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जाट महारैली को लेकर माहौल गरमाया, हुड्डा ने आरक्षण समिति को दिया झटका

Tue, 07 Nov 2017 03:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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जाट नेता यशपाल मलिक
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जसिया में 26 नवंबर को होने वाली जाट महारैली को लेकर माहौल गरम होता जा रहा है। वहीं रैली से पहले जाट आरक्षण संघर्ष समिति को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आने से इनकार कर दिया। साफ कहा कि उनका 26 नवंबर को जसिया में आने का कोई प्रोग्राम नहीं है। साथ ही कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता कृष्णमूर्ति हुड्डा ने कहा कि पूर्व सीएम जाति विशेष नहीं, बल्कि 36 बिरादरी की राजनीति करते हैं।
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ऐसे में जाति विशेष के नाम पर हो रही महारैली में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व सांसद सांसद दीपेंद्र हुड्डा नहीं आएंगे। उधर, रोहतक ब्लॉक की सरपंच एसोसिएशन ने जाट महारैली के बहिष्कार का फैसला किया है। दूसरी तरफ जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने दावा किया है कि चंद सरपंचों के कहने से कुछ नहीं होता, जाट समाज उनके साथ है। शुक्रवार को रोहतक ब्लाक की सरपंच एसोसिएशन आपात मीटिंग हुई थी, जिसमें जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक से 9 सवालों के जवाब मांगे थे।

इसके लिए दो दिन का समय दिया था। पूछा था कि आंदोलन अपने मुद्दों से भटक गया है। समाज के एकत्रित चंदे से बिल्डिंग बनाना गलत है। मकड़ौली खुर्द गांव के सरपंच व रोहतक ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित कुमार ने बताया कि सोमवार को दोपहर बीडीपीओ कार्यालय में दोबारा सरपंच एसोसिएशन की मीटिंग हुई, जिसमें जाट आरक्षण संघर्ष समिति से ओमप्रकाश हुड्डा व कृष्णलाल हुड्डा भी पहुंचे।
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दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा, लेकिन लंबी बहस के बावजूद जाट आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य सरपंच एसोसिएशन को संतुष्ट नहीं कर सके। इसके चलते सरपंच एसोसिएशन ने 26 नवंबर को जाट आरक्षण संघर्ष समिति की जसिया में होने वाली जाट महारैली का बहिष्कार करने का फैसला किया है। सरपंच एसोसिएशन का कहना है कि सरपंचों द्वारा पूछे गए सवालों का वाजिब जवाब देने की बजाय उल्टा सरपंचों को सरकार के इशारे पर काम करने वाला बताया जा रहा है। हर गांव में धड़े बनाए जा रहे हैं।

जबकि सरपंचों ने पिछले डेढ़ साल से यशपाल मलिक की समिति की हर मुहिम का बढ़-चढ़कर साथ दिया है। जरा से सवाल पूछते ही सरकारी कैसे हो गये? तथाकथित भूमि पूजन के अवसर पर लोगों को बुलाने के लिये जिन जाट नेताओं, बड़ी हस्तियों, खिलाड़ियों, फिल्मी अभिनेताओं व गायक के नाम का सहारा लिया जा रहा है उन सभी को आज से पहले चले धरनों पर क्यों नहीं बुलाया गया। जब प्रदेश में दंगे हो रहे थे और युवा शहीद हुए थे तो उस समय ये हस्तियां दंगों को रोकने के लिए क्यों नहीं बुलाई गईं।
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