कहा कि जब से शिअद (बादल) में सुखबीर बादल व बिक्रम मजीठिया कल्चर भारी हुआ है, तबसे एसजीपीसी चुनाव में लिफाफा संस्कृति भारी हो गई है। एसजीपीसी अध्यक्ष का नाम लिफाफे से निकालना सिखों की इस महान संस्था के अस्तित्व को नकारने जैसे है। एसजीपीसी के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनाव के समय गुरुद्वारा एक्ट के नियमों का पालन करना काबिज धड़े की बड़ी जिम्मेदारी है।    

आईटी विंग ने वोटिंग के दौरान ही बीबी जागीर कौर को घोषित कर दिया था विजेता
एसजीपीसी के आईटी सेल ने अध्यक्ष पद की वोटिंग के दौरान ही बीबी जागीर कौर को विजेता घोषित कर दिया। एसजीपीसी की सोशल मीडिया साइट में बीबी जागीर कौर के अध्यक्ष चुने जाने पर देश-विदेश से बधाइयां मिलने लगीं जबकि उस समय एसजीपीसी के सदस्य वोटिंग कर रहे थे। नियमानुसार जब तक चुनाव परिणाम न आ जाएं तब तक किसी को विजेता घोषित नहीं किया जा सकता।
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