एसजीपीसी अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनाव से पहले पुलिस की ओर से कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह समुद्री हाल में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। यहीं पर चुनाव संपन्न हुए। एसजीपीसी परिसर स्थित श्री गुरु राम दास सरायें व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब के रास्तों पर अवरोध लगाकर सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। एसजीपीसी परिसर में प्रवेश करने वालों पर पुलिस की कड़ी नजर थी।
शिअद (बादल) में सुखबीर-मजीठिया संस्कृति भारी : ढींडसा
शिअद (डेमोक्रेटिव) के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ढींडसा ने कहा कि जब से शिअद (बादल) में सुखबीर बादल व बिक्रम मजीठिया कल्चर भारी हुआ है, तब से एसजीपीसी चुनाव में लिफाफा संस्कृति भारी हो गई है। एसजीपीसी अध्यक्ष का नाम लिफाफे से निकालना सिखों की इस महान संस्था के अस्तित्व को नकारने जैसा है। एसजीपीसी के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनाव के समय गुरुद्वारा एक्ट के नियमों का पालन करना काबिज धड़े की बड़ी जिम्मेदारी है।
बादल विरोधी पंथक संगठनों ने किया विरोध
शिअद (अमृतसर) व सतिकार कमेटियों के सैकड़ों सदस्यों ने शुक्रवार सुबह सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य प्रवेश द्वार घंटा घर स्थित प्लाजा के बाहर शांतिंपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हरबीर सिंह संधू ने कहा कि वह बादल परिवार की ओर से भेजे गए लिफाफे में से निकलने वाले एसजीपीसी प्रधान व श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को स्वीकार नहीं करेंगे। जब तक लापता पावन स्वरूपों के मामले में आरोपी एसजीपीसी कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कानूनी करवाई नहीं की जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
आईटी सेल ने पहले ही बीबी जागीर कौर को घोषित कर दिया था विजेता
एसजीपीसी के आईटी सेल ने अध्यक्ष पद की वोटिंग के दौरान ही बीबी जागीर कौर को विजेता घोषित कर दिया। एसजीपीसी की सोशल मीडिया साइट में बीबी जागीर कौर के अध्यक्ष चुने जाने पर देश-विदेश से बधाइयां मिलने लगीं, जबकि उस समय एसजीपीसी के सदस्य वोटिंग कर रहे थे। नियमानुसार जब तक चुनाव परिणाम घोषित नहीं होते हैं, तब तक किसी को भी विजेता घोषित नहीं किया जा सकता ।